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मुंबई। कच्चे तेल की कीमतों से महंगाई बढ़ने की आशंका कम होने के बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार जारी बिकवाली के दबाव में बीते सप्ताह 0.65 प्रतिशत तक की गिरावट में रहे शेयर बाजार की नजर अगले सप्ताह घरेलू कर्ज वृद्धि एवं पीएमआई के जारी होने वाले आंकड़ों के साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के आने वाले बयान पर रहेगी। बीते सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 486.8 अंक यानी 0.65 प्रतिशत गिरकर शुक्रवार को 74,294.96 अंक पर बंद हुआ। हालांकि, पूरे सप्ताह एनएसई के निफ्टी में रिकवरी की रफ्तार अपेक्षाकृत मजबूत रही। निफ्टी सप्ताह के अंत में 51.7 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,346.40 अंक पर बंद हुआ। मिडकैप-स्मॉलकैप ने की संभलने की कोशिश सप्ताह के दौरान मझौली और छोटी कंपनियों के शेयरों ने पिछली गिरावट से उबरने की कोशिश की, लेकिन वे पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाए। बीएसई मिडकैप मामूली गिरावट के साथ 16,859.55 अंक पर लगभग सपाट रहा। वहीं, बीएसई स्मॉलकैप 22.8 अंक यानी 0.32 प्रतिशत टूटकर 7,202.89 अंक पर बंद हुआ। हालांकि बड़ी कंपनियों के शेयरों की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन बेहतर रहा। निवेशकों का रुझान ऐसी घरेलू कंपनियों की ओर रहा, जिनकी कमाई की संभावनाएं बेहतर हैं, ऑर्डर बुक मजबूत है और बैलेंस शीट अच्छी स्थिति में है। कच्चा तेल सस्ता हुआ तो बाजार ने ली राहत की सांस भारतीय शेयर बाजार के लिए सप्ताह की शुरुआत कमजोर रही, लेकिन बाद में उसने कुछ हद तक वापसी की। हाल के ऊंचे स्तरों से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने बाजार को राहत दी। अमेरिका और जापान में मौद्रिक नीति से जुड़े फैसले भी मोटे तौर पर बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहे। ऊर्जा की कीमतों से महंगाई बढ़ने की आशंका कम होने का असर सरकारी बॉन्ड की यील्ड पर भी दिखाई दिया। सप्ताह के आखिरी हिस्से में यील्ड में नरमी आई, जिससे शेयर बाजार के वैल्यूएशन को कुछ सहारा मिला। इसके बावजूद यह राहत बाजार को साप्ताहिक गिरावट से बाहर निकालने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुई। ऊंची ब्याज दरों का डर अभी बरकरार दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंकों से मिले संकेत बाजार की चिंता बढ़ाए हुए हैं। इन संकेतों से ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बने रहने की आशंका कायम है। दूसरी ओर, एफआईआई की लगातार बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बनाए रखा। विदेशी निवेशकों की बिकवाली से रुपये पर दबाव पड़ा और शेयर बाजार की रिकवरी सीमित हो गई। नतीजा यह रहा कि शुरुआती कमजोरी से कुछ वापसी करने के बावजूद घरेलू बाजार सप्ताह का अंत नुकसान में ही कर पाया। हेल्थकेयर-एफएमसीजी में खरीददारी, आईटी और कंज्यूमर ड्यूरेबल पर दबाव सेक्टर के स्तर पर निवेशकों का रुझान हेल्थकेयर और एफएमसीजी शेयरों की ओर रहा। इन क्षेत्रों की कमाई को अपेक्षाकृत रक्षात्मक माना जा रहा है और इनका जुड़ाव घरेलू मांग से भी है। इसके उलट मिडकैप और स्मॉलकैप आईटी शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। ऊंची ब्याज दरों के लंबे समय तक बने रहने की आशंका के बीच वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी पर होने वाले खर्च को लेकर चिंता ने इन शेयरों पर दबाव बनाया। कंज्यूमर ड्यूरेबल शेयरों में भी कमजोरी रही। ऊंची ब्याज दरों के माहौल में गैर-जरूरी वस्तुओं की मांग और लगातार कीमत संबंधी दबाव को लेकर बनी चिंता ने इस सेक्टर को प्रभावित किया। अगले सप्ताह इन आंकड़ों पर रहेगी बाजार की नजर अब निवेशकों की निगाह अगले सप्ताह आने वाले घरेलू कर्ज वृद्धि और पीएमआई के आंकड़ों पर रहेगी। इन आंकड़ों से देश में आर्थिक गतिविधियों की स्थिति का अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी। वैश्विक मोर्चे पर अमेरिका में बेरोजगारी भत्ते के शुरुआती दावों के आंकड़े भी महत्वपूर्ण रहेंगे। इसके साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के बयान ब्याज दरों की आगे की दिशा और वैश्विक नकदी की स्थिति को लेकर बाजार की उम्मीदों को प्रभावित कर सकते हैं। बाजार की रिकवरी के रास्ते में अभी बाहरी दबाव जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर के मुताबिक, भू-राजनीतिक जोखिम अभी खत्म नहीं हुए हैं और विदेशी निवेश की भी मजबूत वापसी नहीं हुई है। ऐसे में शेयर बाजार में आगे की रिकवरी काफी हद तक बाहरी दबाव में और कमी आने पर निर्भर करेगी। मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों के लिए चुनिंदा रुख महत्वपूर्ण रहेगा। मजबूत और साफ दिखाई देने वाली कमाई की संभावना, बेहतर बैलेंस शीट और उचित वैल्यूएशन वाली कंपनियां इस माहौल में निवेशकों के लिए अहम रहेंगी।



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