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नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भूषण स्टील लिमिटेड से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कंपनी के पूर्व प्रमोटर नीरज सिंघल की पत्नी रितु सिंघल की 58.34 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां कुर्क कर ली हैं। किन-किन संपत्तियों पर ईडी ने हाथ डाला ईडी ने गुरुवार को बताया कि कुर्क की गई संपत्तियों में इंदौर, मध्य प्रदेश में स्थित जमीन और एक आवासीय संपत्ति का हिस्सा शामिल है। इसके अलावा रितु सिंघल के नाम पर मौजूद इक्विटी शेयर और बैंक खातों में जमा रकम को भी अटैच किया गया है। यानी कार्रवाई सिर्फ जमीन-जायदाद तक सीमित नहीं रही बल्कि निवेश और बैंक बैलेंस तक पहुंची है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है। मामले की शुरुआत कैसे हुई, पहले यह समझिए ईडी ने यह जांच सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) की ओर से दायर आपराधिक शिकायत के आधार पर शुरू की थी। यह शिकायत भूषण स्टील लिमिटेड , उसके पूर्व प्रमोटर नीरज सिंघल और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज कराई गई थी। इसी शिकायत में ऐसे अपराधों का जिक्र था, जो पीएमएलए के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की जांच का आधार बन सकते थे। इसके बाद ईडी ने इस पूरे मामले में धन के स्रोत, लेन-देन और संपत्तियों की जांच शुरू की। ईडी का दावा: भूषण स्टील से निकाला गया पैसा दूसरी जगह घुमाया गया जांच एजेंसी का आरोप है कि नीरज सिंघल और उनके सहयोगियों ने भूषण स्टील लिमिटेड से धन को कथित तौर पर गलत तरीके से बाहर निकाला। यह काम वास्तविक कारोबारी लेन-देन का दिखावा करके किया गया, जिससे वित्तीय संस्थानों को 11,446.73 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। ईडी का कहना है कि भूषण स्टील के प्लांट्स के लिए हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड से खरीदे गए जिंक इंगट्स को कंपनी के खातों से बाहर रखते हुए खुले बाजार में बेच दिया गया। इस बिक्री से जो नकद रकम मिली, उसे आरोपियों ने अपने पास रखा और बाद में इसी पैसे का इस्तेमाल अलग-अलग वित्तीय लेन-देन में किया गया। कैसे घुमाया गया पैसा, ईडी ने क्या बताया ईडी की जांच में यह बात सामने आने का दावा किया गया है कि जिंक इंगट्स की ऑफ-बुक बिक्री से पैदा हुई नकदी का इस्तेमाल लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (एलटीसीजी) से जुड़े एंट्री ऑपरेशनों में किया गया। यह एंट्री कई पेनी स्टॉक कंपनियों के जरिए ली गई।सरल भाषा में कहें तो ईडी का आरोप है कि कंपनी से कथित तौर पर निकाला गया पैसा सीधे अपने पास नहीं रखा गया बल्कि उसे अलग-अलग रास्तों से घुमाकर वैध दिखाने की कोशिश की गई। इस ऑफ-बुक बिक्री से पैदा हुई नकदी की पुष्टि उस समय संबंधित बैंक खातों में हुए भारी अनअकाउंटेड कैश डिपॉजिट से भी हुई। यह पहली कार्रवाई नहीं, पहले भी हो चुकी है बड़ी कुर्की ईडी ने इस मामले में पहले भी संपत्ति कुर्क की थी। इससे पहले 08 नवंबर 2021 को 61.38 करोड़ रुपये की और 06 मार्च 2024 को 367 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की गई थीं। यानी रितु सिंघल की 58.34 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क करने की यह कार्रवाई इस लंबे मनी लॉन्ड्रिंग मामले की नई कड़ी है। कोर्ट में भी पहुंच चुका है मामला ईडी ने बताया कि इस मामले में 08 अगस्त 2023 को एक प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट और 07 मार्च 2024 को एक सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की जा चुकी है। इन शिकायतों में नीरज सिंघल, रितु सिंघल और अन्य आरोपियों के नाम शामिल हैं। एजेंसी के अनुसार, पीएमएलए कोर्ट इन शिकायतों का संज्ञान भी ले चुकी है। अब आगे क्या होगा ईडी ने साफ किया है कि मामले में आगे की जांच अभी जारी है । इसका मतलब है कि एजेंसी अभी धन के पूरे प्रवाह, उससे जुड़ी संपत्तियों, कथित फर्जी लेन-देन और इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। आने वाले समय में इस केस में और संपत्तियों की पहचान, अतिरिक्त कुर्की या अन्य कानूनी कार्रवाई भी देखने को मिल सकती है।



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