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मुंबई। गणपति उत्सव की रौनक और उत्साह के बीच अभिनेत्री शालिनी पांडे ने ऐसा अनुभव साझा किया है, जो त्योहार मनाने के हमारे तरीके पर सोचने को मजबूर करता है। तेज आवाज और पटाखों के शोर से घबराई एक छोटी बिल्ली जब उनके पास आकर ठहर गई, तो उस शांत मुलाकात ने अभिनेत्री को भीतर तक छू लिया। अब शालिनी ने लोगों से अपील की है कि वे त्योहार प्यार, करुणा और जिम्मेदारी के साथ मनाएं, शोर के साथ नहीं। शोर से बचकर शालिनी के पास पहुंची नन्ही जान शालिनी ने सोशल मीडिया पर उस छोटी बिल्ली की झलकियां साझा की हैं, जो तेज आवाजों और पटाखों से डरकर उनके पास चली आई थी। अभिनेत्री ने महसूस किया कि शायद उस बेजुबान जीव ने उनके पास खुद को सुरक्षित पाया। उस छोटे-से पल ने दोनों के बीच बिना शब्दों का एक भावनात्मक रिश्ता बना दिया। ‘उसने मुझे ऐसा एहसास दिया, जिसे शब्दों में नहीं बता सकती’ अपने अनुभव को साझा करते हुए शालिनी ने लिखा, “एक डरी हुई नन्ही जान, जो शोर और पटाखों की आवाज़ से घबरा गई थी, मेरे पास चली आई। उस शांत पल में शायद उसे एहसास हो गया था कि मैं उसे सुरक्षित महसूस कराने की कोशिश कर रही हूं, और बदले में उसने मुझे ऐसा एहसास दिया जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।” बेजुबानों का डर समझने की अपील अभिनेत्री ने अपने संदेश में याद दिलाया कि जानवर भले ही इंसानों की तरह बोल नहीं सकते, लेकिन वे डर, भूख, दर्द और सुरक्षा जैसी भावनाओं को गहराई से महसूस करते हैं। त्योहारों के दौरान तेज संगीत और पटाखों का शोर उनके लिए उत्सव नहीं, बल्कि डर और बेचैनी का कारण बन सकता है। ‘अगर कोई डरी हुई जान मिले तो दयालु बनें’ शालिनी ने आगे लिखा, “हो सकता है उनके पास हमारी तरह शब्द न हों, लेकिन वे डर, भूख, दर्द, सुरक्षा और शायद प्यार को हमसे भी कहीं गहराई से समझते हैं। तो इस गणपति, अगर आपको कोई डरी हुई जान मिले, तो उसके प्रति दयालु बनें। उसकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें। अगर संभव हो, तो उसे थोड़ा सुरक्षित महसूस कराएं।” ‘प्यार के साथ जश्न मनाइए, शोर के साथ नहीं’ शालिनी ने अपने संदेश को एक बेहद सरल लेकिन असरदार अपील के साथ पूरा किया। उन्होंने लिखा, “प्यार के साथ जश्न मनाइए, शोर के साथ नहीं। कभी-कभी थोड़ी सी दयालुता बहुत बड़ा बदलाव ला सकती है। गणपति बप्पा मोरया।” उत्सव के बीच संवेदनशीलता का जरूरी संदेश शालिनी का संदेश बताता है कि उत्सव की खुशी तभी पूरी हो सकती है, जब हमारे आसपास मौजूद हर जीव खुद को सुरक्षित महसूस करे। थोड़ी-सी सावधानी, एक सुरक्षित कोना और करुणा भरा व्यवहार किसी डरे हुए जानवर के लिए बड़ी राहत बन सकता है। त्योहार की असली भावना—प्रेम और करुणा एक नन्ही बिल्ली के साथ हुई इस मुलाकात के जरिए शालिनी पांडे ने त्योहार की असली भावना को बेहद सहजता से सामने रखा है। उनका संदेश साफ है—आस्था और उत्सव का आनंद जरूर मनाएं, लेकिन ऐसा करते समय उन बेजुबान जीवों को न भूलें, जिनके लिए हमारा शोर डर में बदल सकता है।