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मोतिहारी। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और स्कूल बैग होने चाहिए, उसी उम्र में उनसे रोजी-रोटी के लिए मेहनत कराई जा रही थी। पूर्वी चंपारण के चकिया प्रखंड में बाल श्रम के खिलाफ चलाए गए विशेष अभियान में दो ऐसे बच्चों को काम करते हुए पाया गया, जिन्हें श्रम विभाग की टीम ने तत्काल मुक्त कराया। दो प्रतिष्ठानों पर छापा, दो बाल श्रमिक मिले श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग, बिहार के निर्देश पर शनिवार को श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, चकिया के नेतृत्व में विशेष धावा दल ने चकिया प्रखंड के विभिन्न प्रतिष्ठानों में सघन जांच अभियान चलाया। जांच के दौरान भारत स्वीट्स, चकिया और अमन मोटरसाइकिल रिपेयरिंग सेंटर में एक-एक बाल श्रमिक काम करते मिले। टीम ने बिना देर किए दोनों बच्चों को वहां से मुक्त कराया और उन्हें संरक्षण की प्रक्रिया के तहत सुरक्षित अपने साथ ले गई। बाल कल्याण समिति के समक्ष किया गया प्रस्तुत रेस्क्यू के बाद दोनों बच्चों को बाल कल्याण समिति, पूर्वी चंपारण के समक्ष प्रस्तुत किया गया। समिति के निर्देश पर दोनों को फिलहाल बाल गृह में रखा गया है, जहां उनकी देखभाल और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। बाल श्रम कराने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई श्रम विभाग ने दोनों प्रतिष्ठानों के संचालकों के खिलाफ बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। श्रम अधीक्षक सत्या प्रकाश ने कहा कि बच्चों से किसी भी प्रतिष्ठान में काम कराना कानूनन अपराध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले में बाल श्रम के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जुर्माना भी, जेल भी अधिकारियों के अनुसार, बाल श्रमिक रखने वाले नियोजकों के खिलाफ 20 हजार से 50 हजार रुपये तक जुर्माना और दो वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है। इसके अलावा सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार प्रत्येक बाल श्रमिक के मामले में संबंधित नियोजक से 20 हजार रुपये की अतिरिक्त राशि भी वसूली जाएगी। एक कार्रवाई, दो बच्चों का लौटा बचपन प्रशासन का कहना है कि बाल श्रम केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि बच्चों के शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर भविष्य के अधिकार पर सीधा हमला है। चकिया में हुई यह कार्रवाई उन लोगों के लिए सख्त संदेश है, जो आर्थिक मजबूरी या अन्य कारणों का हवाला देकर बच्चों से काम कराते हैं। कई विभागों की संयुक्त टीम ने चलाया अभियान इस विशेष अभियान में चकिया, मेहसी, पकड़ीदयाल और पिपराकोठी के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, प्रयास संस्था और ग्राम नियोजन केंद्र के प्रतिनिधि, चकिया थाना के पुलिसकर्मी तथा एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की टीम भी शामिल रही। संयुक्त कार्रवाई के जरिए बाल श्रम पर प्रभावी रोक लगाने की दिशा में प्रशासन ने सख्त रुख का संकेत दिया है।



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