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रांची। झारखंड उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की सीजीएल और सीडीपीओ भर्ती परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार के भर्ती रद्द करने के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने राज्य सरकार से इस मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है और अगली सुनवाई 15 सितंबर को तय की है। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद भर्ती रद्द होने से प्रभावित हजारों अभ्यर्थियों और अधिकारियों को फिलहाल राहत मिल गई है। सरकार के भर्ती रद्द करने के आदेश पर अंतरिम रोक हाईकोर्ट ने शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले में पहले दिए गए समान आदेश का पालन किया जाएगा। अदालत ने सरकार से पूछा है कि किन आधारों पर भर्ती प्रक्रिया और नियुक्तियों को रद्द किया गया। मामले की अगली सुनवाई तक सरकार का आदेश प्रभावी नहीं रहेगा। एक दिन पहले जेपीएससी मामले में भी मिला था बड़ा फैसला इससे पहले गुरुवार को हाईकोर्ट ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा तथा फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्तियां रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर भी रोक लगा दी थी। अदालत ने स्पष्ट किया था कि अगले आदेश तक सभी अधिकारी अपने-अपने पदों पर कार्य करते रहेंगे। उस मामले में भी सरकार से जवाब मांगा गया है और अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद खत्म हुआ आंदोलन अदालत से राहत मिलने के बाद सफल अभ्यर्थियों ने अपना धरना समाप्त कर दिया। वहीं, जेएसएससी-सीजीएल भर्ती रद्द होने के कारण नौकरी जाने का खतरा झेल रहे अधिकारी भी शुक्रवार को प्रोजेक्ट भवन के सामने से हट गए। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य सरकार के फैसले के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करना था, जो अब पूरा हो चुका है। अब आगे की लड़ाई अदालत में कानूनी प्रक्रिया के तहत लड़ी जाएगी। 18 अगस्त से लगातार कर रहे थे प्रदर्शन भर्ती रद्द होने के विरोध में अधिकारी और चयनित अभ्यर्थी 18 अगस्त से लगातार आंदोलन कर रहे थे। गुरुवार को उन्होंने पूरे दिन प्रोजेक्ट भवन के सामने धरना दिया। इसके बाद शाम को मोरहाबादी मैदान से अल्बर्ट एक्का चौक तक तिरंगा यात्रा निकालकर सरकार के फैसले का विरोध दर्ज कराया था। सरकार ने 22 भर्ती परीक्षाएं कर दी थीं रद्द झारखंड सरकार ने 17 अगस्त को भर्ती परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का हवाला देते हुए जेपीएससी और जेएसएससी की कुल 22 भर्ती परीक्षाएं रद्द कर दी थीं। रद्द की गई परीक्षाओं में जेपीएससी की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा , 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा , जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा और सीडीपीओ भर्ती परीक्षा जैसी प्रमुख परीक्षाएं शामिल थीं। सरकार ने पूरे मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी है। 2394 अधिकारियों की नौकरी पर मंडरा रहा था संकट सरकार के फैसले का सबसे बड़ा असर उन 2,394 अधिकारियों पर पड़ा था, जो इन भर्ती परीक्षाओं के आधार पर राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत थे। सरकारी आदेश के अनुसार उनकी नियुक्तियां स्वतः समाप्त मानी जानी थीं। हालांकि हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद फिलहाल इन अधिकारियों को बड़ी राहत मिल गई है और उनकी सेवा पर तत्काल प्रभाव से कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार ने भ्रष्टाचार का दिया था हवाला राज्य सरकार का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में भ्रष्टाचार और व्यापक अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। इन्हीं आरोपों को देखते हुए सभी संबंधित परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया गया और मामले की जांच अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) को सौंप दी गई, ताकि पूरी भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो सके। अब 15 सितंबर पर टिकी सबकी नजर हाईकोर्ट द्वारा अंतरिम राहत मिलने के बाद फिलहाल चयनित अभ्यर्थियों और अधिकारियों को राहत जरूर मिली है, लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी है। अब सरकार को अदालत में अपना पक्ष रखना होगा और यह बताना होगा कि भर्ती रद्द करने का निर्णय किन तथ्यों और कानूनी आधारों पर लिया गया। ऐसे में अब इस पूरे मामले पर 15 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।