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मुंबई। वैश्विक बाजारों में कमजोरी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित सख्त नीतियों को लेकर बढ़ी चिंता के बीच मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली देखी गई, जिससे सेंसेक्स 893 अंक और निफ्टी 278 अंक टूटकर 12 जून के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर बंद हुए। दोपहर बाद बढ़ी बिकवाली, बाजार ने गंवाई बड़ी बढ़त कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स ने संभलने की कोशिश की लेकिन दोपहर बाद बिकवाली का दबाव इतना बढ़ गया कि बाजार तेजी से फिसल गया। बीएसई का सेंसेक्स 893.39 अंक यानी 1.16 फीसदी टूटकर 76,200.68 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई का निफ्टी 278.80 अंक गिरकर 23,824.10 के स्तर पर पहुंच गया। दोनों सूचकांक 12 जून के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर बंद हुए। फेड का डर बना बाजार का सबसे बड़ा विलेन बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिकी फेडरल रिजर्व महंगाई को नियंत्रित करने के लिए आगे भी सख्त कदम उठा सकता है। इसी आशंका ने दुनियाभर के निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया और इसका असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा मार कारोबार में आईटी कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स में इंफोसिस 3.36 फीसदी और टीसीएस 3.16 फीसदी टूट गए। एचसीएल टेक्नोलॉजीज और टेक महिंद्रा जैसे बड़े आईटी शेयर भी दबाव में रहे। विदेशी बाजारों पर निर्भर आईटी कंपनियों को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी हुई दिखाई दी। मिडकैप और स्मॉलकैप भी नहीं बच पाए केवल बड़े शेयर ही नहीं बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप-50 इंडेक्स 0.90 फीसदी और स्मॉलकैप-100 इंडेक्स 0.48 फीसदी गिर गया। एनएसई में कारोबार करने वाली 3,399 कंपनियों में से 2,280 शेयर लाल निशान में बंद हुए। इन सेक्टरों में दिखी सबसे ज्यादा कमजोरी आईटी, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, धातु, रियल्टी, मीडिया, ऑयल एंड गैस और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव रहा। हालांकि फार्मा और हेल्थकेयर शेयरों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और बाजार को कुछ सहारा दिया। दुनिया भर के बाजारों में भी गिरावट भारतीय बाजार की कमजोरी अकेली नहीं थी। जापान का निक्केई 3.55 फीसदी, हांगकांग का हैंग सेंग 1.82 फीसदी और चीन का शंघाई कंपोजिट 1.37 फीसदी टूट गया। यूरोपीय बाजारों में भी शुरुआती कारोबार के दौरान कमजोरी देखी गई, जिससे निवेशकों का भरोसा और कमजोर पड़ा।