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पटना। बिहार के रोहतास जिले में डेहरी नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) विमल कुमार हत्याकांड को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने प्रदेश सरकार और पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि मामले में जल्दबाजी में सिर्फ ड्राइवर को आरोपी बनाकर असली साजिशकर्ताओं को बचाने की कोशिश की जा रही है जबकि पीड़ित परिवार जिस विधायक पर आरोप लगा रहा है, उसकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच नहीं की जा रही। यह सिर्फ एक अधिकारी नहीं, पूरे प्रशासन पर हमला पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में श्री यादव ने कहा कि विमल कुमार की हत्या केवल एक सरकारी अधिकारी की हत्या नहीं बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र पर हमला है। उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह दूसरे सरकारी अधिकारी की हत्या है और इससे पूरे बिहार के प्रशासनिक अधिकारियों में भय का माहौल पैदा हुआ है। मुख्य आरोपी विधायक है लेकिन पुलिस जांच नहीं कर रही नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि मृतक के परिजन लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा-रामविलास) के विधायक पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं लेकिन पुलिस उस दिशा में जांच करने की बजाय सिर्फ ड्राइवर को आरोपी बनाकर मामला बंद करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि पूरे घटनाक्रम में विधायक की कथित भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। सिर्फ ड्राइवर ने हत्या की, यह कहानी हजम नहीं होती श्री यादव ने पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि मृतक के शरीर पर मिले चोटों के निशान देखकर ऐसा लगता है कि वारदात में एक से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि पुलिस की कहानी लगातार बदल रही है। पहले ड्राइवर ने दो अज्ञात बाइक सवारों पर हमला करने का आरोप लगाया जबकि अब वही ड्राइवर हत्या की बात स्वीकार कर रहा है। काम का दबाव हत्या की वजह कैसे हो सकता है पुलिस की उस थ्योरी पर भी नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाए, जिसमें ड्राइवर ने कथित तौर पर काम के दबाव और आपसी विवाद के चलते हत्या करने की बात कही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर छुट्टी नहीं मिलने या काम के दबाव में कोई ड्राइवर अपने अधिकारी की हत्या कर देता है तो क्या यही तर्क हर मामले में लागू होगा? उन्होंने पुलिस के इस तर्क को अविश्वसनीय बताया। विधायक पर रंगदारी के आरोपों की भी हो जांच श्री यादव ने कहा कि संबंधित विधायक पर रंगदारी मांगने और हत्या की साजिश रचने जैसे आरोप लगाए जा रहे हैं। ऐसे में पुलिस को इन आरोपों की भी निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विधायक के खिलाफ अब तक नामजद एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई है। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई सार्वजनिक दस्तावेज या जांच रिपोर्ट पेश नहीं की। परिवार को मिले सुरक्षा और सरकारी नौकरी नेता प्रतिपक्ष ने राज्य सरकार से मांग की कि मृत अधिकारी के परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए और उनकी पत्नी को सरकारी नौकरी दी जाए। उन्होंने कहा कि यदि ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारियों को सुरक्षा का भरोसा नहीं मिलेगा तो प्रशासनिक व्यवस्था पर इसका नकारात्मक असर पड़ेगा। क्या है पूरा मामला रोहतास जिले के डेहरी-डालमियानगर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी विमल कुमार शनिवार शाम 'एक शाम शहीदों के नाम' कार्यक्रम में शामिल होने के बाद कार से पटना लौट रहे थे। रास्ते में औरंगाबाद जिले के बारुण थाना क्षेत्र के घनौती पुल के पास वह गंभीर रूप से घायल मिले। उन्हें जमुहार स्थित नारायण मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस का दावा- ड्राइवर ने कबूला जुर्म शुरुआत में पुलिस ने लूट, पुरानी रंजिश और सुनियोजित हत्या सहित कई एंगल से जांच शुरू की थी। जांच के दौरान ड्राइवर मिथलेश कुमार बार-बार अपना बयान बदलता रहा। उसके कपड़ों पर खून के धब्बे मिलने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। मगध रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) विकास वैभव के अनुसार, पूछताछ में ड्राइवर ने हत्या की बात स्वीकार करते हुए बताया कि काम के दबाव और आपसी विवाद के कारण उसने रास्ते में कार रोककर लोहे की रॉड से विमल कुमार पर हमला किया, जिससे उनकी मौत हो गई। छह महीने पहले हटाया गया था ड्राइवर पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि करीब छह महीने पहले विमल कुमार ने ड्राइवर को नौकरी से हटा दिया था लेकिन बाद में उसे दोबारा रख लिया गया था।