Full Story

तेहरान। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि हर संकट का समाधान युद्ध में तलाशना सही नहीं है और जिन समस्याओं को तर्क, बातचीत एवं कूटनीति से सुलझाया जा सकता है, उन्हें टकराव के रास्ते पर नहीं ले जाना चाहिए। पेजेशकियन ने तेहरान में आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान सूझबूझ, बेहतर योजना और रणनीतिक सोच के जरिए मौजूदा चुनौतियों से बाहर निकल सकता है। इस दौरान देश के राष्ट्रीय हितों और सम्मान की रक्षा भी सुनिश्चित की जा सकती है। ‘बातचीत से समाधान संभव तो टकराव क्यों?’ तस्नीम की रिपोर्ट के मुताबिक, श्री पेजेशकियन ने हालिया अमेरिका-इजराइल संघर्ष के दौरान ईरानी समाज के विभिन्न वर्गों की दृढ़ता की प्रशंसा की। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि युद्ध को हर समस्या का स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता।उन्होंने कहा, “युद्ध हमेशा समाधान नहीं होता।” जिन विवादों को विवेक और कूटनीति से हल किया जा सकता है, उनमें सैन्य टकराव की जगह संवाद को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। राष्ट्रपति के मुताबिक, ईरान समझदारी और गंभीर चिंतन के साथ मौजूदा परिस्थितियों से पार पाते हुए गरिमा एवं राष्ट्रीय गौरव की दिशा में आगे बढ़ सकता है। इस्लामाबाद समझौते को बताया गौरवपूर्ण ईरानी राष्ट्रपति ने इस्लामाबाद में हुए समझौता ज्ञापन की भी प्रशंसा की और इसे इस्लामिक गणराज्य के लिए गर्व का विषय बताया। उन्होंने दावा किया कि वैश्विक विश्लेषणों में ईरान को हालिया टकराव का विजेता माना गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जीत के दावों के बीच देश को जल्दबाजी या अति आत्मविश्वास से बचते हुए सोच-समझकर आगे बढ़ना होगा। इमाम अली की सीख का दिया हवाला श्री पेजेशकियन ने शांति को लेकर इमाम अली द्वारा अपने गवर्नर मलिक अल-अश्तर को दिए गए निर्देश का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि विरोधी की ओर से आया शांति प्रस्ताव जनहित और ईश्वर की प्रसन्नता के अनुरूप हो तो उसे केवल अविश्वास के कारण खारिज नहीं करना चाहिए। उनके अनुसार, शांति से सैनिकों को राहत मिलती है तथा लोगों, बाजारों और समाज में सुरक्षा का माहौल बनता है। शांति जरूरी, लेकिन लापरवाही नहीं राष्ट्रपति ने कहा कि शांति समझौते के बाद भी सुरक्षा को लेकर सावधानी कम नहीं होनी चाहिए। विरोधी बातचीत या समझौते की आड़ में अचानक हमला कर सकता है, इसलिए लगातार चौकसी जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस चेतावनी का अर्थ शांति का विरोध करना नहीं, बल्कि विवेक, सावधानी और दूरदर्शिता के साथ फैसले लेना है। ‘भरोसा नहीं, फिर भी समझदारी से निकालेंगे रास्ता’ श्री पेजेशकियन ने कहा कि ईरान को विरोधी पक्ष पर भरोसा नहीं है लेकिन इसके बावजूद तेहरान संकट से निकलने के लिए विवेकपूर्ण उपाय और रणनीतिक रास्ते अपनाएगा। उन्होंने कहा कि कुछ शक्तियां ईरान को मजबूत होते नहीं देखना चाहतीं लेकिन देश बुद्धिमत्तापूर्ण नीतियों, क्रांति के नेता अयातुल्ला सैयद मोजतबा हुसैनी खामेनेई के मार्गदर्शन और सरकार के तीनों अंगों के प्रमुखों के बीच समन्वय से आगे बढ़ सकता है।