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पटना। भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर जन सुराज ने बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता भरत तिवारी की हत्या बदले की भावना से की गई है। जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने शनिवार को यहां पार्टी कार्यालय में प्रेस वार्ता कर पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि सामाजिक कार्यकर्ता भरत तिवारी की हत्या बदले की भावना से की गई। पार्टी ने मामले में शामिल सभी पुलिसकर्मियों के निलंबन, पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा और एक सरकारी नौकरी देने की मांग की है। कारगिल चौक पर होगा विरोध प्रदर्शन श्री भारती ने कहा कि पार्टी जल्द ही मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपेगी और रविवार शाम पटना के कारगिल चौक पर विरोध प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि ज्ञापन में घटना के समय मौजूद सभी पुलिसकर्मियों को निलंबित करने और पीड़ित परिवार की मांगों को पूरा करने की बात रखी जाएगी। 'कोरोनाकाल में सम्मानित हुए भरत, प्रशासन से लड़ते रहे' जनसुराज के प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि भरत तिवारी कोरोना काल से ही सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय थे और उन्हें पुलिस विभाग द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका था। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल में विस्थापन और कटाव प्रभावित लोगों के पुनर्वास को लेकर प्रशासन से उनका विवाद हुआ था, जिसके बाद उन पर कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि भरत तिवारी प्रशासनिक भ्रष्टाचार और विस्थापन जैसे मुद्दों पर लगातार आवाज उठाते रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई निष्पक्ष नहीं थी और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। मुख्यमंत्री से सवाल, 'एसपी-डीएसपी पर कब होगी कार्रवाई' पार्टी के वरिष्ठ नेता किशोर कुमार ने कहा कि जन सुराज की सात सदस्यीय टीम गांव जाकर परिजनों और स्थानीय लोगों से मिली है। उन्होंने दावा किया कि भरत तिवारी सामाजिक कार्यकर्ता थे और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता की मांग कर रहे थे। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से सवाल किया कि यदि मामले में जांच चल रही है तो केवल निचले स्तर के पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की बात क्यों हो रही है। उन्होंने पूछा कि संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही कब तय की जाएगी। पूर्व आईपीएस आर. के. मिश्रा ने भी उठाए सवाल जन सुराज के वरिष्ठ नेता और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी आर. के. मिश्रा ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूरे मामले की न्यायिक जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना की परिस्थितियां संदेह पैदा करती हैं और सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र जांच आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कानून का राज कायम रखने के लिए न्यायिक प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और किसी भी मामले में निष्पक्ष जांच से ही जनता का भरोसा मजबूत होगा।