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नई दिल्ली। पशुपालन एवं डेयरी विभाग का अधिकारी बनकर ऋण आवेदकों से रिश्वत वसूलने वाले एक कथित जालसाज को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने आगरा से गिरफ्तार किया है, जो लोन मंजूर कराने का झांसा देकर क्यूआर कोड के जरिए पैसे वसूलता था और जांच से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने व मोबाइल नंबर बदल रहा था। 22.50 लाख के ऋण पर मांगी थी दो प्रतिशत रिश्वत सीबीआई ने रविवार को बताया कि उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले में पोल्ट्री फार्म चलाने वाले एक व्यक्ति ने पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (एएचआईडीएफ) के तहत उद्यमी मित्र (सिडबी) पोर्टल के माध्यम से 22.50 लाख रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया था। आरोप है कि पकड़े गए व्यक्ति ने खुद को नई दिल्ली के कृषि भवन स्थित पशुपालन एवं डेयरी विभाग का अधिकारी बताया और शिकायतकर्ता से ऋण राशि का दो प्रतिशत यानी 45 हजार रुपये रिश्वत के रूप में मांगे। क्यूआर कोड भेजकर ली पांच हजार की पहली किस्त सीबीआई ने शिकायत मिलने के बाद 29 जून 2026 को मामला दर्ज कर जाल बिछाया। आरोपी ने शिकायतकर्ता के मोबाइल फोन पर क्यूआर कोड भेजकर रिश्वत की पहली किस्त के रूप में पांच हजार रुपये स्वीकार किए। क्यूआर कोड और बैंक खाते की जानकारी के आधार पर सीबीआई ने 30 जून को एक व्यक्ति को उसके घर से गिरफ्तार किया, लेकिन पूछताछ में सामने आया कि वह मुख्य आरोपी नहीं था। इसके बाद असली आरोपी फरार हो गया और लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा। आवेदकों की जानकारी लेकर रोज करता था फोन जांच में सीबीआई को पता चला कि आरोपी के पास एएचआईडीएफ के ऋण आवेदकों और उनके आवेदनों से जुड़ी गोपनीय जानकारियां थीं। वह प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों को फोन करता और आवेदन खारिज होने, दोबारा आवेदन जमा कराने या ऋण मंजूर कराने के नाम पर रिश्वत मांगता था। आरोपी खुद को एएचआईडीएफ का अधिकारी बताकर आवेदकों को उनके आवेदन की सटीक जानकारी देता था, जिससे लोग उसकी बातों पर भरोसा कर लेते थे। इसके बाद वह क्यूआर कोड के जरिए अलग-अलग बैंक खातों में पैसे मंगवाता और फिर यूपीआई के माध्यम से रकम दूसरे खातों में स्थानांतरित कर देता था। मोबाइल नंबर और ठिकाने बदलकर देता रहा चकमा फरार आरोपी को पकड़ने के लिए सीबीआई ने दिल्ली, आगरा और आसपास के इलाकों में लगातार छापेमारी की। जांच के दौरान कई मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल , संदिग्ध बैंक खातों और ऋण आवेदनों से जुड़े आईपी पते का विश्लेषण किया गया। इसके अलावा भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) , एएचआईडीएफ के अधिकारियों और कई ऋण आवेदकों से भी पूछताछ की गई। डिजिटल निगरानी में सामने आया कि आरोपी अलग-अलग मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर आगरा, जयपुर और दिल्ली में लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था। घर लौटते ही सीबीआई ने किया गिरफ्तार सीबीआई को 19 जुलाई को सूचना मिली कि आरोपी आगरा जिले की फतेहाबाद तहसील के छोटा पूठा बिसराना गांव स्थित अपने घर लौट आया है। इसके बाद टीम ने उसे वहीं से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को देहरादून की सक्षम अदालत में पेश किया जाएगा। उसके घर की तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। मामले की जांच अभी जारी है। जांच में उठे कई सवाल इस मामले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि आरोपी तक ऋण आवेदकों की गोपनीय जानकारी कैसे पहुंची। सीबीआई अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा कितने लोगों से इसी तरीके से रिश्वत वसूली गई।



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