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संजय कौशिक मोतिहारी। पूर्वी चंपारण में 24.91 लाख रुपये की बरामदगी का मामला अब केवल नकदी जब्ती तक सीमित नहीं रह गया है। इस प्रकरण ने पुलिस व्यवस्था की कार्यशैली, पारदर्शिता और नीयत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महज 73 मिनट में लाखों रुपये बरामद करने वाली पुलिस को उसी मामले में प्राथमिकी दर्ज करने में पूरे दो दिन लग गए। अब गिरफ्तार आरोपियों को राहत दिलाने के नाम पर 35 लाख रुपये की कथित डील के आरोपों ने पूरे पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) और जिला पुलिस दोनों स्तर पर जांच जारी है। इस बीच तुरकौलिया थानाध्यक्ष सम्पत कुमार को निलंबित कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, 25 मई की रात गुप्त सूचना पर चकिया टोल प्लाजा के समीप एक कार के गुप्त तहखाने से 24 लाख 91 हजार 300 रुपये बरामद किए गए थे। कार्रवाई रात 11:57 बजे शुरू हुई और 1:10 बजे समाप्त, यानी मात्र 73 मिनट में पूरी बरामदगी कर ली गई। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि इतने बड़े मामले में प्राथमिकी 28 मई को दर्ज की गई। बरामदगी और एफआईआर के बीच करीब दो दिन का अंतर अब जांच का अहम बिंदु बन गया है। पुलिस ने इस मामले में दो नेपाली नागरिकों समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया था। शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने बरामद राशि को पटना से लाया गया मनी एक्सचेंज का पैसा बताया था, लेकिन जांच में नकदी का स्रोत हजारीबाग सामने आने से पुलिस को दिए गए बयानों और वास्तविक तथ्यों में विरोधाभास मिला है।मामले ने तब नया मोड़ लिया जब आरोप लगा कि गिरफ्तार लोगों को बचाने के नाम पर 35 लाख रुपये की कथित वसूली की गई। शिकायत के बाद ईओयू ने जांच शुरू की, जबकि पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने प्रशिक्षु डीएसपी ऋषभ कुमार को विभागीय जांच सौंपी। जांच के दौरान यह भी जानकारी सामने आई कि कथित रूप से ली गई राशि बाद में दो किस्तों में लौटाई गई। गिरफ्तार लोगों के वीडियो बयान भी दर्ज किए गए, जिनमें उन्होंने किसी प्रकार की बकाया राशि या शिकायत से इनकार किया। हालांकि जांच एजेंसियां केवल इन बयानों के आधार पर मामले को समाप्त करने के पक्ष में नहीं हैं और पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र पड़ताल कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, जांच अब उन लोगों तक पहुंच गई है जिनके माध्यम से कथित लेन-देन हुआ। पैसे का वास्तविक स्रोत, राशि लौटाने का निर्णय किसके निर्देश पर लिया गया और पूरे प्रकरण में किन-किन अधिकारियों या अन्य व्यक्तियों की भूमिका रही, इसकी गहन जांच की जा रही है। चर्चा है कि एक वरीय डीएसपी रैंक के अधिकारी भी जांच के दायरे में हैं और उनकी कथित संपत्तियों की भी पड़ताल की जा रही है। इसी बीच विभागीय जांच में एफआईआर में तथ्यों को कथित रूप से तोड़-मरोड़कर दर्ज करने और संदिग्ध आचरण की बात सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक ने तुरकौलिया थानाध्यक्ष सम्पत कुमार को निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई प्रशिक्षु डीएसपी ऋषभ कुमार की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है। फिलहाल 35 लाख रुपये की कथित डील, वसूली और पुलिस की भूमिका से जुड़े सभी आरोप जांच के अधीन हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह मामला केवल प्रक्रियागत लापरवाही का था या इसके पीछे सुनियोजित बदनीयती और मिलीभगत भी शामिल थी।