Full Story
तेहरान। अमेरिका के नए आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाने के बाद ईरान के विदेश मंत्रालय ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इन्हें "आर्थिक आतंकवाद" और "मानवता के खिलाफ अपराध" करार दिया तथा कहा कि ये प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय कानून और ईरानी नागरिकों के बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन हैं लेकिन इनसे देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा का उसका संकल्प कमजोर नहीं होगा। https://en.mfa.ir/portal/newsview/792931 '73 साल की दुश्मनी का एक और सबूत' ईरान के विदेश मंत्रालय ने जारी बयान में कहा कि नए प्रतिबंध 19 अगस्त 1953 के तख्तापलट की बरसी के मौके पर लगाए गए हैं, जो यह दिखाता है कि अमेरिकी नीति-निर्माताओं की ईरान के प्रति दशकों पुरानी शत्रुतापूर्ण सोच आज भी कायम है। मंत्रालय ने आरोप लगाया कि अमेरिका की नीतियां कानून के शासन के बजाय दबाव, वर्चस्व और ताकत की राजनीति पर आधारित हैं। 'आर्थिक प्रतिबंध भी युद्ध का ही दूसरा रूप' ईरान ने कहा कि आर्थिक प्रतिबंध और सैन्य हमला एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। अमेरिका लंबे समय से युद्ध और आर्थिक दबाव दोनों का इस्तेमाल अपनी विदेश नीति के हथियार के रूप में करता रहा है, जिससे वैश्विक शांति और सुरक्षा पर खतरा बढ़ा है। बयान में कहा गया कि किसी भी देश की जनता के बुनियादी अधिकारों को निशाना बनाने वाले प्रतिबंध "आर्थिक आतंकवाद" की श्रेणी में आते हैं और इन्हें लागू करने वाले लोगों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। 'दबाव से नहीं झुकेगा ईरान' विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि पिछले डेढ़ वर्ष में अमेरिका और इजराइल के साथ हुए संघर्षों के बावजूद ईरान ने अपने राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया है। नए प्रतिबंध भी ईरानी जनता के इरादों को कमजोर नहीं कर पाएंगे। तेहरान ने कहा कि अमेरिका की यह नीति पहले भी असफल रही है और अब भी उसका परिणाम अलग नहीं होगा। प्रतिबंधों की पुनरावृत्ति केवल अमेरिका की पुरानी विफलताओं को दोहराएगी। अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ने का आरोप ईरान ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर का हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का मूल सिद्धांत है। ऐसे में दुनिया के उन देशों को अमेरिका की इस कथित गैरकानूनी और आक्रामक नीति के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक व्यवस्था में विश्वास रखते हैं। 'हर मोर्चे पर करेंगे मुकाबला' विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान अपनी सुरक्षा, राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अमेरिका और इजराइल की ओर से सैन्य, आर्थिक, राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक दबाव का हर स्तर पर जवाब दिया जाएगा। ईरान ने दावा किया कि पिछले सात दशकों में उसने बाहरी दबाव, सैन्य कार्रवाई और आर्थिक प्रतिबंधों का लगातार सामना किया है और उसी अनुभव के आधार पर आगे भी हर चुनौती का मुकाबला करेगा। 'इकोनॉमिक डी-डे' का ऐलान, ट्रंप बोले- ईरान की मदद करने वालों पर भी होगी कार्रवाई गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई का ऐलान करते हुए कहा कि अमेरिका अब सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि उसकी आर्थिक मदद करने वाले देशों, बैंकों, कंपनियों, एयरपोर्ट और सरकारी संस्थानों पर भी सख्त प्रतिबंध लगाएगा। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इसे ईरान के खिलाफ "सबसे कठोर आर्थिक अभियान" और "इकोनॉमिक डी-डे" बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान को समझौते के कई अवसर दिए, लेकिन तेहरान ने हर मौका गंवा दिया। अब वॉशिंगटन की रणनीति ईरान को आर्थिक रूप से पूरी दुनिया से अलग-थलग करने की होगी। दुनिया पर क्या होगा असर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। नए प्रतिबंधों और जवाबी कदमों से पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ सकती है। इसका असर वैश्विक तेल बाजार, कच्चे तेल की कीमतों, समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए भी यह घटनाक्रम अहम है क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता तनाव सीधे ईंधन की कीमतों और महंगाई को प्रभावित कर सकता है।



Comments
0