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एम. ए. खान पटना। बिहार में पटना स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने छपरा मुख्य डाकघर में फर्जी बिल और वाउचर के जरिए 10.83 लाख रुपये से अधिक के सरकारी धन के गबन मामले में तत्कालीन सीनियर पोस्टमास्टर समेत तीन डाक कर्मियों को दोषी ठहराते हुए आज तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास के साथ ही 12-12 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। सीनियर पोस्टमास्टर समेत तीन लोग दोषी सीबीआई के विशेष न्यायाधीश मोहम्मद रुस्तम की अदालत ने छपरा मुख्य डाकघर के तत्कालीन वरीय डाकपाल राजेश्वर पासवान , डाक सहायक जयशंकर ओझा और डाक सहायक जुगल किशोर को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की अलग-अलग धाराओं के तहत दोषी पाया। अदालत ने माना कि तीनों ने अपने सरकारी पद का दुरुपयोग करते हुए आपराधिक साजिश रची और जालसाजी के जरिए सरकारी राशि का गबन किया। अदालत ने तीनों दोषियों को तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास के साथ 12-12 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं चुकाने की स्थिति में उन्हें छह-छह महीने की कैद की सजा अलग से भुगतनी होगी। खरीद के नाम पर हुआ था लाखों का खेल सीबीआई की वरीय विशेष लोक अभियोजक शशि विश्वकर्मा के अनुसार, यह मामला वर्ष 2010 में दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया कि वर्ष 2008 से 2009 के बीच छपरा मुख्य डाकघर में डीजल, कंप्यूटर पेपर, लॉकर, कुर्सियां, अलमारी, कालीन, टेबल क्लॉथ, पंखा, स्टेपलर पिन, इमरजेंसी लाइट, डीवीडी और अन्य सामग्रियों की खरीद के नाम पर 10 लाख 83 हजार रुपये से अधिक का गबन किया गया। जांच में पता चला कि आरोपियों ने सामान की खरीद दिखाने के लिए फर्जी बिल और वाउचर तैयार किए और उनके आधार पर सरकारी राशि निकाल ली। बाद में सीबीआई की जांच में पूरे घोटाले का खुलासा हुआ। 57 गवाहों ने मजबूत किया केस मामले को साबित करने के लिए सीबीआई ने अदालत में 57 गवाहों के बयान दर्ज कराए। लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।



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