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ताइपे। भारत की 17 वर्षीय शटलर तन्वी शर्मा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ताइपे ओपन 2026 के महिला एकल फाइनल में वियतनाम की छठी वरीयता प्राप्त गुयेन थुई लिन्ह को सीधे गेमों में 21-16, 21-16 से हराकर अपना पहला बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर सुपर 300 खिताब जीता और ताइपे ओपन की सबसे कम उम्र की चैंपियन बनने के साथ 17 साल बाद इंडिया को महिला एकल का यह प्रतिष्ठित खिताब दिला दिया। 17 साल बाद भारत को मिला ताइपे ओपन का महिला एकल खिताब तन्वी शर्मा इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का महिला एकल खिताब जीतने वाली साइना नेहवाल (2008) के बाद दूसरी भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। उनकी इस जीत के साथ भारत का 17 साल पुराना खिताबी इंतजार भी खत्म हो गया। इसके अलावा, ताइपे ओपन के 'ग्रां प्री गोल्ड' दौर में 2009 में ज्वाला गुट्टा और वी. दिजू की मिश्रित युगल जोड़ी की जीत के बाद यह भारत का इस टूर्नामेंट में तीसरा खिताब है। पहले गेम में शुरुआत से बनाई बढ़त तन्वी ने फाइनल की शुरुआत बेहद आक्रामक अंदाज में की। उन्होंने शुरुआती दौर में ही 10-2 की बढ़त बना ली। हालांकि गुयेन ने वापसी करते हुए अंतर को 10-8 तक पहुंचाया, लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने दबाव नहीं बनने दिया और पहला गेम 21-16 से अपने नाम कर लिया। दूसरे गेम में पिछड़कर की दमदार वापसी दूसरे गेम की शुरुआत तन्वी के लिए आसान नहीं रही। वह 0-3 से पीछे हो गई थीं, लेकिन शानदार वापसी करते हुए जल्द ही मुकाबले पर पकड़ बना ली। उन्होंने बेहतरीन क्रॉस-कोर्ट शॉट्स , सटीक प्लेसमेंट और आक्रामक खेल के दम पर लगातार अंक जुटाए और सात अंकों की बढ़त हासिल कर ली। आखिर में शानदार क्रॉस-कोर्ट ड्रॉप शॉट के साथ उन्होंने मुकाबला 21-16 से जीत लिया। पूरा फाइनल सिर्फ 36 मिनट में खत्म हो गया। 'मैं सिर्फ अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहती थी' खिताब जीतने के बाद तन्वी ने कहा, "मैं यह खिताब जीतकर बेहद खुश हूं। मैं पूरे टूर्नामेंट में एक-एक मैच पर ध्यान देती रही और अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की। फाइनल से पहले मैं काफी नर्वस थी, लेकिन खुद से कहा कि 100 प्रतिशत देना है और सिर्फ अपने खेल पर फोकस करना है।" भारत के खास क्लब में शामिल हुईं तन्वी इस ऐतिहासिक जीत के साथ तन्वी शर्मा सुपर 300 या उससे बड़े स्तर का खिताब जीतने वाली चौथी भारतीय महिला एकल खिलाड़ी बन गई हैं। अब उनका नाम साइना नेहवाल, पीवी सिंधु और देविका सिहाग जैसे दिग्गज खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो गया है। दुनिया की तीसरी सबसे कम उम्र की सुपर 300 चैंपियन 17 वर्षीय तन्वी ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम की। वह बीडब्ल्यूएफ सुपर 300 टूर्नामेंट जीतने वाली दुनिया की तीसरी सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बन गई हैं। यह जीत न सिर्फ उनके करियर का सबसे बड़ा मुकाम है बल्कि इंडियन बैडमिंटन के लिए भी भविष्य की एक नई उम्मीद बनकर सामने आई है।



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