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मुंबई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के चलते बीते सप्ताह 0.26 फसदी तक के दबाव में रहे घरेलू शेयर बाजार की चाल अगले हफ्ते इस वर्ष जून के खुदरा और थोक महंगाई के आंकड़े तथा दिग्गज कंपनियों के तिमाही परिणाम से तय होगी। बीते सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सप्ताह की शुरुआत शानदार रही, लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसका असर बाजार पर भी दिखा और सेंसेक्स-निफ्टी दबाव में आ गए। हालांकि, सप्ताह के आखिर में बैंकिंग और आईटी कंपनियों के बेहतर बिजनेस अपडेट्स ने बाजार को संभाल लिया और गिरावट काफी हद तक थम गई। सप्ताह के अंत में बीएसई सेंसेक्स 194.52 अंक यानी 0.25 फीसदी की गिरावट के साथ 77,569.39 अंक पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 63.95 अंक यानी 0.26 फीसदी फिसलकर 24,206.80 अंक पर पहुंच गया। लार्जकैप सुस्त, मिडकैप-स्मॉलकैप ने मारी बाजी जहां बड़ी कंपनियों के शेयरों पर दबाव बना रहा वहीं मझौली और छोटी कंपनियों में निवेशकों का भरोसा कायम रहा। बीएसई मिडकैप इंडेक्स 1.32 फीसदी उछलकर 17,001.28 अंक पर पहुंच गया जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स 0.46 फीसदी की बढ़त के साथ 7,153.51 अंक पर बंद हुआ। रियल्टी, मेटल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीददारी देखने को मिली। इन कंपनियों के रिजल्ट पर टिकी रहेगी बाजार की नजर अगले सप्ताह कई दिग्गज कंपनियां अपने Q1 रिजल्ट जारी करेंगी। इनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, टाटा टेक्नोलॉजीज, विप्रो, जेएसडब्ल्यू स्टील, एचडीएफसी एएमसी, एचडीएफसी लाइफ, आईसीआईसीआई जनरल इंश्योरेंस, यूनियन बैंक, फेडरल बैंक, बीएचईएल, सिएट और हैवेल्स शामिल हैं। इन कंपनियों के नतीजे बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। महंगाई के आंकड़े भी बनेंगे बड़ा इम्तिहान बाजार की नजर सिर्फ कंपनियों के नतीजों पर ही नहीं बल्कि जून महीने के खुदरा महंगाई (सीपीआई) और थोक महंगाई (डब्ल्यूपीआई) के आंकड़ों पर भी रहेगी। इन आंकड़ों से ब्याज दरों और अर्थव्यवस्था की दिशा को लेकर संकेत मिलेंगे, जिसका सीधा असर निवेशकों के रुख पर पड़ सकता है। एक्सपर्ट बोले- अच्छे नतीजे आए तो लौट सकती है जोरदार तेजी निवेश सलाह देने वाली कंपनी जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर का कहना है कि वैश्विक निवेशकों की नजर अमेरिका के महंगाई आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के संकेतों पर भी रहेगी। उनका मानना है कि यदि वैश्विक महंगाई में नरमी बनी रहती है, कच्चे तेल की कीमतें काबू में रहती हैं और भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर आते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर मजबूत तेजी देखने को मिल सकती है। इससे विदेशी निवेशकों (एफआईआई) का भरोसा भी बढ़ेगा और बाजार को नई रफ्तार मिल सकती है।