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मुंबई। काजल अग्रवाल और श्रेयस तलपड़े की आगामी फिल्म 'द इंडिया स्टोरी: स्लो पॉइज़न इन प्रोग्रेस' रिलीज से पहले कानूनी पचड़े में फंस गई है, क्योंकि फिल्म के टीज़र और प्रचार सामग्री में भारतीय कृषि, डेयरी और पोल्ट्री सेक्टर को लेकर किए गए कुछ दावों को भ्रामक, गैर-वैज्ञानिक और साख को नुकसान पहुंचाने वाला बताते हुए निर्माताओं को कानूनी नोटिस भेजा गया है। फिल्म के टीज़र और प्रमोशनल कंटेंट को लेकर कृषि और खाद्य क्षेत्र से जुड़े एक कारोबारी की तरफ से मेकर्स को कानूनी नोटिस भेजा गया है। आरोप है कि फिल्म में भारतीय कृषि, डेयरी और पोल्ट्री सेक्टर को गलत और गुमराह करने वाले अंदाज में पेश किया गया है, जिससे किसानों और कारोबारियों की साख को नुकसान पहुंच सकता है। 24 जुलाई को रिलीज होनी है फिल्म जी स्टूडियोज और एमआईजी प्रोडक्शन एंड स्टूडियोज के सहयोग से बनी इस फिल्म का निर्देशन चेतन डीके ने किया है जबकि इसकी कहानी और निर्माण सागर बी. शिंदे ने किया है। फिल्म 24 जुलाई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। क्या है पूरा मामला एडवोकेट हिरण्या पांडे ने 15 जून को एग्री बिजनेस सेंटर के मालिक भावेश सोधा की ओर से फिल्म के निर्माताओं, जी स्टूडियोज और एमआईजी प्रोडक्शन एंड स्टूडियोज एलएलपी को कानूनी नोटिस भेजा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि फिल्म के टीजर और प्रचार सामग्री में ऐसे दावे किए गए हैं जो भारतीय कृषि व्यवस्था, डेयरी उद्योग और पोल्ट्री सेक्टर की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उनके मुताबिक कई दावे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं हैं और आम लोगों में बेवजह खौफ पैदा कर सकते हैं। 'स्लो पॉइज़न' बताने पर एतराज नोटिस में कहा गया है कि फिल्म भारतीय कृषि व्यवस्था को "स्लो पॉइज़न" यानी धीमे जहर का स्रोत बताने की कोशिश करती नजर आती है। फिल्म के प्रमोशनल कंटेंट में कीटनाशकों के इस्तेमाल, खाद्य पदार्थों में मिलावट और कैंसर के बढ़ते मामलों जैसे मुद्दों को प्रमुखता से दिखाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस तरह की पेशकश से लाखों किसानों, डेयरी उत्पादकों और पोल्ट्री कारोबार से जुड़े लोगों की मेहनत और भरोसे पर सवाल खड़े हो सकते हैं। कीटनाशक और मिलावट वाले दावों पर सवाल नोटिस में फिल्म के उन दृश्यों पर खास एतराज जताया गया है जिनमें भारत में बड़े पैमाने पर कीटनाशकों के इस्तेमाल का संकेत दिया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि भारत में प्रति हेक्टेयर कीटनाशक खपत कई विकसित देशों की तुलना में कम है। इसी तरह दूध में व्यापक मिलावट और पोल्ट्री उद्योग से जुड़े कुछ दृश्यों को भी भ्रामक बताया गया है। खास तौर पर एक दृश्य, जिसमें मृत चिकन के शरीर में सिरिंज लगाते हुए दिखाया गया है, उसे वैज्ञानिक रूप से गलत और हकीकत से दूर बताया गया है। कैंसर से जोड़ने पर भी उठे सवाल शिकायतकर्ता ने फिल्म में कृषि पद्धतियों को सीधे तौर पर कैंसर के बढ़ते मामलों से जोड़ने पर भी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि इस तरह के गंभीर निष्कर्षों के लिए ठोस वैज्ञानिक रिसर्च, सत्यापित डेटा और प्रमाणिक अध्ययन जरूरी होते हैं। मेकर्स से मांगा गया पूरा ब्यौरा कानूनी नोटिस में फिल्म निर्माताओं से मांग की गई है कि वे फिल्म में दिखाए गए सभी आंकड़ों, शोध रिपोर्टों, स्रोत सामग्री, कार्यप्रणाली और वैज्ञानिक आधार का खुलासा करें। इसके अलावा टीजर और अन्य प्रचार सामग्री को डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाने तथा फिल्म की रिलीज से पहले जरूरी बदलाव करने की मांग भी की गई है। रिलीज से पहले बढ़ी चुनौती फिल्म अभी सिनेमाघरों तक पहुंची भी नहीं है लेकिन उससे पहले ही कानूनी विवाद ने इसकी राह मुश्किल कर दी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि फिल्म निर्माता नोटिस का क्या जवाब देते हैं और क्या रिलीज से पहले फिल्म में किसी तरह का बदलाव किया जाता है या नहीं।



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