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नई दिल्ली। देश में थोक महंगाई की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है। जून 2026 में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई दर बढ़कर 9.87 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो मई के 9.68 प्रतिशत से अधिक है। इसके साथ ही यह पिछले 16 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर भी बन गया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल दिसंबर में थोक महंगाई शून्य से ऊपर आने के बाद से इसमें लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। पिछले साल जून में यह दर -0.4 प्रतिशत थी। ईंधन और फैक्ट्री प्रोडक्ट्स बने सबसे बड़े कारण जून में महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह ईंधन एवं ऊर्जा और विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी रही। ईंधन एवं ऊर्जा वर्ग की महंगाई दर 27.41 प्रतिशत दर्ज की गई। इस दौरान खनिज तेल 46.48 प्रतिशत और कच्चा तेल एवं प्राकृतिक गैस 34.75 प्रतिशत महंगे हुए। हालांकि बिजली की कीमतों में 0.76 प्रतिशत और कोयला एवं लिग्नाइट में 1.57 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इन सामानों की कीमतों में सबसे ज्यादा उछाल विनिर्मित वस्तुओं की महंगाई दर 7.48 प्रतिशत रही। इस श्रेणी में तंबाकू उत्पाद 14.14 प्रतिशत , रसायन एवं रासायनिक उत्पाद 12.78 प्रतिशत , बुनियादी धातु 12.31 प्रतिशत , बिजली के उपकरण 11.03 प्रतिशत और टेक्सटाइल 10.85 प्रतिशत महंगे हुए। खाद्य और गैर-खाद्य उत्पाद भी हुए महंगे प्राथमिक उत्पादों की महंगाई दर 7 प्रतिशत रही। इसमें गैर-खाद्य उत्पादों के दाम 11.07 प्रतिशत , खनिज 9.45 प्रतिशत और खाद्य उत्पाद 5.49 प्रतिशत महंगे हुए। पहली तिमाही में भी महंगाई का दबाव बरकरार चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में औसत थोक महंगाई दर 9.37 प्रतिशत रही। इस दौरान ईंधन एवं ऊर्जा वर्ग में महंगाई 27.51 प्रतिशत , विनिर्मित उत्पादों में 7.18 प्रतिशत और प्राथमिक उत्पादों में 5.35 प्रतिशत दर्ज की गई। थोक महंगाई में लगातार बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि उत्पादन लागत पर दबाव अभी भी बना हुआ है। इसका असर आने वाले महीनों में खुदरा बाजार और आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी दिखाई दे सकता है।



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