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मोतिहारी। सरकारी नौकरी की चाहत को कथित ठगों ने भरोसे और फर्जी दस्तावेजों के ऐसे जाल में बदल दिया कि करीब तीन वर्षों में एक परिवार से लगभग 25 लाख रुपये लिए जाने का आरोप है। बिहार में पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में सामने आए इस मामले ने न सिर्फ नौकरी के नाम पर होने वाली ठगी पर सवाल खड़े किए हैं बल्कि कथित तौर पर सरकारी कार्यालयों की मुहर, लेटर नंबर, पहचान पत्र और सर्विस बुक के इस्तेमाल ने जांच का दायरा भी बढ़ा दिया है। पुलिस ने मामले में असदुल्ला को गिरफ्तार किया है। वहीं, मुख्य आरोपी अनवर जावेद समेत अन्य आरोपियों की तलाश जारी बताई जा रही है। किराएदार बना ‘भरोसे का आदमी’ शिकायत के अनुसार, वर्ष 2023 में मुख्य आरोपी किराएदार के रूप में पीड़ित परिवार के संपर्क में आया था। बातचीत के दौरान उसने खुद को सरकारी नौकरी और अधिकारियों से संपर्क रखने वाला व्यक्ति बताया। परिवार में नौकरी की जरूरत की जानकारी मिलने के बाद कथित तौर पर इसी भरोसे को आधार बनाकर नौकरी लगवाने का प्रस्ताव दिया गया। इसके बाद शुरू हुआ रकम लेने का सिलसिला। कभी 20 हजार, कभी 30 हजार तो कभी 50 हजार रुपये की मांग की जाती रही। शिकायतकर्ता का दावा है कि अलग-अलग किस्तों में करीब 17 लाख रुपये नकद लिए गए। नकद के बाद ऑनलाइन भुगतान, 25 लाख की ठगी नौकरी की प्रक्रिया आगे बढ़ाने और कागजी कार्रवाई के नाम पर कथित तौर पर भुगतान की मांग जारी रही। शिकायत के मुताबिक, नकद रकम के अलावा करीब 8 लाख रुपये ऑनलाइन भी लिए गए। इस तरह शिकायतकर्ता के अनुसार कुल रकम करीब 25 लाख रुपये हो गई। लेकिन नौकरी नहीं मिली। रकम वापस मांगने पर कथित तौर पर नए आश्वासन देकर मामले को टालने की कोशिश की गई। नौकरी नहीं मिली तो बढ़ा विवाद जब पीड़ित ने रकम वापस करने का दबाव बनाया तो मामला कथित तौर पर विवाद में बदल गया। शिकायतकर्ता के अनुसार, विवाद सुलझाने के लिए पंचायत भी बुलाई गई थी। आरोप है कि वहां रकम लौटाने से इनकार करने के साथ उसके साथ मारपीट की गई और मोबाइल फोन भी तोड़ दिया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। फर्जी सरकारी दस्तावेजों ने बदल दिया मामले का स्वरूप मामले में सबसे गंभीर पहलू कथित फर्जी सरकारी दस्तावेजों का सामने आना है। पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान 10-12 फर्जी आईडी कार्ड और दो जाली सर्विस बुक मिलने की बात सामने आई है। इन दस्तावेजों पर उप विकास आयुक्त कार्यालय और जिला मलेरिया पदाधिकारी कार्यालय से संबंधित कथित फर्जी मुहरों के इस्तेमाल का भी आरोप है। यदि जांच में ये आरोप प्रमाणित होते हैं तो मामला महज नौकरी के नाम पर कथित आर्थिक ठगी तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें सरकारी दस्तावेजों और मुहरों के कथित दुरुपयोग की धाराएं भी जुड़ सकती हैं। फर्जी आईडी और सर्विस बुक बनी कैसे अब पुलिस जांच का सबसे अहम सिरा यही है कि आखिर 10-12 आईडी कार्ड और दो सर्विस बुक तैयार कैसे हुईं? क्या इनके लिए सरकारी कार्यालयों से जुड़ी किसी जानकारी का इस्तेमाल किया गया? कथित फर्जी मुहरें किसने बनाईं? लेटर नंबर और पदनाम किस आधार पर तैयार किए गए? क्या गिरफ्तार आरोपी अकेले इस पूरे खेल को संचालित कर रहा था या उसके पीछे अन्य लोग भी हैं? इन सवालों के जवाब ही यह तय करेंगे कि मामला किसी एक परिवार से कथित ठगी का है या इसके पीछे नौकरी के नाम पर सक्रिय कोई बड़ा नेटवर्क है। ऑनलाइन रकम की जांच खोलेगी पैसों का रास्ता करीब आठ लाख रुपये ऑनलाइन लिए जाने के आरोप ने जांच को एक महत्वपूर्ण डिजिटल सुराग भी दिया है। पुलिस यदि संबंधित बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन की पूरी श्रृंखला की जांच करती है तो यह पता चल सकता है कि रकम किन खातों में गई और उसके बाद कहां-कहां ट्रांसफर हुई। यही लेन-देन कथित नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने का अहम माध्यम बन सकता है। क्या और भी परिवार हो सकते हैं शिकार सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर कथित ठगी के इस मामले में अब यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि कहीं इसी तरीके से अन्य युवाओं या परिवारों से भी रकम तो नहीं ली गई। फर्जी आईडी कार्ड और सर्विस बुक की बरामदगी की बात सामने आने के बाद पुलिस के लिए यह पता लगाना जरूरी होगा कि इनका इस्तेमाल केवल शिकायतकर्ता को भरोसा दिलाने के लिए हुआ या इन्हें अन्य लोगों के सामने भी सरकारी नौकरी के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल किया गया। नौकरी का लालच नहीं, आधिकारिक प्रक्रिया पर भरोसा जरूरी यह मामला एक बार फिर बताता है कि सरकारी नौकरी के नाम पर बिना परीक्षा, बिना मेरिट और निर्धारित चयन प्रक्रिया के नियुक्ति कराने का दावा करने वाले किसी भी व्यक्ति से सावधान रहने की जरूरत है। किसी भी नियुक्ति पत्र, आईडी कार्ड, सर्विस बुक या सरकारी दस्तावेज को वास्तविक मानने से पहले संबंधित विभाग से उसकी आधिकारिक पुष्टि करना जरूरी है। नौकरी के नाम पर पैसे मांगने वाले व्यक्ति के खिलाफ तत्काल पुलिस को सूचना देना भी महत्वपूर्ण है।



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