Full Story

टोक्यो। भारत की स्टार शटलर पीवी सिंधु ने जापान ओपन 2026 के फाइनल में मेजबान और तीन बार की विश्व चैंपियन अकाने यामागुची को सीधे गेमों में हराकर दो साल से चले आ रहे खिताबी सूखे को खत्म कर दिया और अपने करियर का पहला बीडब्ल्यूएफ सुपर 750 खिताब जीत लिया। टोक्यो मेट्रोपॉलिटन जिम्नेजियम में खेले गए महिला एकल फाइनल में विश्व रैंकिंग में 12वें स्थान पर काबिज सिंधु ने तीसरी वरीय और दुनिया की तीसरे नंबर की खिलाड़ी अकाने यामागुची को 21-17, 21-17 से हराकर शानदार जीत दर्ज की। यह सिंधु का 2024 के सैयद मोदी इंटरनेशनल के बाद पहला बीडब्ल्यूएफ खिताब है। इतना ही नहीं, 2022 के सिंगापुर ओपन के बाद भारत के बाहर उनकी यह पहली ट्रॉफी भी रही। शुरुआत से दिखाया चैंपियन वाला अंदाज फाइनल की पहली रैली से ही सिंधु ने साफ कर दिया कि इस बार उनका इरादा ट्रॉफी लेकर ही लौटने का है। भारतीय स्टार ने 3-0 की बढ़त बनाई, हालांकि यामागुची ने वापसी करते हुए स्कोर 3-3 कर दिया। इसके बाद सिंधु ने नेट पर शानदार नियंत्रण और जोरदार स्मैश के दम पर मुकाबले की कमान अपने हाथ में ले ली। कुछ आसान गलतियों के कारण यामागुची ने मध्यांतर तक 11-9 की बढ़त जरूर बना ली, लेकिन ब्रेक के बाद मुकाबले का रंग पूरी तरह बदल गया। 36 शॉट की रैली ने पलट दी बाजी ब्रेक के बाद दोनों खिलाड़ियों के बीच 36 शॉट तक चली लंबी रैली फाइनल का सबसे अहम मोड़ साबित हुई। सिंधु ने यह रैली जीतकर स्कोर 11-11 से बराबर किया और फिर लगातार आक्रामक खेल दिखाते हुए 16-12 की बढ़त बना ली। यामागुची ने एक बार फिर वापसी करते हुए स्कोर 17-17 कर दिया, लेकिन दबाव के क्षणों में सिंधु ने बेहतरीन संयम दिखाया और अंतिम पांच में से चार अंक जीतकर पहला गेम 21-17 से अपने नाम कर लिया। दूसरे गेम में नहीं दिया कोई मौका पहला गेम जीतने के बाद सिंधु का आत्मविश्वास और बढ़ गया। दूसरे गेम में उन्होंने 8-3 की बढ़त बनाकर यामागुची को लगातार दबाव में रखा। जापानी खिलाड़ी ने अंतर कम करते हुए स्कोर 8-7 और बाद में 14-12 तक पहुंचाया, लेकिन सिंधु ने लगातार तेज स्मैश और सटीक प्लेसमेंट से बढ़त बनाए रखी। अंतिम क्षणों में कुछ गलतियों से यामागुची 19-17 तक पहुंच गई, लेकिन सिंधु ने बिना घबराए लगातार अंक जुटाए। आखिर में यामागुची का शॉट बाहर चला गया और सिंधु ने दोनों हाथ हवा में उठाकर दो साल बाद खिताबी जीत का जश्न मनाया। दो साल का इंतजार हुआ खत्म 31 वर्षीय सिंधु के लिए यह जीत कई मायनों में खास रही। लगभग दो साल बाद उन्होंने बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर का कोई खिताब जीता। यह उनके करियर का छठा बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब है। इसके अलावा 2018 से पहले वह तीन बीडब्ल्यूएफ सुपर सीरीज खिताब भी जीत चुकी हैं। यामागुची पर 16वीं जीत अकाने यामागुची और सिंधु के बीच यह 30वीं भिड़ंत थी, जिसमें भारतीय स्टार ने 16वीं जीत दर्ज की। पिछले सात मुकाबलों में यामागुची पर यह उनकी सिर्फ दूसरी जीत रही। इससे पहले सिंधु ने जापानी खिलाड़ी को 2022 के थाईलैंड ओपन में पूरे मैच में हराया था। वहीं, इस साल मलेशिया ओपन में दोनों की भिड़ंत यामागुची के पहले गेम के बाद चोट के कारण हटने से समाप्त हो गई थी। 2019 के बाद सबसे बड़ी उपलब्धि जापान ओपन 2026 का खिताब सिंधु के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गया है। 2019 में विश्व चैंपियन बनने के बाद यह उनका सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय खिताब है। इस जीत ने न केवल उनका लंबा इंतजार खत्म किया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि भारतीय बैडमिंटन की सबसे बड़ी सितारों में शामिल सिंधु अभी भी बड़े मंच पर मुकाबले का रुख पलटने का दम रखती हैं।