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वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई का ऐलान करते हुए साफ कहा है कि अब अमेरिका केवल ईरान ही नहीं बल्कि उसकी आर्थिक मदद करने वाले देशों, बैंकों, कंपनियों, एयरपोर्ट और सरकारी संस्थाओं पर भी सख्त कार्रवाई करेगा। श्री ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इसे ईरान के खिलाफ "सबसे कठोर आर्थिक अभियान" और "इकोनॉमिक डी-डे" करार दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने ईरान को समझौते का हर मौका दिया लेकिन तेहरान ने उसे गंवा दिया। ऐसे में अब अमेरिका ईरान को आर्थिक रूप से पूरी दुनिया से अलग-थलग करने की रणनीति पर आगे बढ़ेगा। https://truthsocial.com/@realDonaldTrump/posts/117124650907675461 ईरान की मदद करने वालों पर भी गिरेगी गाज अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि जो भी देश या उसकी वित्तीय संस्थाएं, कंपनियां, एयरपोर्ट या सरकारी एजेंसियां ईरान को किसी भी तरह की आर्थिक मदद पहुंचाएंगी, उन्हें भी गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने विशेष रूप से तेल तस्करी, कैश ट्रांसफर, करेंसी एक्सचेंज, जहाजों के रजिस्ट्रेशन, स्वैप लाइनों और फर्जी कंपनियों के जरिए ईरान तक पहुंचने वाली आर्थिक मदद को पूरी तरह रोकने की बात कही। 'इकोनॉमिक वॉरफेयर' से ईरान को अलग-थलग करने की तैयारी श्री ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अब ईरान के खिलाफ अभूतपूर्व स्तर पर आर्थिक युद्ध और आर्थिक अलगाव की नीति अपनाएगा। उन्होंने अमेरिका के सहयोगी देशों से भी इस अभियान में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि ईरान को वैश्विक आर्थिक व्यवस्था से अलग करना समय की जरूरत है। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। ईरान की सैन्य ताकत पर भी बड़ा दावा अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान की नौसेना और वायुसेना को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि देश के कई सैन्य कारखाने तबाह हो चुके हैं, उसकी मुद्रा कमजोर हो चुकी है और उसकी अर्थव्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है। ईरान की अर्थव्यवस्था पर सबसे बड़ा असर तेल कारोबार पर पड़ सकता है विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी कार्रवाई का सबसे बड़ा असर ईरान के तेल निर्यात पर पड़ सकता है क्योंकि देश की आय का बड़ा हिस्सा तेल बिक्री से आता है। यदि अन्य देश और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से ईरान के साथ कारोबार सीमित करती हैं, तो उसके लिए तेल बेचना और विदेशी मुद्रा हासिल करना पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो सकता है। कैसे काम करता है ईरान का तेल तस्करी नेटवर्क अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि प्रतिबंधों से बचने के लिए ईरान कई बार बिचौलियों, फर्जी कंपनियों और अलग-अलग शिपिंग नेटवर्क के जरिए तेल बेचता है। तेल बेचने के बाद कमाई को बैंकिंग चैनलों, करेंसी एक्सचेंज, नकद लेनदेन और अन्य वित्तीय माध्यमों से ईरान तक पहुंचाया जाता है। अमेरिका अब केवल तेल की खेप ही नहीं बल्कि इस पूरी आर्थिक श्रृंखला को निशाना बनाना चाहता है, ताकि ईरान के लिए प्रतिबंधों से बचकर कारोबार करना कठिन हो जाए। सैन्य रणनीति से आर्थिक दबाव की ओर अमेरिका अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वॉशिंगटन अब प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई के बजाय ईरान पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ाने की रणनीति अपना रहा है। इसी कड़ी में नए प्रतिबंधों का पैकेज तैयार किया गया है जबकि ईरानी बंदरगाहों पर पहले से लागू आर्थिक दबाव भी जारी रहेगा। वैश्विक असर पर रहेगी नजर ट्रंप के इस ऐलान के बाद अब दुनिया की नजर इस बात पर होगी कि अमेरिका के सहयोगी देश इस अभियान में कितना साथ देते हैं। यदि बड़ी अर्थव्यवस्थाएं ईरान से दूरी बनाती हैं, तो उसका असर केवल ईरान की अर्थव्यवस्था ही नहीं, बल्कि वैश्विक तेल व्यापार और पश्चिम एशिया की भू-राजनीति पर भी पड़ सकता है।