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मुंबई। शेयर बाज़ार, बैंकिंग, टैक्स रेड, आर्थिक संकट या करोड़ों के घोटाले... ये ऐसे मौजू हैं, जिन्हें सुनकर अक्सर लोग बोरियत महसूस करते हैं लेकिन भारतीय सिनेमा के कुछ बेहतरीन डायरेक्टर्स ने इन्हीं मुश्किल और संजीदा कहानियों को इस अंदाज में पर्दे पर पेश किया कि दर्शक आखिरी सीन तक स्क्रीन से नजर नहीं हटा पाए। इन फिल्मों और वेब सीरीज़ ने सिर्फ एंटरटेनमेंट ही नहीं किया बल्कि मुल्क के आर्थिक इतिहास के उन पन्नों से भी लोगों को रूबरू कराया, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते थे। हंसल मेहता की 'स्कैम 1992' ने बदल दी खेल की तस्वीर साल 2020 में आई 'स्कैम 1992: द हर्षद मेहता स्टोरी' भारतीय ओटीटी की सबसे कामयाब सीरीज़ में गिनी जाती है। निर्देशक हंसल मेहता ने हर्षद मेहता के एक आम इंसान से शेयर बाज़ार के सबसे बड़े खिलाड़ी बनने और फिर देश के चर्चित घोटाले में फंसने की पूरी दास्तान बेहद दिलचस्प अंदाज़ में दिखाई। वित्तीय पत्रकार सुचेता दलाल की खोजी रिपोर्ट इस कहानी का अहम हिस्सा बनी। 'रेड' में ईमानदार अफसर की जंग निर्देशक राज कुमार गुप्ता की फिल्म 'रेड' एक सच्ची घटना से प्रेरित है। अजय देवगन ने एक बेखौफ आयकर अधिकारी का किरदार निभाया, जो देश की सबसे चर्चित टैक्स रेड में शामिल होता है। फिल्म ने दिखाया कि कानून के सामने कितना भी ताकतवर शख्स क्यों न हो, जवाब देना पड़ता है। 'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर' में दिखेगा 1991 का आर्थिक संघर्ष चिन्मय मांडलेकर की आने वाली फिल्म 'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर' भारत के 1991 के आर्थिक संकट की कहानी लेकर आ रही है। फिल्म भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर एस. वेंकटरमणन के जीवन से प्रेरित है, जिन्होंने विदेशी मुद्रा संकट के दौरान मुल्क की अर्थव्यवस्था को संभालने में अहम किरदार निभाया। इस फिल्म में मनोज बाजपेयी लीड रोल में नज़र आएंगे। 'लकी भास्कर'... जब लालच बना सबसे बड़ा जाल निर्देशक वेंकी अटलूरी की 'लकी भास्कर' एक ऐसे बैंक कैशियर की कहानी है, जो ज्यादा पैसा कमाने की चाह में जोखिम भरे निवेश और मनी लॉन्ड्रिंग की दुनिया में फंस जाता है। यह फिल्म बताती है कि दौलत की अंधी दौड़ किस तरह ज़िंदगी बदल सकती है। 'स्कैम 2003' ने खोली तेलगी घोटाले की परतें निर्देशक तुषार हीरानंदानी की 'स्कैम 2003: द तेलगी स्टोरी' देश के चर्चित स्टांप पेपर घोटाले पर आधारित है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे एक मामूली फल बेचने वाला शख्स करोड़ों रुपये के फर्जी स्टांप पेपर रैकेट का मास्टरमाइंड बन गया। जब मनोरंजन के साथ मिली अर्थव्यवस्था की समझ इन फिल्मों और वेब सीरीज़ की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इन्होंने फाइनेंस, शेयर बाज़ार, टैक्स, बैंकिंग और आर्थिक संकट जैसे मुश्किल विषयों को आसान, दिलचस्प और रोमांचक अंदाज़ में पेश किया। यही वजह है कि ये सिर्फ मनोरंजन नहीं करतीं, बल्कि दर्शकों को भारत के आर्थिक इतिहास और बड़े वित्तीय फैसलों की भी बेहतर समझ देती हैं।



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