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वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत की चुनाव व्यवस्था की सराहना करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कथित सवाल का हवाला दिया और कहा कि भारत में 64.6 करोड़ मतदाताओं ने वैध फोटो आईडी के साथ मतदान किया इसलिए अमेरिका में भी चुनावों की सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए 'सेव अमेरिका एक्ट' को तत्काल पारित किया जाना चाहिए। श्री ट्रम्प ने मंगलवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर किए गए पोस्ट में दावा किया कि इस महीने की शुरुआत में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अमेरिकी प्रशासन से पूछा था कि "अमेरिका में वैध फोटो आईडी के बिना चुनाव कैसे हो सकते हैं?" श्री ट्रम्प ने इसी का हवाला देते हुए अमेरिकी संसद से 'सेव अमेरिका एक्ट' को जल्द से जल्द पारित करने की अपील की। https://truthsocial.com/@realDonaldTrump/posts/117113347902795107 ट्रम्प बोले- भारत में 64.6 करोड़ वोटरों ने दिखाई फोटो आईडी श्री ट्रम्प ने अपने पोस्ट में भारत के हालिया आम चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि 64 करोड़ 60 लाख मतदाताओं ने मतदान किया और हर मतदाता के पास वैध फोटो पहचान पत्र (फोटो आईडी) था। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत में एक प्रतिशत से भी कम मतदान डाक के जरिए हुआ। उनका कहना है कि अमेरिका को भी चुनावों की सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए इसी तरह के कड़े नियम अपनाने चाहिए। क्या है 'सेव अमेरिका एक्ट' सेव अमेरिका एक्ट अमेरिका में मतदाता पंजीकरण और मतदान प्रक्रिया को अधिक सख्त बनाने का प्रस्तावित विधेयक है। इसके तहत—वोटर रजिस्ट्रेशन के समय नागरिकता का दस्तावेजी प्रमाण देना होगा। मतदान के दौरान वैध फोटो आईडी दिखाना अनिवार्य होगा और डाक से मतदान (मेल-इन वोटिंग) की व्यवस्था को काफी सीमित किया जाएगा। यह विधेयक अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से पारित हो चुका है, लेकिन सीनेट से अभी मंजूरी मिलना बाकी है। डेमोक्रेट और रिपब्लिकन आमने-सामने सेव अमेरिका एक्ट को लेकर अमेरिका की राजनीति दो हिस्सों में बंटी हुई है। रिपब्लिकन पार्टी और ट्रम्प समर्थकों का कहना है कि फोटो आईडी और नागरिकता के दस्तावेज चुनावी धोखाधड़ी रोकने और चुनावों की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए जरूरी हैं। वहीं, डेमोक्रेट और इस विधेयक के विरोधियों का तर्क है कि अमेरिका में गैर-नागरिकों के मतदान पर पहले से ही रोक है। उनका कहना है कि नए नियम उन वैध मतदाताओं के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं, जिनके पास जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट या अन्य जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। 12 फीसदी अमेरिकी मतदाताओं के पास जरूरी दस्तावेज नहीं बाइपार्टिसन पॉलिसी सेंटर के मुताबिक अमेरिका में करीब 12 फीसदी पंजीकृत मतदाताओं के पास ऐसे दस्तावेज नहीं हैं, जिन्हें आम तौर पर नागरिकता के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाता है। यही वजह है कि यह विधेयक लगातार राजनीतिक विवाद का विषय बना हुआ है। दुनिया में हर देश का नियम अलग फोटो आईडी को लेकर दुनिया के अलग-अलग देशों में अलग-अलग व्यवस्था है। ब्रिटेन में कई चुनावों के दौरान मतदान केंद्र पर फोटो आईडी दिखाना अनिवार्य है, जबकि स्कॉटलैंड और वेल्स के कुछ स्थानीय चुनावों में इसकी जरूरत नहीं पड़ती। कनाडा में पहचान और पते का प्रमाण देना जरूरी है, लेकिन केवल फोटो आईडी ही अनिवार्य नहीं है। मतदाता दो अन्य मान्य दस्तावेज भी दिखा सकता है और कुछ मामलों में दूसरा मतदाता उसकी पहचान की पुष्टि भी कर सकता है। ट्रम्प का सीधा संदेश- अब और इंतजार नहीं ट्रम्प ने अपने पोस्ट के अंत में साफ शब्दों में लिखा कि "अब सेव अमेरिका एक्ट को तुरंत पास किया जाना चाहिए।" उनका मानना है कि कड़े पहचान नियम लागू होने से अमेरिकी चुनाव प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनेगी।



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