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कटिहार। बिहार में कटिहार जिले के बारसोई प्रखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय माहीनगर में पिछले नौ दिनों से मिड-डे मील बंद रहने का मामला सामने आया है, जहां 142 नामांकित छात्रों में महज सात बच्चे स्कूल पहुंचे जबकि भोजन नहीं मिलने से कई बच्चे भूखे पेट घर लौटने और स्कूल आना छोड़ने को मजबूर हैं, जिससे योजना के संचालन और उपस्थिति रिकॉर्ड में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। 'सर कहते हैं, घर से खाना खाकर आओ' विद्यालय के बच्चों ने बताया कि पिछले नौ दिनों से स्कूल में मिड-डे मील नहीं बन रहा है। उनका कहना है कि जब वे भोजन के बारे में पूछते हैं तो उन्हें कहा जाता है कि "घर से खाना खाकर आओ।" बच्चों के अनुसार, भोजन नहीं मिलने से कई छात्र अब नियमित रूप से स्कूल आना भी छोड़ चुके हैं। गरीब बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा असर मिड-डे मील सिर्फ भोजन नहीं बल्कि गरीब और जरूरतमंद बच्चों को स्कूल से जोड़ने की एक अहम योजना है। लेकिन, जब स्कूल में खाना ही नहीं मिलेगा तो बच्चों का स्कूल से मोहभंग होना स्वाभाविक है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के हिस्से का निवाला छीना जा रहा है और इसका सबसे ज्यादा नुकसान गरीब परिवारों को उठाना पड़ रहा है। 142 बच्चों का नामांकन, लेकिन स्कूल में सिर्फ 7 विद्यालय के रिकॉर्ड में 142 बच्चों का नामांकन दर्ज है लेकिन मौके पर केवल सात छात्र उपस्थित मिले। अभिभावकों का आरोप है कि वास्तविक उपस्थिति बेहद कम होने के बावजूद रजिस्टर में प्रतिदिन करीब 100 बच्चों की हाजिरी दर्ज की जा रही है। इससे मिड-डे मील योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितता की आशंका और गहरा गई है। प्रधानाध्यापिका बोलीं—बर्तन टूटे हैं, गैस नहीं है विद्यालय की प्रधानाध्यापिका कुमारी बंदना ने बताया कि उन्होंने 22 जुलाई को विद्यालय का प्रभार संभाला है। उनके अनुसार स्कूल में मिड-डे मील बनाने के लिए बर्तन टूटे हुए हैं और गैस की व्यवस्था भी उपलब्ध नहीं है। उन्होंने दावा किया कि फिलहाल बच्चों को भोजन के स्थान पर बिस्किट दिए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने उठाए कई सवाल स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि स्कूल में भोजन नहीं बन रहा और बच्चे भी नहीं आ रहे तो आखिर रिकॉर्ड में इतनी अधिक उपस्थिति कैसे दर्ज की जा रही है? उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। अधिकारी बोले—दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी चंदन प्रसाद ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि जांच में मिड-डे मील योजना के संचालन में लापरवाही, अनियमितता या किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा विभाग की निगरानी पर उठे सवाल राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं कि सभी सरकारी विद्यालयों में प्रत्येक कार्य दिवस पर बच्चों को गर्म और पौष्टिक मिड-डे मील उपलब्ध कराया जाए। इसके बावजूद नौ दिनों तक भोजन बंद रहने, बच्चों की घटती उपस्थिति और रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी ने शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी है कि बच्चों के हक के निवाले से खिलवाड़ करने वालों पर क्या कार्रवाई होती है।