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मुंबई। रुपया बुधवार को शुरुआती मजबूती बरकरार नहीं रख सका और कारोबार के दौरान डॉलर की बढ़ती मांग, विदेशी निवेशकों की निकासी तथा कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के दबाव में नौ पैसे टूटकर 96.25 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ, हालांकि वैश्विक बाजार में डॉलर इंडेक्स में नरमी ने इसकी गिरावट को सीमित रखा। शुरुआत अच्छी रही, लेकिन बाद में फिसल गया रुपया सीसीआईएल के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को रुपये की शुरुआत 13 पैसे की मजबूती के साथ 96.12 रुपये प्रति डॉलर पर हुई। शुरुआती कारोबार में यह और मजबूत होकर 96.05 रुपये तक पहुंच गया, लेकिन दोपहर बाद बाजार में डॉलर की मांग बढ़ने से रुपया दबाव में आ गया और एक समय 96.35 रुपये प्रति डॉलर तक कमजोर हो गया। कारोबार के अंत में इसमें कुछ सुधार आया और यह 96.25 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। इससे पहले मंगलवार को भी रुपया 48 पैसे टूटकर 96.16 प्रति डॉलर पर रहा था। कच्चे तेल की कीमतें भी बनीं चिंता अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हल्की तेजी देखने को मिली और ब्रेंट क्रूड करीब 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहा। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए महंगा कच्चा तेल रुपये पर अतिरिक्त दबाव बनाता है और आयात बिल बढ़ने की आशंका पैदा करता है। डॉलर की मांग ने बढ़ाया दबाव मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, कारोबार के दूसरे हिस्से में डॉलर की मांग बढ़ने से रुपया कमजोर पड़ा। हालांकि, वैश्विक स्तर पर डॉलर इंडेक्स में नरमी रहने से रुपये की गिरावट सीमित रही और इसमें बड़ी टूट नहीं आई। एक्सपर्ट की राय: फिलहाल राहत सीमित, नजर इन तीन संकेतों पर एलकेपी सिक्योरिटीज के वीपी (रिसर्च एनालिस्ट–कमोडिटी एवं करेंसी) जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, अमेरिकी महंगाई के उम्मीद से नरम रहने के बाद डॉलर इंडेक्स 101 के नीचे फिसला, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं, खासकर रुपये को कुछ राहत मिली। हालांकि, लगातार विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने रुपये पर दबाव बनाए रखा। उनका कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार की नजर विदेशी फंड फ्लो, कच्चे तेल की चाल और अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी। तकनीकी रूप से निकट भविष्य में रुपया 95.75 से 96.45 रुपये प्रति डॉलर के दायरे में कारोबार कर सकता है।



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