Full Story
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों के संकल्प, आत्मनिर्भरता की बढ़ती ताकत, तेज आर्थिक प्रगति और युवाशक्ति के दम पर भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक सकता। श्री मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए कहा कि भारत अब छोटे सपनों के सहारे चलने वाला देश नहीं है। बड़े लक्ष्य ही सोच का दायरा बढ़ाते हैं और देश की क्षमताओं को नई दिशा देते हैं। आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प केवल सरकार का लक्ष्य नहीं, बल्कि पूरे देश का सामूहिक अभियान है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश विकसित बनने का दृढ़ निश्चय करता है तो पूरी दुनिया को उसके प्रति अपना नजरिया बदलना पड़ता है। भारत के पास स्थिर सरकार, मजबूत राजनीतिक जनादेश, संविधान, सक्षम न्याय व्यवस्था और विशाल युवा शक्ति है। यही ताकतें विकसित भारत की नींव बन रही हैं। 12 साल में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए श्री मोदी ने पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अवधि में करीब 25 करोड़ देशवासी गरीबी से बाहर निकले हैं । भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है। उन्होंने कहा कि अब 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक शक्ति और संकल्प को रोकना मुश्किल है। सरकार ने गरीबों को घर, पानी, गैस, शौचालय और दूसरी बुनियादी सुविधाएं देने की गति पहले के मुकाबले कई गुना बढ़ाई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि रक्षा उत्पादन करीब चार गुना बढ़ा है। खादी और ग्रामोद्योग का विस्तार पांच गुना हुआ है। इलेक्ट्रिक मैन्युफैक्चरिंग सात गुना बढ़ी है। रेलवे कोच का निर्माण 21 गुना हुआ है। मोबाइल फोन उत्पादन में 33 गुना वृद्धि हुई है। इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या चार गुना बढ़ी है और डिजिटल लेन-देन करीब 100 गुना बढ़ा है। उन्होंने दावा किया कि नल से जल कनेक्शन देने की सालाना रफ्तार औसतन 15 गुना, गैस कनेक्शन देने की गति छह गुना, शौचालय निर्माण की गति चार गुना और गरीबों को घर देने की रफ्तार तीन गुना बढ़ी है। ‘दूसरों पर निर्भर रहकर बड़ा देश नहीं बन सकता भारत’ श्री मोदी ने विकसित भारत के लक्ष्य को आत्मनिर्भरता से जोड़ते हुए कहा कि देश को अपनी जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। दुनिया से कोई वस्तु सस्ती मिल सकती है, लेकिन केवल सस्ते आयात के भरोसे रहने से देश की अपनी क्षमता विकसित नहीं होती। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी आर्थिक और सामरिक जरूरतें पूरी करने के साथ अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा भी स्वयं करनी होगी। इसी सोच के कारण ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्वदेशी’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे अभियान आज आम भारतीय की सोच से जुड़ रहे हैं। सेमीकंडक्टर से ऊर्जा तक आत्मनिर्भरता पर जोर प्रधानमंत्री ने कहा कि आधुनिक दुनिया में सेमीकंडक्टर चिप के बिना उद्योग, तकनीक और संचार का पहिया रुक सकता है। आजादी के बाद देश में सेमीकंडक्टर की चर्चा तो हुई, लेकिन लंबे समय तक इसका कोई बड़ा उत्पादन संयंत्र नहीं लग पाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि देश में तीन सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू हो चुके हैं और उनके उत्पादों का निर्यात भी प्रारंभ हो गया है। उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा को विकसित भारत की एक और बड़ी जरूरत बताते हुए कहा कि भविष्य की अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होगी। इसलिए परमाणु ऊर्जा, सौर ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और दूसरे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने 2047 तक 100 गीगावॉट की क्षमता हासिल करने का लक्ष्य भी सामने रखा। सौर ऊर्जा क्षमता 2 से बढ़कर 160 गीगावॉट हुई श्री मोदी ने कहा कि 2014 से पहले देश की सौर ऊर्जा क्षमता केवल दो गीगावॉट थी, जो अब बढ़कर करीब 160 गीगावॉट हो गई है। उन्होंने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का जिक्र करते हुए कहा कि लगभग 50 लाख घरों में सौर ऊर्जा से जुड़ा काम तेजी से चल रहा है। कई परिवारों का बिजली बिल शून्य हुआ है और कुछ लोग अतिरिक्त बिजली बेचकर कमाई भी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 2014 से पहले केवल 70 शहरों में पाइप के माध्यम से गैस पहुंचती थी। अब करीब 700 शहरों के पौने दो करोड़ घरों तक पाइप से गैस पहुंचाने का काम किया जा रहा है। समुद्र में तेल और गैस के नए भंडार खोजेगा भारत कच्चे तेल के लिए विदेशों पर निर्भरता को गंभीर चुनौती बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले समुद्री क्षेत्र का लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा खोज और उत्पादन के लिए ‘नो-गो एरिया’ घोषित था। सरकार ने इस नीति में बदलाव कर नए क्षेत्रों को खोज के लिए खोला है। उन्होंने कहा कि समुद्र के भीतर तेल और गैस के नए भंडार तलाशे जा रहे हैं। इसके लिए घोषित ‘समुद्र मंथन’ अभियान पर लगभग 85 हजार करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। ‘संकटों के बीच आत्मनिर्भरता ने देश को संभाला’ प्रधानमंत्री ने कोरोना महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि इन संकटों के दौरान कुछ लोगों ने देश में वैक्सीन, पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरक की भारी कमी की आशंका जताई थी। इसके बावजूद भारत ने अपनी जरूरतों को संभाला। उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार में यूरिया की कीमत करीब तीन हजार रुपये तक होने के बावजूद किसानों को यह लगभग 300 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी तरह डीएपी खाद किसानों को लगभग 1,350 रुपये में दी जा रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया अब व्यापार, तकनीक, मुद्रा, ऊर्जा और जरूरी वस्तुओं को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है। ऐसे समय में आत्मनिर्भरता भारत के लिए कोई नारा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्य शर्त है। विकसित भारत का इंजन बनेगी ‘सप्तधारा’ प्रधानमंत्री ने आने वाले वर्षों में देश को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए सात प्रमुख शक्तियों—‘सप्तधारा’—का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इनके दम पर अगले पांच से सात वर्षों में ऐसे बदलाव किए जा सकते हैं, जो बीते पांच से सात दशकों में संभव नहीं हो पाए। 1. मैन्युफैक्चरिंग: पुर्जे से पूरा उत्पाद भारत में बने श्री मोदी ने कहा कि भारत को केवल अंतिम उत्पाद जोड़ने तक सीमित नहीं रहना है। छोटे से छोटे कंपोनेंट से लेकर पूरा उत्पाद देश में तैयार होना चाहिए। उन्होंने उद्योग जगत से गुणवत्ता के साथ कोई समझौता न करने की अपील की। उनका कहना था कि वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की पहचान विश्वसनीयता, मजबूती और उच्च गुणवत्ता से होनी चाहिए। 2. कृषि और फूड प्रोसेसिंग: भारतीय स्वाद बने वैश्विक ब्रांड प्रधानमंत्री ने किसानों और खाद्य प्रसंस्करण को दूसरी बड़ी शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय मसाले, फल, फूल, कृषि उत्पाद और पारंपरिक खान-पान दुनिया के बाजार में बड़े ब्रांड बन सकते हैं। इसके लिए खेती को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और निर्यात से जोड़ना होगा। 3. तकनीक और इनोवेशन: एआई से क्वांटम तक आगे बढ़े भारत श्री मोदी ने कहा कि वर्तमान समय डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी और दूसरी उभरती तकनीकों का है। भारत को केवल इन तकनीकों का उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि इनोवेशन का वैश्विक केंद्र बनना होगा। उन्होंने भारत की डिजिटल पब्लिक टेक्नोलॉजी को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई। युवाओं के लिए बड़ी घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी स्किल्स की ट्रेनिंग देगी। छात्रों के लिए ऑनलाइन कोचिंग व्यवस्था शुरू करने की बात भी कही गई। 4. गतिशक्ति: तेज और बिना रुकावट वाला संपर्क सप्तधारा की चौथी शक्ति के रूप में श्री मोदी ने गतिशक्ति और कनेक्टिविटी को रखा। उन्होंने कहा कि देश को तेज, आसान और निर्बाध परिवहन व्यवस्था चाहिए। शहरों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने, सड़कों और रेलवे को मजबूत करने तथा बंदरगाहों के आसपास पोर्ट-लैंड डेवलपमेंट को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। 5. रक्षा शक्ति: हथियारों के साथ साइबर सुरक्षा भी जरूरी प्रधानमंत्री ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भारत की पांचवीं शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि भारत और दुनिया, दोनों ने स्वदेशी रक्षा क्षमता का महत्व अनुभव किया है। उन्होंने साइबर सुरक्षा को भी रक्षा का अहम हिस्सा बताया। प्रधानमंत्री के मुताबिक डिजिटल हमले अब केवल सरकारों और बड़ी कंपनियों के लिए नहीं, बल्कि प्रत्येक परिवार के लिए चुनौती बन सकते हैं। इस क्षेत्र में युवाओं की क्षमता का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा सकता है। 6. ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी: स्वच्छ विकास का नया मॉडल श्री मोदी ने ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, ग्रीन मोबिलिटी और पर्यावरण अनुकूल मैन्युफैक्चरिंग को भविष्य की अर्थव्यवस्था का आधार बताया। उन्होंने कहा कि भारत जलवायु संबंधी समस्याओं का केवल सामना नहीं कर रहा, बल्कि दुनिया को समाधान भी दे रहा है। ब्लू इकोनॉमी पर उन्होंने कहा कि भारत के पास लंबा समुद्री तट, विशाल मत्स्य संसाधन, तटीय पर्यटन और समुद्री तकनीक की संभावनाएं हैं। इन क्षेत्रों में निवेश और नवाचार से रोजगार तथा निर्यात के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। 7. सॉफ्ट पावर: योग, आयुर्वेद, संस्कृति और क्रिएटिव इंडस्ट्री सप्तधारा की सातवीं शक्ति के रूप में प्रधानमंत्री ने भारत की सॉफ्ट पावर को रखा। उन्होंने कहा कि योग ने दुनिया को भारत से जोड़ा है। आयुर्वेद, समग्र स्वास्थ्य सेवा, धार्मिक स्थल, हस्तशिल्प, संस्कृति, फिल्म, गेमिंग, वीएफएक्स, एनिमेशन और डिजिटल कंटेंट जैसे क्षेत्रों में भारत वैश्विक पहचान बना सकता है। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों को केवल सांस्कृतिक विरासत के रूप में नहीं, बल्कि बड़े आर्थिक और वैश्विक प्रभाव वाले उद्योगों के रूप में विकसित करना होगा। फॉर्च्यून 500 में भारत की 50 कंपनियों का लक्ष्य श्री मोदी ने भारतीय कारोबार के लिए बड़े लक्ष्य सामने रखे। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में फॉर्च्यून 500 की सूची में भारत की कम से कम 50 कंपनियां होनी चाहिए। इसके साथ ही दुनिया के शीर्ष पांच बैंकों में भारत का कम से कम एक बैंक शामिल होना चाहिए। भारतीय कंसल्टिंग, अकाउंटिंग और पेशेवर सेवा कंपनियों को भी वैश्विक स्तर पर शीर्ष स्थान हासिल करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लुधियाना से लेकर तिरुपुर तक भारत का टेक्सटाइल उद्योग दुनिया के बाजार में मजबूत पहचान बना सकता है। इसी तरह मशीनरी, दवाइयों और दूसरे भारतीय उत्पादों को भी हर बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना होगा। ‘रिफॉर्म हमारे लिए मजबूरी नहीं, दृढ़ विश्वास है’ प्रधानमंत्री ने कहा कि सुधार सरकार के लिए परिस्थितियों से पैदा हुई मजबूरी नहीं, बल्कि दृढ़ विश्वास का विषय हैं। देश ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पर आगे बढ़ चुका है। उन्होंने सरकारी विभागों, उद्योग जगत और समाज से अपनी सोच, लक्ष्य, कार्य संस्कृति और काम की गति में बदलाव करने की अपील की। मोदी ने कहा कि विकसित भारत का सपना केवल नीतियों से पूरा नहीं होगा। इसके लिए समय पर फैसले, तेज क्रियान्वयन और परिणाम आधारित काम जरूरी है। ‘हर घर तिरंगा, हर मन तिरंगा’ इससे पहले श्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा कि आज हर घर तिरंगा है और हर मन तिरंगा है। देश नए उत्साह, उमंग और संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने महात्मा गांधी समेत आजादी के लिए बलिदान देने वाले सभी स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया। समारोह में करीब 2,500 एनसीसी कैडेट और माय भारत वॉलंटियर्स ने ज्ञानपथ पर ‘वंदे मातरम्’ की आकृति बनाई। प्रधानमंत्री ने लाल किले पर लगातार 13वीं बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इसके बाद राष्ट्रगान हुआ और 21 तोपों की सलामी दी गई। इस अवसर पर लाल किले पर ‘वंदे मातरम्’ की विशेष प्रस्तुति भी हुई। युवाओं को भटकाने वाली ताकतों से सावधान रहने की अपील करीब 76 मिनट के भाषण में प्रधानमंत्री ने बिना किसी संगठन या प्रदर्शन का नाम लिए देश को वैचारिक रूप से भटकाने वाली ताकतों से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि कुछ लोग युवाओं को भ्रमित करने और देश की प्रगति को रोकने का प्रयास करते हैं। देश को ऐसी सोच से बचाते हुए युवाओं की ऊर्जा को शिक्षा, कौशल, तकनीक, इनोवेशन और राष्ट्र निर्माण में लगाना होगा।



Comments
0