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मुंबई। नए ऑर्डरों की रफ्तार धीमी पड़ने से इस वर्ष जुलाई में देश के विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि कमजोर हुई और एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) जून के 54.2 से घटकर 53.5 रह गया, जो करीब पांच वर्षों का निचला स्तर है। वृद्धि जारी लेकिन रफ्तार अगस्त 2021 के बाद सबसे धीमी जुलाई में विनिर्माण गतिविधियों में बढ़ोतरी तो दर्ज हुई लेकिन उसकी गति अगस्त 2021 के बाद सबसे कमजोर रही। पीएमआई का 50 से ऊपर रहना गतिविधियों में विस्तार, 50 से नीचे रहना गिरावट और 50 पर बने रहना स्थिरता का संकेत देता है। नए ऑर्डरों की रफ्तार चार साल के दूसरे निचले स्तर पर एचएसबीसी के मुताबिक, जुलाई में नए ऑर्डरों की वृद्धि पिछले चार वर्षों के दूसरे सबसे निचले स्तर पर रही। घरेलू मांग में सुस्ती देखने को मिली, जिससे कंपनियों के उत्पादन की रफ्तार भी प्रभावित हुई। हालांकि, विदेशी बाजारों से मांग ने कुछ राहत दी। कई कंपनियों ने कनाडा, मिस्र, इंडोनेशिया, केनिया, नेपाल, दक्षिण अफ्रीका, थाइलैंड और संयुक्त अरब अमीरात से ऑर्डर बढ़ने की जानकारी दी। विदेशी मांग ने संभाला मोर्चा जून की तुलना में जुलाई में निर्यात ऑर्डर मजबूत रहे। इससे यह संकेत मिला कि घरेलू बाजार की कमजोरी के बावजूद भारतीय निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय बाजार से कुछ सहारा मिला। पश्चिम एशिया का तनाव बढ़ा रहा चिंता एचएसबीसी की मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के अनुसार, कंपनियों के आपूर्ति समय में सुधार हुआ है, लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से यह सवाल खड़ा हो गया है कि यह सुधार कितने समय तक टिकेगा। इसी अनिश्चितता के कारण कई विनिर्माताओं ने कच्चे माल और तैयार माल का अतिरिक्त भंडारण शुरू कर दिया है। लागत घटी लेकिन ग्राहकों पर बढ़ा कीमतों का बोझ रिपोर्ट में कहा गया कि लागत मुद्रास्फीति में कमी आई लेकिन तैयार माल की कीमतों में तेजी दर्ज हुई। इससे संकेत मिलता है कि कंपनियां अपने मुनाफे को बनाए रखने के लिए बढ़ी हुई कीमतों का बोझ ग्राहकों पर डाल रही हैं।



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