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मोतिहारी। पूर्वी चंपारण में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा) योजना की समीक्षा के दौरान जिला बिहार के मुकाबले लगभग आधी रफ्तार से काम करता मिला, जहां मानव दिवस सृजन में राज्य का औसत 153.72 प्रतिशत है वहीं जिले की उपलब्धि केवल 74.65 प्रतिशत रही, 56,501 मजदूरों का ई-केवाईसी लंबित पाया गया और योजनाओं की पूर्णता दर महज 0.60 प्रतिशत रही उप विकास आयुक्त (डीडीसी) की समीक्षा बैठक में खुलासा हुआ कि मानव दिवस सृजन में जिले की उपलब्धि सिर्फ 74.65 प्रतिशत है, जबकि राज्य का औसत 153.72 प्रतिशत है। खराब प्रदर्शन पर डीडीसी ने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए एक सप्ताह के भीतर सुधार लाने और तय लक्ष्य हासिल करने का निर्देश दिया। इन प्रखंडों का प्रदर्शन सबसे खराब समीक्षा में कई प्रखंडों का प्रदर्शन बेहद कमजोर पाया गया। संग्रामपुर (41.71%), पहाड़पुर (45.58%), बनकटवा (47.86%), अरेराज (53.32%), मेहसी (55.34%), कोटवा (58.51%) और पताही (59.15%) सबसे पिछड़े प्रखंडों में शामिल रहे। डीडीसी ने सभी कार्यक्रम पदाधिकारियों को तत्काल कार्ययोजना बनाकर कम से कम 75 प्रतिशत उपलब्धि हासिल करने का निर्देश दिया। 56 हजार से ज्यादा मजदूरों का ई-केवाईसी बाकी बैठक में यह भी सामने आया कि जिले के 56,501 सक्रिय मनरेगा मजदूरों का ई-केवाईसी अब तक पूरा नहीं हो सका है। डीडीसी ने अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर शत-प्रतिशत ई-केवाईसी पूरा कराने का निर्देश दिया। जियो टैगिंग में भी बड़ी लापरवाही मनरेगा योजनाओं की जियो टैगिंग भी संतोषजनक नहीं मिली। तीनों चरणों में 4,174 मामले लंबित पाए गए। सबसे ज्यादा लंबित मामले पहाड़पुर (242), कल्याणपुर (202), पकड़ीदयाल (195), रामगढ़वा (190), केसरिया (186) और बनकटवा (178) प्रखंडों में मिले। सभी लंबित मामलों का एक सप्ताह के भीतर निपटारा करने का निर्देश दिया गया। 7.69 लाख योजनाएं शुरू, पूरी हुईं सिर्फ 4,639 समीक्षा बैठक में सबसे चौंकाने वाला तथ्य योजनाओं की पूर्णता दर को लेकर सामने आया। जिले में अब तक 7,69,118 मनरेगा योजनाएं शुरू की गईं, लेकिन इनमें से सिर्फ 4,639 योजनाएं ही पूरी हो सकीं। यानी पूर्णता दर महज 0.60 प्रतिशत रही। इस पर नाराजगी जताते हुए डीडीसी ने सभी कार्यक्रम पदाधिकारियों को कार्ययोजना बनाकर कम से कम 90 प्रतिशत अपूर्ण योजनाओं को जल्द पूरा कराने का निर्देश दिया। वृक्षारोपण अभियान भी लक्ष्य से बहुत पीछे वित्तीय वर्ष 2026-27 में मनरेगा के तहत 2,628 वृक्षारोपण योजनाओं का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक सिर्फ 164 योजनाएं ही शुरू हो सकी हैं। यह लक्ष्य का मात्र 6.24 प्रतिशत है। डीडीसी ने इस धीमी प्रगति पर भी नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को लक्ष्य के अनुरूप तेजी से काम शुरू करने के निर्देश दिए। समय पर सुधार नहीं हुआ तो होगी कार्रवाई समीक्षा बैठक में डीडीसी ने स्पष्ट कहा कि मनरेगा के क्रियान्वयन में ढिलाई किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को तय समय सीमा के भीतर लंबित कार्य पूरे करने, प्रदर्शन में सुधार लाने और लक्ष्य हासिल करने के निर्देश दिए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि समय पर सुधार नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।



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