Full Story

मोतिहारी। नेपाल के देवघाट से गंडक नदी में पानी का प्रवाह घटने के बाद वाल्मीकिनगर गंडक बराज पर दबाव कम होने लगा है लेकिन बिहार में पश्चिम चंपारण जिले के बगहा में बाढ़ का संकट अभी टला नहीं है। शहर के कई मुहल्लों से लेकर दियारा क्षेत्र के गांवों तक पानी पहुंच चुका है। करीब 30 हजार की आबादी बाढ़ से प्रभावित बताई जा रही है। कई प्रमुख सड़कों पर तीन से छह फीट तक पानी बहने से आवागमन भी बाधित है। सोमवार अपराह्न तीन बजे वाल्मीकिनगर गंडक बराज से 3 लाख 80 हजार 400 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। बराज के अपस्ट्रीम में जलस्तर 362.50 फीट और डाउनस्ट्रीम में 360.60 फीट दर्ज किया गया। नेपाल में पानी के प्रवाह में कमी के बाद बराज पर दबाव घट रहा है, जिससे प्रशासन को तत्काल राहत की उम्मीद है। हालांकि, निचले इलाकों में जमा पानी और लगातार जारी डिस्चार्ज के कारण खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। भोर होते ही शहर में घुसा पानी बगहा शहर के मंगलपुर, कैलाश नगर, नरैनापुर और रत्नमाला समेत कई इलाकों में सोमवार की भोर से बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया। देखते ही देखते कई मोहल्ले जलमग्न हो गए और लोगों को आवागमन के लिए पानी के बीच से गुजरना पड़ा। बगहा-एक प्रखंड के करीब आधा दर्जन गांव भी बाढ़ की चपेट में हैं। गंडक पार के दियारा क्षेत्र की पंचायतों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण है। बाढ़ के पानी के बढ़ने के बाद कई परिवारों ने ऊंचे स्थानों पर शरण ली है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए घर से बाहर निकलना और आवश्यक सामान की व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है। सड़कें बनीं जलमार्ग, छह फीट तक पानी बाढ़ का असर सड़क संपर्क पर भी साफ दिखाई दे रहा है। बगहा-वाल्मीकिनगर मुख्य मार्ग पर मंगलपुर के पास करीब तीन फीट पानी बह रहा है। वहीं बगहा-लौरिया मार्ग पर रत्नमाला के पास करीब चार फीट पानी सड़क के ऊपर से बह रहा है।बिहार और उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मदनपुर-पनियहवा मार्ग पर हनुमानगढ़ी के बीच करीब छह फीट पानी जमा है। इससे इस मार्ग पर आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। जलस्तर और सड़क पर पानी की गहराई को देखते हुए लोगों के लिए आवाजाही जोखिमपूर्ण बनी हुई है। प्रशासन की निगरानी बढ़ी जल संसाधन विभाग और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी प्रभावित मोहल्लों और गांवों का लगातार जायजा ले रहे हैं। अधिकारियों की ओर से गंडक के जलस्तर और बराज से होने वाले डिस्चार्ज की लगातार निगरानी की जा रही है। बराज के ईएमसी और एमडब्ल्यूसी से पानी का डिस्चार्ज शून्य दर्ज किया गया है। नेपाल के देवघाट से पानी के प्रवाह में कमी को प्रशासन के लिए राहत का संकेत माना जा रहा है, लेकिन निचले इलाकों में पहले से जमा पानी के कारण बाढ़ का असर तत्काल खत्म होने की संभावना नहीं है। फिलहाल स्थिति का सबसे बड़ा विरोधाभास यही है कि नदी का जलस्तर और बराज का दबाव घट रहा है, लेकिन बगहा के घरों, गांवों और सड़कों में बाढ़ का पानी अभी भी मौजूद है। प्रशासन की निगाह अब इस बात पर है कि नेपाल से आने वाले पानी में कमी का असर निचले इलाकों तक कितनी तेजी से पहुंचता है।