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नई दिल्ली। महंगे कच्चे तेल, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कमजोर वैश्विक संकेतों और बैंकिंग-फाइनेंशियल शेयरों में बिकवाली के दबाव से शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में गिरावट रही जिससे सेंसेक्स 455.59 अंक की लुढ़ककर 78,499.17 और निफ्टी 65.35 अंक फिसलकर 24,570.65 अंक पर बंद हुआ। हालांकि, बाजार की तस्वीर पूरी तरह लाल नहीं रही। बीएसई पर गिरने वाले शेयरों के मुकाबले चढ़ने वाले शेयरों की संख्या ज्यादा रही। इससे संकेत मिला कि दबाव पूरे बाजार में एक समान नहीं था बल्कि कुछ बड़े और दिग्गज शेयरों की गिरावट ने प्रमुख सूचकांकों को नीचे खींचा। बाजार गिरा, फिर भी ज्यादा शेयरों में तेजी बीएसई पर कुल 4,474 शेयरों में कारोबार हुआ। इनमें 2,044 शेयर चढ़े जबकि 2,209 शेयरों में गिरावट रही और 221 शेयर बिना किसी बदलाव के कारोबार किया। दिलचस्प बात यह रही कि 115 शेयर 52 हफ्ते के उच्च स्तर पर पहुंच गए। दूसरी तरफ 110 शेयर लोअर सर्किट में फंसे जबकि 98 शेयरों में अपर सर्किट लगा। ये आंकड़े बताते हैं कि सेंसेक्स और निफ्टी भले ही लाल निशान में रहे, लेकिन पूरे बाजार में एकतरफा बिकवाली या भगदड़ जैसी स्थिति नहीं थी। आखिर क्यों गिरा शेयर बाजार कच्चा तेल 83 डॉलर के पार, बढ़ी बाजार की टेंशन बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंताओं में कच्चे तेल की तेजी रही। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर आशंकाओं के बीच ब्रेंट क्रूड 83 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमत बढ़ने से देश में महंगाई बढ़ने और सरकारी वित्तीय स्थिति पर दबाव पड़ने की चिंता पैदा होती है। इसी आशंका ने शेयर बाजार में निवेशकों का मूड कमजोर किया। बैंक और फाइनेंस शेयरों ने बढ़ाया दबाव बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में बिकवाली ने निफ्टी को नीचे खींचने में बड़ी भूमिका निभाई। एनबीएफसी की ओर से दी जाने वाली रिवॉल्विंग क्रेडिट फैसिलिटी के लिए आरबीआई के ज्यादा सख्त नियमों के प्रस्ताव के बाद इस सेक्टर को लेकर निवेशक सतर्क दिखाई दिए। इसका असर बड़े फाइनेंशियल शेयरों पर भी पड़ा। बजाज फाइनेंस और बजाज फिनसर्व जैसे दिग्गज शेयर निफ्टी के प्रमुख लूजर्स में शामिल हो गए। विदेश से भी बाजार को नहीं मिला सहारा ग्लोबल बाजारों का माहौल भी भारतीय शेयर बाजार का उत्साह बढ़ाने वाला नहीं रहा। वॉल स्ट्रीट कमजोर बंद हुआ, जबकि जापान के निक्केई समेत कई एशियाई बाजारों पर दबाव देखने को मिला। निवेशकों की नजर अमेरिका के नॉन-फार्म पेरोल्स आंकड़ों पर भी टिकी है। ये आंकड़े अमेरिका में ब्याज दरों की आगे की दिशा को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दे सकते हैं। मुनाफावसूली ने भी बढ़ाई मुश्किल निवेशक चुनिंदा शेयरों में मुनाफा निकालने के साथ अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करते दिखाई दिए। एसबीआई, टाइटन कंपनी और हिंडाल्को जैसी बड़ी कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजों से पहले भी बाजार में सतर्कता दिखाई दी। इसके अलावा नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन यानी सीएएस सिस्टम के मुताबिक संस्थागत निवेशकों के एडजस्टमेंट को भी बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की एक वजह बताया गया। गिरते बाजार में टीसीएस और एमएंडएम बने सहारा कमजोर बाजार के बावजूद कुछ दिग्गज शेयरों ने मजबूती दिखाई। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस, महिंद्रा एंड महिंद्रा यानी एमएंडएम और ग्रासिम इंडस्ट्रीज निफ्टी 50 के प्रमुख गेनर्स में रहे। आईटी और चुनिंदा ऑटो शेयरों में मजबूती ने बाजार को कुछ सहारा दिया। इन शेयरों की तेजी ने निफ्टी की गिरावट को और ज्यादा गहरा होने से रोकने में मदद की। बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व और ट्रेंट पर बड़ी मार दूसरी तरफ बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व और ट्रेंट लिमिटेड निफ्टी 50 के प्रमुख लूजर्स रहे। फाइनेंशियल और कंज्यूमर-केंद्रित शेयरों में बिकवाली ने प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ाया। खासकर महंगे कच्चे तेल, भू-राजनीतिक तनाव और वित्तीय क्षेत्र से जुड़ी नियामकीय चिंताओं का असर निवेशकों के जोखिम लेने के मूड पर दिखाई दिया। अब बाजार की अगली चाल किस पर निर्भर आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा तय करने के लिए निवेशकों की नजर सबसे पहले कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव पर रहने वाली है। इसके अलावा कंपनियों के तिमाही नतीजे, बैंकिंग सेक्टर की क्रेडिट ग्रोथ, इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी नीतियां और रिटेल निवेशकों की भागीदारी भी बाजार की अगली चाल के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।