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पटना। बिहार की हर पंचायत तक पहुंचकर लाखों विधवाओं और उनके आश्रित बच्चों को हुनर, रोजगार और सम्मानजनक जीवन से जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना के साथ लूंबा फाउंडेशन ने राज्य सरकार से हाथ मिलाने की पेशकश की है। बिहार से शुरू करना चाहता है राष्ट्रीय अभियान लूंबा फाउंडेशन ने बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को ईमेल के जरिए भेजे गए अपने प्रस्ताव में कहा है कि वह पूरे देश में पंचायत स्तर पर विधवाओं और उनके आश्रित बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने का अभियान चलाना चाहता है और इसकी शुरुआत बिहार से करना चाहता है। इसके लिए राज्य सरकार के सहयोग की अपेक्षा जताई गई है। हर पंचायत तक पहुंचने की योजना फाउंडेशन का लक्ष्य बिहार की सभी 8387 ग्राम पंचायतों तक पहुंचकर विधवाओं और उनके बच्चों को शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। संस्था का मानना है कि पंचायतों के पास अपने क्षेत्र की विधवाओं की सबसे सटीक जानकारी होती है, इसलिए यह अभियान पंचायतों के माध्यम से ज्यादा प्रभावी हो सकता है। पहले भी बदल चुका है हजारों लोगों का जीवन लूंबा फाउंडेशन ने बताया कि उसने सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस ऑर्गनाइजेशन के साथ मिलकर बिहार के 10 जिलों दरभंगा, मधुबनी, पटना, छपरा, भागलपुर, समस्तीपुर, सिवान, चंपारण, गया और बेगूसराय में विधवाओं और उनके बच्चों को कौशल प्रशिक्षण दिया। नवंबर 2024 से सितंबर 2025 तक 2,000 विधवाओं और उनके आश्रितों तक पहुंच बनाई गई। इनमें से 1,131 लोगों को रोजगार मिला, जिनमें 374 विधवाएं और 757 आश्रित बच्चे शामिल हैं। 17 राज्यों में 25 हजार से ज्यादा विधवाओं को किया सशक्त फाउंडेशन का दावा है कि अब तक वह देश के 17 राज्यों में 25,000 से अधिक विधवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का काम कर चुका है। भारत के अलावा बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, केन्या, तंजानिया, युगांडा, मलावी, दक्षिण अफ्रीका, चिली और ग्वाटेमाला जैसे देशों में भी संस्था विधवाओं के सशक्तिकरण पर काम कर रही है। लॉर्ड राज लूंबा की मां से मिली प्रेरणा लूंबा फाउंडेशन की स्थापना 1997 में यूनाइटेड किंगडम में लॉर्ड राज लूंबा और उनकी पत्नी लेडी लूंबा ने की थी। इसकी प्रेरणा लॉर्ड लूंबा की मां से मिली, जो 37 वर्ष की उम्र में विधवा हो गई थीं और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सातों बच्चों को शिक्षित किया। इसी अनुभव ने विधवाओं के सम्मान और सशक्तिकरण के लिए इस अभियान की नींव रखी। 'विधवाओं की समृद्धि, समाज की समृद्धि' फाउंडेशन के संस्थापक लॉर्ड राज लूंबा का कहना है कि किसी एक विधवा को आत्मनिर्भर बनाना सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज की जिंदगी बदलने जैसा है। उनका मानना है कि "विधवाओं की समृद्धि ही समाज की समृद्धि है।"