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वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकारी आदेश के बाद गूगल मैप्स ने अमेरिका में अपने यूजर्स के लिए लेक ओंटारियो का नाम बदलकर 'लेक अमेरिका' कर दिया है वहीं कनाडा में गूगल मैप्स पर इसका नाम पहले की तरह लेक ओंटारियो ही दिखाई देगा जबकि अमेरिका और कनाडा के बाहर के यूजर्स को दोनों नाम एक साथ नजर आएंगे। सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर किया गया बदलाव https://truthsocial.com/@realDonaldTrump/posts/117185234758035541 श्री ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रूथ सोशल' पर 'द हिल' की रिपोर्ट को साझा किया है, जिसमें गूगल के एक बयान के हवाले से कहा गया है कि वह आधिकारिक सरकारी स्रोतों में होने वाले नाम परिवर्तन के अनुसार अपने मैप्स को अपडेट करता है। अमेरिका के लिए यह आधिकारिक स्रोत यू.एस. जियोग्राफिक नेम्स इन्फॉर्मेशन सिस्टम (जीएनआईएस) है। इसी आधार पर अमेरिकी यूजर्स के लिए नाम बदलकर 'लेक अमेरिका' किया गया है। ट्रंप ने कार्यकारी आदेश से बदला नाम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्यापारिक तनाव के बीच कार्यकारी आदेश जारी कर ग्रेट लेक का नाम बदलकर 'लेक अमेरिका' करने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा कि यह झील अमेरिका के प्राकृतिक संसाधनों और देश के शुरुआती आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। उनके अनुसार इस बदलाव का उद्देश्य इस महत्वपूर्ण आर्थिक संसाधन और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में इसके योगदान को सम्मान देना है। पहले भी बदल चुका है एक बड़ा नाम यह पहला मौका नहीं है जब ट्रंप के आदेश के बाद गूगल मैप्स ने किसी भौगोलिक स्थान का नाम बदला हो। इससे पहले गल्फ ऑफ मैक्सिको का नाम बदलकर 'गल्फ ऑफ अमेरिका' किए जाने के बाद भी गूगल ने अपने प्लेटफॉर्म पर बदलाव किया था। मेक्सिको ने जताई थी आपत्ति मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने कहा था कि नाम परिवर्तन केवल अमेरिकी महाद्वीपीय शेल्फ पर लागू हो सकता है और इसका संबंध मेक्सिको तथा क्यूबा के महाद्वीपीय क्षेत्रों से नहीं है। बाद में मेक्सिको सरकार ने मई 2025 में गूगल के खिलाफ मुकदमा भी दायर किया। कनाडा ने भी जताया विरोध ओंटारियो प्रांत के प्रीमियर डग फोर्ड ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह किसी व्यंग्य कार्यक्रम जैसा लगता है। उन्होंने कहा कि "कोई भी इसे 'लेक अमेरिका' नहीं कहेगा। यह सैकड़ों वर्षों से लेक ओंटारियो है और आगे भी इसी नाम से जाना जाएगा।" सेनेका नेशन ने राष्ट्रपति ट्रंप से यह आदेश वापस लेने की मांग की है। समुदाय के अध्यक्ष जे. कॉनराड सेनेका ने कहा कि यह नाम परिवर्तन 1794 की कैनान्डाइगुआ संधि की भावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति किसी राजनीतिक फैसले के जरिए उनकी संस्कृति या पहचान पर अधिकार नहीं जता सकते। कनाडाई प्रधानमंत्री का भी विरोध कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी नाम परिवर्तन का विरोध करते हुए कहा कि झील का मूल नाम 'ओन्टारी'इओ' वेंडाट समुदाय की भाषा से आया है, जिसका अर्थ है "झील सुंदर है, झील विशाल है।" उन्होंने इस ऐतिहासिक नाम और उसकी सांस्कृतिक विरासत पर जोर दिया।



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