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मुंबई। हिंदुस्तानी सिनेमा में अपनी दिलकश अदाकारी, बेमिसाल डांसिंग स्टाइल और शानदार फ़नकारी से करोड़ों दिलों पर हुकूमत करने वाले दिग्गज कलाकार मिथुन चक्रवर्ती आज 76 वर्ष के हो गए हैं, जिनका संघर्ष, शोहरत और कामयाबी से भरपूर सफर आज भी नई नस्ल के लिए हौसले और जुनून की एक ज़िंदा मिसाल माना जाता है। कोलकाता की गलियों से बॉलीवुड के आसमान तक 16 जून 1950 को कोलकाता में जन्मे मिथुन चक्रवर्ती का असली नाम गौरांग चक्रवर्ती है। साधारण परिवार में पले-बढ़े मिथुन ने स्कॉटिश चर्च कॉलेज से पढ़ाई पूरी की। युवावस्था में वे नक्सल आंदोलन से प्रभावित रहे, लेकिन हालात बदले तो उन्होंने अपनी जिंदगी का रुख अभिनय की ओर मोड़ लिया। इसी ख्वाब को पूरा करने के लिए उन्होंने फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) का रुख किया। पहली फिल्म और पहला राष्ट्रीय पुरस्कार मशहूर फिल्मकार मृणाल सेन ने उनकी काबिलियत को पहचाना और 1976 में फिल्म मृगया में मौका दिया। पहली ही फिल्म में ऐसा असर छोड़ा कि मिथुन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिल गया। हालांकि यह कामयाबी उनके संघर्ष का अंत नहीं थी। कई साल तक उन्हें छोटे किरदार निभाने पड़े और इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी। जब 'जिमी-जिमी' ने दुनिया को झूमने पर मजबूर कर दिया वर्ष 1982 में आई डिस्को डांसर ने मिथुन चक्रवर्ती की किस्मत बदल दी। फिल्म में निभाया गया जिमी का किरदार और उनका अनोखा डांस स्टाइल रातों-रात सनसनी बन गया। "आई एम ए डिस्को डांसर" और "जिमी जिमी आजा आजा" जैसे गीतों ने सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि सोवियत संघ, चीन और कई देशों में धूम मचा दी। यहीं से मिथुन को "डिस्को किंग" और "डिस्को डांसर" के नाम से पहचान मिली। उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि छोटे शहरों और कस्बों में भी लोग उन्हें अपना हीरो मानने लगे। 'गरीबों के अमिताभ' क्यों कहलाए मिथुन दा? अस्सी के दशक में मिथुन चक्रवर्ती कम बजट की फिल्मों के सबसे भरोसेमंद सितारे बन गए। उन्होंने कई छोटे निर्माताओं की फिल्मों को सुपरहिट बनाया। यही वजह रही कि उन्हें "गरीबों का अमिताभ बच्चन" कहा जाने लगा। खुद मिथुन ने भी इस उपाधि को अपने जीवन के सबसे बड़े सम्मान में से एक माना। 350 से ज्यादा फिल्मों का शानदार सफर अपने पांच दशक से ज्यादा लंबे करियर में मिथुन चक्रवर्ती 350 से अधिक फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं। ताहादेर कथा के लिए उन्हें दूसरा राष्ट्रीय पुरस्कार मिला, जबकि स्वामी विवेकानंद के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। गुरु, एलान और कई अन्य फिल्मों में उन्होंने अभिनय के नए रंग दिखाए। टीवी पर बने 'महागुरु', नई पीढ़ी के भी फेवरेट फिल्मों के अलावा मिथुन चक्रवर्ती ने टेलीविजन पर भी अपनी खास पहचान बनाई। डांस रियलिटी शो डांस इंडिया डांस में "महागुरु" के रूप में उनका अंदाज़ दर्शकों को बेहद पसंद आया। उनका मशहूर जुमला — "क्या बात, क्या बात, क्या बात" — आज भी लोगों की जुबान पर है। पद्म भूषण से दादासाहेब फाल्के तक भारतीय सिनेमा में उनके बेमिसाल योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। वर्ष 2024 में उन्हें भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से नवाज़ा गया। यह सम्मान उनके शानदार करियर और सिनेमा के प्रति समर्पण की तस्दीक करता है। आज भी नई नस्ल के लिए मिसाल 76 साल की उम्र में भी मिथुन चक्रवर्ती का जज़्बा और काम के प्रति उनकी लगन युवाओं के लिए मिसाल है। संघर्षों से निकलकर शोहरत की बुलंदियों तक पहुंचने वाली उनकी कहानी यह बताती है कि मेहनत, सब्र और हौसले से कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है। हिंदुस्तानी सिनेमा में मिथुन चक्रवर्ती सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि एक ऐसी संस्था हैं, जिन्होंने कई पीढ़ियों को मनोरंजन, प्रेरणा और यादगार किरदारों का खजाना दिया है।