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पटना। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद और आईआईटी खड़गपुर की संयुक्त टीम के निरीक्षण में दरभंगा की मिथिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड और पटना की हरिलाल वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड में बहिःस्राव उपचार संयंत्र संचालित नहीं मिलने तथा अनुपचारित बहिःस्राव बायपास कर बाहर छोड़े जाने का गंभीर मामला सामने आने के बाद दोनों इकाइयों को बंद करने की आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। 100 किलोलीटर प्रतिदिन से ज्यादा अपशिष्ट वाली इकाइयों पर नजर पर्षद के मीडिया कंस्लटेंट वीरेंद्र कुमार ने शुक्रवार को बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, दिल्ली की ओर से ऐसी औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण किया जाता है, जो 100 किलोलीटर प्रतिदिन से अधिक रासायनिक ऑक्सीजन डिमांड वाले बहिःस्राव का उत्सर्जन करती हैं अथवा परिसंकटमय पदार्थों का संचालन करती हैं। ऐसी इकाइयां प्रदूषणकारी उद्योगों की श्रेणी में आती हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की ओर से देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों के साथ मिलकर इनका निरीक्षण किया जाता है। इसी क्रम में बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद और आईआईटी खड़गपुर की संयुक्त टीम ने राज्य की कुछ इकाइयों की जांच की। मिथिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ में नहीं चल रहा था उपचार संयंत्र संयुक्त निरीक्षण में दरभंगा स्थित मेसर्स मिथिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड की इकाई में गंभीर अनियमितता सामने आई। निरीक्षण के दौरान इकाई का बहिःस्राव उपचार संयंत्र कार्य करता नहीं पाया गया। इतना ही नहीं, इकाई से निकलने वाला अनुपचारित बहिःस्राव बायपास कर सीधे बाहर छोड़ा जाता पाया गया। पर्षद ने इसे गंभीर श्रेणी का उल्लंघन बताया है। सहमति की शर्तों का भी उल्लंघन, बंद करने की कार्रवाई शुरू प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अनुसार, मिथिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ की इकाई में पाई गई स्थिति पर्षद की ओर से दी गई सहमति की शर्तों का गैर-अनुपालन है। इसके साथ ही इसे जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के प्रावधानों का उल्लंघन भी बताया गया है, जिससे पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इन अनियमितताओं के आधार पर पर्षद ने उपलब्ध शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए संबंधित प्रावधानों के तहत इकाई को बंद करने की आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। पटना में हरिलाल वेंचर्स की इकाई में भी मिली गंभीर खामी कार्रवाई सिर्फ दरभंगा तक सीमित नहीं है। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद और आईआईटी खड़गपुर की संयुक्त टीम ने पाटलिपुत्र औद्योगिक क्षेत्र, पटना स्थित मेसर्स हरिलाल वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड की इकाई का भी निरीक्षण किया। यहां भी बहिःस्राव उपचार संयंत्र संचालित नहीं पाया गया। इकाई से निकलने वाला अनुपचारित बहिःस्राव बायपास होता पाया गया , जिसे विक्षेपणी नाले में निस्तारित किया जा रहा था। हरिलाल वेंचर्स को भी बंद करने की कार्रवाई पर्षद ने हरिलाल वेंचर्स की इकाई में मिली स्थिति को भी गंभीर गैर-अनुपालन और नियमों का उल्लंघन माना है। इसके चलते जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत पर्षद को प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इस इकाई को भी बंद करने की आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।



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