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मुंबई: बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री काजोल 52 वर्ष की हो गई हैं लेकिन उनके लंबे और सफल करियर का सबसे दिलचस्प रिकॉर्ड आज भी फिल्म ‘गुप्त’ से जुड़ा है, जिसमें ग्रे शेड वाला किरदार निभाकर वह फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ खलनायक पुरस्कार जीतने वाली हिंदी सिनेमा की पहली अभिनेत्री बनी थीं। ‘गुप्त’ में खलनायक बनकर तोड़ा बड़ा मिथक 1997 में राजीव राय की फिल्म ‘गुप्त’ में काजोल ने पहली बार ऐसा किरदार निभाया, जिसमें रहस्य, जुनून और नकारात्मकता की कई परतें थीं। उनके अभिनय ने दर्शकों को चौंका दिया और उन्हें फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ खलनायक पुरस्कार मिला। यह पुरस्कार जीतने वाली वह हिंदी फिल्म उद्योग की पहली अभिनेत्री बनीं। उस दौर में मुख्य अभिनेत्री का खलनायक बनना अपने आप में बड़ा जोखिम था लेकिन काजोल ने इसी भूमिका को अपने करियर की सबसे यादगार उपलब्धियों में बदल दिया। फिल्मी परिवार में जन्म, बचपन से ही अभिनय की ओर झुकाव काजोल का जन्म 05 अगस्त 1974 को मुंबई में हुआ। उनके पिता सोमू मुखर्जी फिल्म निर्माता थे जबकि मां तनुजा हिंदी सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री हैं। फिल्मी माहौल में पली-बढ़ीं काजोल बचपन में अपनी मां के साथ शूटिंग पर जाया करती थीं। यहीं से फिल्मों और अभिनय की दुनिया के प्रति उनका लगाव बढ़ा। ‘बेखुदी’ से शुरुआत, ‘बाजीगर’ से मिली पहचान काजोल ने 1992 में फिल्म ‘बेखुदी’ से अभिनय की शुरुआत की। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही लेकिन एक साल बाद अब्बास-मस्तान की ‘बाजीगर’ ने उन्हें दर्शकों के बीच पहचान दिला दी। शाहरुख खान के साथ उनकी जोड़ी इसी फिल्म से चर्चा में आई और आगे चलकर हिंदी सिनेमा की सबसे पसंदीदा ऑन-स्क्रीन जोड़ियों में शामिल हो गई। ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ ने बनाया सुपरस्टार 1995 में रिलीज हुई ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ काजोल के करियर की सबसे बड़ी फिल्मों में शामिल हुई। शाहरुख खान के साथ उनकी जोड़ी ने दर्शकों के दिलों में स्थायी जगह बनाई और फिल्म हिंदी सिनेमा की क्लासिक प्रेम कहानियों में गिनी जाने लगी। एक ही साल में तीन फिल्मफेयर नॉमिनेशन 1998 भी काजोल के लिए बेहद खास रहा। उस वर्ष उनकी ‘दुश्मन’, ‘प्यार तो होना ही था’ और ‘कुछ कुछ होता है’ रिलीज हुईं और तीनों फिल्मों के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार का नामांकन मिला। ‘कुछ कुछ होता है’ के लिए उन्होंने सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार भी जीता। शादी के बाद कम की सक्रियता, फिर ‘फना’ से जोरदार वापसी काजोल ने 1999 में अभिनेता अजय देवगन से शादी की। इसके बाद उन्होंने फिल्मों में अपनी सक्रियता कुछ कम कर दी।2001 की ‘कभी खुशी कभी गम’ के बाद वह कुछ समय के लिए फिल्मों से दूर रहीं लेकिन 2006 में आमिर खान के साथ ‘फना’ से शानदार वापसी की और फिर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता। शाहरुख-काजोल की जोड़ी बनी हिंदी सिनेमा की पहचान काजोल और शाहरुख खान ने ‘बाजीगर’, ‘करण अर्जुन’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘कुछ कुछ होता है’, ‘कभी खुशी कभी गम’, ‘माय नेम इज खान’ और ‘दिलवाले’ जैसी फिल्मों में साथ काम किया। दोनों की केमिस्ट्री हिंदी सिनेमा के सबसे सफल और लोकप्रिय अध्यायों में शामिल है। पद्मश्री से सम्मानित, ओटीटी पर भी छोड़ी छाप 2010 में ‘माय नेम इज खान’ के लिए काजोल को फिर फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार मिला। वर्ष 2011 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया। बाद के वर्षों में वह ‘तानाजी: द अनसंग वॉरियर’, ‘त्रिभंग’, ‘सलाम वेंकी’, ‘द ट्रायल’, ‘दो पत्ती’, ‘सरजमीन’ और ‘मां’ जैसी फिल्मों और वेब सीरीज में नजर आईं। अब ‘महारागनी’ में दिखेगा नया एक्शन अवतार काजोल की आगामी फिल्मों में ‘महारागनी: क्वीन ऑफ क्वींस’ प्रमुख है। इस एक्शन थ्रिलर में वह एक दमदार और नए अवतार में दिखाई देंगी। 52 वर्ष की उम्र में भी काजोल लगातार यह साबित कर रही हैं कि वह केवल रोमांटिक फिल्मों की अभिनेत्री नहीं बल्कि हर तरह के किरदार को अपनी मजबूत स्क्रीन मौजूदगी से यादगार बनाने वाली कलाकार हैं।



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