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पटना, 4 जुलाई 2026: बिहार में अपराध से जुड़े मामलों के तेजी से निपटारे के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का ऐलान किया है और कहा है कि नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, तकनीक के इस्तेमाल और न्यायपालिका-पुलिस-प्रशासन के बेहतर समन्वय से राज्य में कानून का राज और मजबूत होगा। श्री चौधरी ने यह घोषणा शनिवार को बोधगया में नए आपराधिक कानूनों के एकीकृत क्रियान्वयन पर आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में की। यह सम्मेलन बिपार्ड और बिहार न्यायिक अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। क्राइम केसों की सुनवाई में तेजी लाने पर सरकार का फोकस मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का सबसे बड़ा लक्ष्य है कि अपराध से जुड़े मामलों में लोगों को जल्दी न्याय मिले। इसी को ध्यान में रखते हुए 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का फैसला लिया गया है। सरकार का मानना है कि अगर अदालत, पुलिस और प्रशासन मिलकर काम करें तो अपराध के मामलों की जांच, चार्जशीट और सुनवाई की रफ्तार बढ़ेगी और पीड़ितों को लंबे इंतजार से राहत मिलेगी। अब पटना में भी लगेगा ‘सहयोग शिविर’, फैसले से असंतुष्ट लोग रख सकेंगे बात श्री चौधरी ने एक और बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि अब हर महीने के दूसरे मंगलवार को पटना में राज्य स्तरीय सहयोग शिविर लगाया जाएगा। इसमें ऐसे लोग शामिल हो सकेंगे, जिनके आवेदन का निपटारा प्रखंड स्तर पर तो हो गया, लेकिन वे उस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस शिविर में उनकी शिकायत दोबारा सुनी जाएगी और समाधान की कोशिश की जाएगी, ताकि लोगों को न्याय मिल सके। मुख्यमंत्री ने बताया कि अभी प्रखंड स्तर पर हर महीने पहले और तीसरे मंगलवार को सहयोग कार्यक्रम होता है, जिसमें आवेदनों का 30 दिन के भीतर निपटारा किया जाता है। अगर तय समय में काम नहीं होता, तो संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई होती है। नए आपराधिक कानूनों के लागू होने से बदलेगी न्याय व्यवस्था मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम जैसे नए आपराधिक कानूनों का सही तरीके से लागू होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इन कानूनों को जनता केंद्रित सोच के साथ लागू किया जाना चाहिए, ताकि आम लोगों का भरोसा न्याय व्यवस्था पर और मजबूत हो। उनके मुताबिक, बिहार की पहचान हमेशा ‘न्याय के साथ विकास’ की रही है और अब नए कानूनों के जरिए इस सोच को और मजबूत किया जाएगा। एआई और तकनीक से होगी तेज जांच, 112 सेवा का रिस्पॉन्स टाइम भी घटेगा मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करेगी। उन्होंने बताया कि थानों को सीसीटीवी, डिजिटल उपकरण, वैज्ञानिक जांच व्यवस्था, फॉरेंसिक लैब और मोबाइल फॉरेंसिक वैन जैसी सुविधाओं से मजबूत किया जा रहा है। इससे जांच की गुणवत्ता बेहतर होगी और मामलों का निपटारा भी जल्दी हो सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि 112 इमरजेंसी सेवा के तहत अभी पुलिस औसतन 10 मिनट में घटनास्थल तक पहुंच रही है, लेकिन सरकार का लक्ष्य इसे घटाकर 7 से 8 मिनट करना है। महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा पर भी जोर श्री चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर है। स्कूलों और कॉलेजों के आसपास विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था मजबूत करने में सिर्फ पुलिस नहीं, बल्कि अदालत, प्रशासन और तकनीक—सबकी बराबर भूमिका है। सरकार का संदेश साफ: न्याय में देरी नहीं, समय पर फैसला मुख्यमंत्री ने कहा कि स्पीडी ट्रायल, फास्ट ट्रैक कोर्ट और समयबद्ध न्याय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार हर जरूरी संसाधन उपलब्ध कराएगी। उनका कहना था कि कानून का राज मजबूत करने में किया गया निवेश आने वाले कई दशकों तक बिहार को फायदा देगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर न्यायपालिका, पुलिस और प्रशासन मिलकर काम करें, तो बिहार में अपराध नियंत्रण और न्याय व्यवस्था दोनों में बड़ा सुधार देखा जा सकता है। बोधगया में जुटे सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जज बोधगया में आयोजित इस सम्मेलन में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची , पटना हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय , बिहार न्यायिक अकादमी के चेयरमैन जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद , मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत , एडवोकेट जनरल सत्यदर्शी संजय , गृह सचिव कुंदन कुमार समेत न्यायपालिका, पुलिस और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।



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