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पटना/औरंगाबाद/सासाराम। बिहार में महज तीन महीने के भीतर दूसरे कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) की हत्या ने अधिकारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अप्रैल में भागलपुर के सुल्तानगंज नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी कृष्णा भूषण कुमार की गोली मारकर हत्या के बाद अब डेहरी-डालमियानगर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी विमल कुमार की औरंगाबाद में बेरहमी से हत्या कर दी गई, जिससे कानून-व्यवस्था और अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर नई बहस छिड़ गई है। कार्यपालक पदाधिकारी विमल कुमार की हत्या के विरोध में और सुरक्षा की मांग को लेकर आज से पूरे राज्य के ईओ अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। कार रोकी, बाहर खींचा और फिर बेरहमी से हत्या पुलिस सूत्रों ने रविवार को बताया कि रोहतास जिले के डेहरी-डालमियानगर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी विमल कुमार शनिवार रात अपनी निजी कार से पटना जा रहे थे। रास्ते में औरंगाबाद जिले के बारुण थाना क्षेत्र के पटना कैनाल नहर रोड पर घनौती पुल के पास पहले से घात लगाए अपराधियों ने उनकी कार को रोक लिया। प्रत्यक्षदर्शियों और प्रारंभिक जांच के अनुसार, अपराधियों ने पहले उन्हें कार से बाहर खींचा। इसके बाद लोहे की रॉड और धारदार हथियारों से ताबड़तोड़ हमला किया। उनके चेहरे और शरीर पर गंभीर चोटों के निशान मिले हैं। शुरुआती सूचना गोली लगने की भी थी, हालांकि पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। गंभीर रूप से घायल विमल कुमार को स्थानीय लोगों की मदद से जमुहार स्थित नारायण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। कार्यक्रम के बाद पटना जाने के दौरान हुई वारदात हत्या से कुछ घंटे पहले ही श्री विमल कुमार डेहरी में आयोजित 'एक शाम शहीदों के नाम' कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। कार्यक्रम में स्थानीय विधायक, एसडीएम और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि कुछ घंटे बाद उनकी हत्या की खबर पूरे प्रशासनिक महकमे को झकझोर देगी। हत्या के पीछे क्या है वजह पुलिस फिलहाल कई एंगल पर जांच कर रही है। * क्या यह लूट की वारदात थी? * क्या किसी पुरानी रंजिश का मामला है? * क्या किसी प्रशासनिक कार्रवाई का बदला लिया गया? * या फिर इसके पीछे कोई बड़ी साजिश है? औरंगाबाद पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और अपराधियों की पहचान के लिए आसपास के इलाकों में छापेमारी जारी है। हत्या के विरोध में राज्यभर के कार्यपालक पदाधिकारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डेहरी-डालमियानगर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी विमल कुमार की हत्या के बाद बिहार नगर सेवा संघ ने अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए 2 अगस्त 2026 से राज्यभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की है। संघ ने हत्यारों की तत्काल गिरफ्तारी और फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाकर कड़ी सजा देने, मृत अधिकारी के आश्रित परिवार को उचित आर्थिक मुआवजा एवं एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने तथा सभी कार्यपालक पदाधिकारियों को क्षेत्र भ्रमण के लिए अंगरक्षक और आवासीय सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। संघ ने स्पष्ट किया है कि लिखित आश्वासन और ठोस सुरक्षा व्यवस्था मिलने तक सभी प्रशासनिक एवं विकास कार्यों का पूर्ण बहिष्कार जारी रहेगा। अप्रैल में भागलपुर में भी हुई थी ऐसी ही सनसनीखेज हत्या यह पहला मामला नहीं है। 28 अप्रैल 2026 को भागलपुर जिले के सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में भी दिनदहाड़े ऐसी ही सनसनीखेज घटना हुई थी। उस दिन नगर परिषद कार्यालय में तालाब और होर्डिंग के टेंडर को लेकर बैठक चल रही थी। इसी दौरान नगर परिषद की उपसभापति के पति रामधनी यादव अपने साथियों के साथ कार्यालय में घुस गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उसने सभापति राजकुमार गुड्डू को धमकाते हुए कहा, "क्या सुल्तानगंज में सिर्फ तुम ही राज करोगे?" इसके बाद उसने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। बीच-बचाव करने पहुंचे अफसर को मारी चार गोलियां फायरिंग के दौरान नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी कृष्णा भूषण कुमार बीच-बचाव करने पहुंचे। अपराधियों ने उन पर भी गोलियां चला दीं। उन्हें चार गोलियां लगीं और अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। वहीं, सभापति राजकुमार गुड्डू गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया था, जिसने पूरे बिहार को झकझोर दिया था। हालांकि बाद में रामधनी यादव पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। 100 करोड़ की जमीन और टेंडर विवाद बना था वजह सुल्तानगंज हत्याकांड की जांच में सामने आया कि विवाद केवल टेंडर तक सीमित नहीं था। स्थानीय लोगों के मुताबिक, करीब 100 करोड़ रुपये की ट्रस्ट की जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद था। नगर परिषद में टेंडर और वर्चस्व की लड़ाई भी चल रही थी। आरोपी और नगर परिषद के सभापति के बीच वर्षों पुरानी दुश्मनी थी। इसी विवाद की चपेट में कार्यपालक पदाधिकारी कृष्णा भूषण कुमार आ गए और अपनी जान गंवा बैठे। क्या सरकारी अफसर अब आसान निशाना बन गए हैं दोनों घटनाओं में एक समानता साफ दिखाई देती है। दोनों मृतक अधिकारी अपने-अपने नगर निकायों में प्रशासनिक फैसलों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। नगर परिषदों में टेंडर, अतिक्रमण हटाने, सरकारी जमीन, कर वसूली और निर्माण कार्यों से जुड़े फैसले अक्सर विवाद का कारण बनते रहे हैं। ऐसे में लगातार दो कार्यपालक पदाधिकारियों की हत्या ने यह आशंका और गहरा दी है कि कहीं सरकारी अधिकारी संगठित अपराधियों और प्रभावशाली हितों के निशाने पर तो नहीं हैं।