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मोतिहारी। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में मोतिहारी के सेमरा स्टेशन निवासी और करीब तीन दशक का विधिक अनुभव रखने वाले अधिवक्ता राकेश कुमार उर्फ राकेश कुमार ठाकुर को बिहार सरकार ने पटना उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) में राजकीय अधिवक्ता नियुक्त किया है, जिससे जिले के विधि जगत में हर्ष का माहौल है। मोतिहारी से शुरू हुआ वकालत का सफर श्री राकेश कुमार ठाकुर ने वर्ष 1996 में मोतिहारी व्यवहार न्यायालय से अपने वकालत करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद दिसंबर 2000 से वह लगातार पटना उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस कर रहे हैं। करीब तीन दशक के विधिक अनुभव के दौरान उन्होंने अपनी कानूनी समझ, कड़ी मेहनत और पेशेवर निष्ठा के बल पर विधि जगत में अलग पहचान बनाई है। लंबे अनुभव को मिली नई जिम्मेदारी राजकीय अधिवक्ता के रूप में उनकी नियुक्ति को मोतिहारी के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। अधिवक्ता समुदाय का कहना है कि पटना उच्च न्यायालय में लंबे समय से सक्रिय रहने के कारण राकेश कुमार ठाकुर को न्यायिक प्रक्रिया और विधिक मामलों का व्यापक अनुभव है। समुदाय ने विश्वास जताया कि उनका यह अनुभव नई जिम्मेदारी निभाने और बिहार सरकार का पक्ष प्रभावी ढंग से रखने में उपयोगी साबित होगा। सांसदों और अधिवक्ताओं ने दी बधाई श्री ठाकुर की नियुक्ति पर मोतिहारी के सांसद राधा मोहन सिंह और बेतिया के सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। जिला विधिज्ञ संघ के अध्यक्ष शेष नारायण कुंवर, महासचिव राजीव कुमार द्विवेदी तथा वरिष्ठ अधिवक्ता कन्हैया कुमार सिंह, ओम प्रकाश श्रीवास्तव, रामाकांत पाण्डेय, अशोक कुमार श्रीवास्तव, विनोद कुमार दूबे, सुभाष कुमार तिवारी, अनिल सिंह, नरेन्द्र देव, राकेश सिंह, शंभू शरण सिंह, नीरज कुमार झा, उज्ज्वल कुमार और आलोक चन्द्र समेत कई गणमान्य लोगों ने भी उनकी नियुक्ति पर प्रसन्नता व्यक्त की। शुभचिंतकों ने जताया भरोसा पूर्व मुखिया मनोज कुमार सिंह, राय सुंदर देव शर्मा, मणिकांत पाण्डेय, मुकेश मिश्रा, संजीव कुमार सिंह और संदीप कुमार सिंह समेत अन्य लोगों ने भी राकेश कुमार ठाकुर को नई जिम्मेदारी मिलने पर शुभकामनाएं दीं। शुभचिंतकों ने विश्वास जताया कि वह पटना उच्च न्यायालय में अपनी नई जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी निष्ठा, तन्मयता और विधिक दक्षता के साथ करेंगे तथा बिहार सरकार का पक्ष मजबूती से रखेंगे। श्री ठाकुर की यह नियुक्ति उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि होने के साथ ही मोतिहारी के विधि जगत के लिए भी गर्व का विषय मानी जा रही है।



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