Full Story
पटना। बिहार में पटना की बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव सीट पर भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा ) की सियासत ने 24 घंटे के भीतर ऐसा नाटकीय मोड़ लिया कि गुरुवार को पूरे शक्ति-प्रदर्शन के साथ नामांकन करने वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ( एनडीए ) प्रत्याशी अभिषेक कुमार उर्फ अभिषेक बंटी ने शुक्रवार को पारिवारिक कारणों का हवाला देकर चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया, जिसके बाद पार्टी ने तत्काल डैमेज कंट्रोल करते हुए उनकी जगह संगठन से निकले चेहरे नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतार दिया। गुरुवार को नामांकन, शुक्रवार को वापसी: बांकीपुर में 24 घंटे में बदली तस्वीर अभिषेक कुमार उर्फ अभिषेक बंटी ने गुरुवार को बांकीपुर उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था । नामांकन के बाद उन्होंने कहा था कि पार्टी ने एक साधारण कार्यकर्ता पर भरोसा जताकर टिकट दिया है , इसके लिए वे नेतृत्व के आभारी हैं। नामांकन के मौके पर एनडीए ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। सभा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अलावा एनडीए के सभी वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इससे साफ संकेत गया था कि भाजपा बांकीपुर सीट को प्रतिष्ठा की लड़ाई मानकर चल रही है। लेकिन, इस शक्ति-प्रदर्शन के महज एक दिन बाद ही तस्वीर पलट गई। अभिषेक ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को सौंपे पत्र में कहा कि पारिवारिक कारणों से वे विधानसभा उपचुनाव लड़ने में असमर्थ हैं । उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव नहीं लड़ने के बावजूद वे पार्टी कार्यकर्ता के रूप में निष्ठापूर्वक सेवा करते रहेंगे । यही वह मोड़ था, जहां बांकीपुर का चुनाव अचानक सामान्य राजनीतिक मुकाबले से निकलकर एक बड़े राजनीतिक ड्रामे में बदल गया। अभिषेक के पत्र में क्या लिखा है अभिषेक ने अपने पत्र में भाजपा के केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्हें बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में एनडीए प्रत्याशी बनाए जाने पर गर्व है । उन्होंने लिखा कि वे विनम्रतापूर्वक सूचित करना चाहते हैं कि पारिवारिक कारणों से चुनाव लड़ना संभव नहीं है । हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे संगठन और पार्टी के लिए पहले की तरह काम करते रहेंगे। यानी, टिकट मिलने के बाद भी अभिषेक ने निजी परिस्थितियों को देखते हुए खुद को चुनावी मुकाबले से अलग कर लिया। यही वजह है कि उनके नामांकन और फिर वापसी के बीच का छोटा-सा अंतराल अब सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल बन गया है। भाजपा ने तुरंत किया डैमेज कंट्रोल, नीरज कुमार सिन्हा को बनाया नया चेहरा अभिषेक के पीछे हटते ही भाजपा ने देरी नहीं की। पार्टी के केंद्रीय कार्यालय से जारी 10 जुलाई 2026 की प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि 07 जुलाई को घोषित अभिषेक कुमार के स्थान पर अब 182-बांकीपुर सीट से नीरज कुमार सिन्हा उम्मीदवार होंगे । यानी भाजपा ने यह साफ कर दिया कि वह सीट पर किसी तरह की अनिश्चितता नहीं चाहती और चुनावी मोर्चे पर तुरंत नई लाइन-अप के साथ उतरने को तैयार है। कौन हैं नीरज कुमार सिन्हा, जिन पर भाजपा ने लगाया दाव भाजपा के नए उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा संगठन से निकले कार्यकर्ता माने जाते हैं। उपलब्ध बायोडाटा के मुताबिक वे पटना के निवासी हैं, बी.ए. तक शिक्षित हैं और लंबे समय से पार्टी संगठन में सक्रिय हैं। वे बूथ अध्यक्ष , मंडल महामंत्री , भारतीय जानता परित युवा मोर्चा ( भाजयुमो) जिला उपाध्यक्ष और नरेंद्र भारती मंडल के मंडल अध्यक्ष जैसे पदों पर काम कर चुके हैं। पार्टी ने ऐसे चेहरे को आगे बढ़ाया है जिसकी पकड़ जमीनी संगठन में मजबूत मानी जाती है। बांकीपुर में मुकाबला सिर्फ भाजपा तक सीमित नहीं बांकीपुर सीट पर राजनीतिक हलचल सिर्फ भाजपा खेमे तक सीमित नहीं है। गुरुवार को भाजपा उम्मीदवार अभिषेक के अलावा राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रत्याशी रेखा गुप्ता ने भी नामांकन दाखिल किया। वहीं, जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर 13 जुलाई को पर्चा भरेंगे। प्रशांत किशोर की एंट्री के साथ यह मुकाबला और ज्यादा हाई-प्रोफाइल होने जा रहा है। इनके अलावा अन्य दलों के उम्मीदवार और निर्दलीय प्रत्याशी भी मैदान में उतरेंगे । नामांकन की प्रक्रिया 13 जुलाई तक चलेगी और अब तक तीन लोगों ने नामांकन दाखिल किया है । ऐसे में बांकीपुर का उपचुनाव अब सिर्फ भाजपा बनाम राजद नहीं, बल्कि बहुकोणीय और हाई-वोल्टेज मुकाबले की शक्ल लेता दिख रहा है। बांकीपुर की राजनीति में इस घटनाक्रम का मतलब क्या है अभिषेक का नामांकन करना, मंच से भावुक बयान देना, एनडीए के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी, और फिर अगले ही दिन चुनाव से हट जाना—यह पूरा क्रम कई सवाल खड़े करता है। राजनीतिक तौर पर यह भाजपा के लिए एक झटका भी माना जा सकता है लेकिन पार्टी ने नीरज सिन्हा को उतारकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि संगठन के पास बैकअप प्लान तैयार था और वह चुनावी लड़ाई को किसी भी हालत में कमजोर नहीं पड़ने देना चाहती। दूसरी तरफ, विपक्ष के लिए यह भाजपा पर सवाल उठाने का मौका भी बन सकता है कि जब उम्मीदवार नामांकन तक कर चुका था तो फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि उसे पीछे हटना पड़ा। यही सवाल अब चुनावी बहस का हिस्सा बन सकता है।



Comments
0