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मुंबई। ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतें 91 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से महंगाई और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता की चिंताओं के बीच मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार लगातार दबाव में रहा, जहां निफ्टी लगातार छठे और सेंसेक्स पिछले छह में पांचवें कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। निफ्टी में लगातार छठे दिन गिरावट नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक निफ्टी-50 मंगलवार को 0.55 प्रतिशत गिरकर 24,154.90 अंक पर बंद हुआ। यह निफ्टी की लगातार छठी गिरावट रही। वहीं, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 0.63 प्रतिशत टूटकर 77,235.46 अंक पर आ गया। सेंसेक्स पिछले छह कारोबारी सत्रों में पांच बार गिर चुका है। लगातार गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है और बाजार में जोखिम लेने की क्षमता कमजोर पड़ी है। ईरान-अमेरिका तनाव ने बिगाड़ा माहौल बाजार पर सबसे बड़ा दबाव पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का रहा। ईरान की ओर से पूरी तरह आक्रामक सैन्य रुख अपनाने की चेतावनी के बाद युद्ध जल्द समाप्त होने की उम्मीदों को झटका लगा। ईरान और अमेरिका के बीच स्थायी समझौते की कोशिशें आगे नहीं बढ़ सकी हैं। दूसरी ओर वॉशिंगटन ने समाप्त हो चुके अस्थायी युद्धविराम समझौते को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है। इससे निवेशकों को आशंका है कि संघर्ष लंबा खिंच सकता है और कच्चे तेल की आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। 91 डॉलर के करीब पहुंचा ब्रेंट क्रूड अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चा तेल 91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहा। इसकी कीमत में दो सप्ताह से भी कम समय में करीब 9 प्रतिशत की तेजी आई है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है। ऐसे में कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा रहा तो आयात खर्च बढ़ने, रुपये पर दबाव पड़ने और महंगाई दोबारा तेज होने की आशंका है। महंगा तेल परिवहन, विनिर्माण, विमानन, पेंट, टायर और उपभोक्ता वस्तुओं समेत कई उद्योगों की लागत बढ़ा सकता है। 16 में से 12 सेक्टरों में बिकवाली बाजार में गिरावट व्यापक रही और 16 प्रमुख सेक्टरों में से 12 लाल निशान में बंद हुए। घरेलू मांग पर ज्यादा निर्भर छोटी कंपनियों का सूचकांक लगभग सपाट रहा, जबकि मझोली कंपनियों का सूचकांक 0.4 प्रतिशत गिर गया। इससे साफ है कि बिकवाली केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बाजार के कई हिस्सों पर दबाव दिखाई दिया। आईटी शेयरों पर सबसे ज्यादा मार निफ्टी का आईटी सूचकांक 1.9 प्रतिशत टूट गया और यह दिन का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। भारतीय आईटी कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा अमेरिका से आता है। अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल बढ़ने और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण इन कंपनियों के शेयरों पर अतिरिक्त दबाव बना। निवेशकों को आशंका है कि अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें और कमजोर कारोबारी माहौल तकनीकी खर्च को प्रभावित कर सकता है। नुकसान में रहे ये शेयर एशियन पेंट 2.40 प्रतिशत के साथ सेंसेक्स की सर्वाधिक नुकसान उठाने वाली कंपनियों में शामिल रही। इसके अलावा बीईएल, ट्रेंट, सन फार्मा, टाइटन, टाटा स्टील, आईसीआईसीआई बैंक, मारुति, इटरनल, अडानी पोर्ट्स, टेक महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक, एसबीआई, कोटक बैंक, आईटीसी, इंडिगो, अल्ट्रासेम्को, हिंदुस्तान यूनिलीवर, टीसीएस, भारती एयरटेल, एचसीएल टेक और इंफोसिस के शेयर भी 0.12 प्रतिशत से 2.02 प्रतिशत तक लुढ़क गए। फायदे में रहने वाले शेयर एनटीपीसी, बजाज फिनसर्व, रिलायंस, एलटी, बजाज फाइनेंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, पावरग्रिड और एक्सिस बैंक के शेयरों में 0.03 प्रतिशत से 0.89 प्रतिशत तक की तेजी रही। बॉन्ड प्रतिफल बढ़ने से जोखिम वाले निवेश पर दबाव विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिम एशिया का संकट अब बॉन्ड प्रतिफल, खासकर अमेरिकी बॉन्ड बाजार को प्रभावित कर रहा है। अगर अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल ऊंचे बने रहते हैं तो वैश्विक स्तर पर शेयरों जैसे जोखिम वाले निवेश के लिए यह अच्छा संकेत नहीं होगा। अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर बेहतर प्रतिफल मिलने से विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अपेक्षाकृत सुरक्षित संपत्तियों की ओर जा सकते हैं। विदेशी निवेशकों ने निकाले रिकॉर्ड 25 अरब डॉलर ऊंचे अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल के बीच भारत विदेशी निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत कम आकर्षक हो रहा है। विदेशी निवेशक वर्ष 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार से रिकॉर्ड 25 अरब डॉलर की निकासी कर चुके हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने रुपये और घरेलू शेयर बाजार दोनों पर दबाव बढ़ाया है। एशिया और यूरोप के बाजार भी फिसले कमजोरी केवल भारतीय बाजार तक सीमित नहीं रही। जापान को छोड़कर एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शेयरों का प्रमुख सूचकांक भी गिरावट में रहा। यूरोप का स्टॉक्स-600 सूचकांक भी नुकसान में कारोबार करता दिखाई दिया। इससे पता चलता है कि ईरान युद्ध, महंगा तेल और ऊंचे बॉन्ड प्रतिफल दुनियाभर के बाजारों को प्रभावित कर रहे हैं। गिरते बाजार में मिल्की मिस्ट की धमाकेदार शुरुआत एक तरफ बाजार में चौतरफा दबाव था, वहीं मिल्की मिस्ट के शेयर ने सूचीबद्ध होने के पहले ही दिन निवेशकों को चौंका दिया। कंपनी का शेयर कारोबारी शुरुआत में 29.6 प्रतिशत उछल गया। कमजोर बाजार के बीच कंपनी की शानदार शुरुआत ने प्राथमिक बाजार के निवेशकों को बड़ी राहत दी।