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नई दिल्ली। ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुषों और महिलाओं दोनों की बेरोजगारी घटने तथा कामकाजी भागीदारी बढ़ने से अगस्त 2026 में देश की कुल बेरोजगारी दर 5.1 प्रतिशत से मामूली कम होकर 5 प्रतिशत रह गई जबकि श्रमबल भागीदारी दर बढ़कर 55.6 प्रतिशत और कार्यबल-जनसंख्या अनुपात 52.8 प्रतिशत पर पहुंच गया। आसान भाषा में पहले समझिए तीनों आंकड़ों का मतलब श्रम एवं रोजगार की स्थिति को तीन प्रमुख संकेतकों से समझा जाता है। श्रमबल भागीदारी दर यानी एलएफपीआर बताती है कि 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के कितने प्रतिशत लोग काम कर रहे हैं या काम की तलाश में हैं। कार्यबल-जनसंख्या अनुपात यानी डब्ल्यूपीआर से पता चलता है कि 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की कुल आबादी में कितने प्रतिशत लोग वास्तव में काम कर रहे हैं। बेरोजगारी दर यानी यूआर बताती है कि श्रमबल में शामिल कितने प्रतिशत लोगों को काम नहीं मिला है। श्रम बाजार में भागीदारी बढ़कर 55.6 प्रतिशत सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्‍वयन मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की कुल श्रमबल भागीदारी दर बढ़कर 55.6 प्रतिशत हो गई। जुलाई में यह 55.4 प्रतिशत थी। यह सुधार मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के कारण आया, जहां एलएफपीआर जुलाई के 58 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 58.2 प्रतिशत हो गई। शहरी क्षेत्रों में यह दर 50.4 प्रतिशत पर स्थिर रही। एक साल में भागीदारी 0.6 प्रतिशत अंक बढ़ी अगस्त 2025 में देश की कुल श्रमबल भागीदारी दर 55 प्रतिशत थी, जो अगस्त 2026 में 0.6 प्रतिशत अंक बढ़कर 55.6 प्रतिशत हो गई। ग्रामीण क्षेत्रों में सालाना आधार पर अधिक मजबूत सुधार दिखाई दिया। यहां एलएफपीआर 57 प्रतिशत से 1.2 प्रतिशत अंक बढ़कर 58.2 प्रतिशत हो गई। इसके विपरीत शहरी एलएफपीआर 50.9 प्रतिशत से 0.5 प्रतिशत अंक घटकर 50.4 प्रतिशत रह गई। महिलाओं की भागीदारी में गांवों ने लगाई छलांग महिलाओं की कुल श्रमबल भागीदारी दर जुलाई के 34.4 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 34.8 प्रतिशत हो गई। इसकी सबसे बड़ी वजह ग्रामीण महिलाओं की बढ़ती भागीदारी रही। ग्रामीण महिला एलएफपीआर एक महीने में 38.8 प्रतिशत से बढ़कर 39.4 प्रतिशत पर पहुंच गई। शहरी महिलाओं की भागीदारी लगभग स्थिर रही और यह 25.3 प्रतिशत से मामूली बढ़कर 25.4 प्रतिशत हुई। सालभर में ग्रामीण महिला भागीदारी 2 प्रतिशत बढ़ी अगस्त 2025 से अगस्त 2026 के बीच महिलाओं की कुल एलएफपीआर 33.7 प्रतिशत से बढ़कर 34.8 प्रतिशत हो गई। यानी एक साल में 1.1 प्रतिशत अंक का सुधार हुआ। ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी इस अवधि में 37.4 प्रतिशत से बढ़कर 39.4 प्रतिशत हो गई। यह पूरे 2 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी है। हालांकि, शहरी महिला एलएफपीआर सालाना आधार पर 26.1 प्रतिशत से 0.7 प्रतिशत अंक घटकर 25.4 प्रतिशत रह गई। काम करने वालों की हिस्सेदारी 52.8 प्रतिशत पर देश का कुल कार्यबल-जनसंख्या अनुपात जुलाई के 52.5 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 52.8 प्रतिशत हो गया। इसका मतलब है कि 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की कुल आबादी में काम करने वाले लोगों की हिस्सेदारी बढ़ी है। ग्रामीण डब्ल्यूपीआर 55.4 प्रतिशत से बढ़कर 55.8 प्रतिशत हो गया, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 47 प्रतिशत पर स्थिर रहा। ग्रामीण कार्यबल में सालाना 1.3 प्रतिशत अंक का सुधार अगस्त 2025 में कुल डब्ल्यूपीआर 52.2 प्रतिशत था, जो अगस्त 2026 में 0.6 प्रतिशत अंक बढ़कर 52.8 प्रतिशत हो गया। ग्रामीण डब्ल्यूपीआर एक साल में 54.5 प्रतिशत से 1.3 प्रतिशत अंक बढ़कर 55.8 प्रतिशत पर पहुंचा। दूसरी ओर, शहरी डब्ल्यूपीआर 47.5 प्रतिशत से घटकर 47 प्रतिशत रह गया। इन आंकड़ों से साफ है कि श्रम बाजार में अगस्त का सुधार मुख्य रूप से ग्रामीण भारत से आया, जबकि शहरी क्षेत्रों की स्थिति में खास बदलाव नहीं हुआ। ग्रामीण बेरोजगारी 4.5 से घटकर 4.1 प्रतिशत अगस्त में देश की कुल बेरोजगारी दर जुलाई के 5.1 प्रतिशत से मामूली घटकर 5 प्रतिशत रह गई। ग्रामीण बेरोजगारी में अपेक्षाकृत तेज गिरावट दर्ज की गई और यह 4.5 प्रतिशत से घटकर 4.1 प्रतिशत पर आ गई। शहरी बेरोजगारी दर में मामूली बढ़ोतरी हुई। यह जुलाई के 6.7 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 6.8 प्रतिशत दर्ज की गई। अगस्त 2025 की तुलना में कुल और शहरी बेरोजगारी दर लगभग स्थिर रही, जबकि ग्रामीण बेरोजगारी 4.3 प्रतिशत से 0.2 प्रतिशत अंक घटकर 4.1 प्रतिशत हो गई। पुरुष बेरोजगारी लगातार तीसरे महीने घटी 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के पुरुषों की कुल बेरोजगारी दर लगातार तीसरे महीने कम हुई। मई 2026 में यह 5.4 प्रतिशत थी, जो अगस्त में घटकर 4.9 प्रतिशत रह गई। ग्रामीण पुरुष बेरोजगारी जुलाई के 4.6 प्रतिशत से घटकर अगस्त में 4.3 प्रतिशत हो गई। हालांकि, शहरी पुरुष बेरोजगारी इसी अवधि में 5.9 प्रतिशत से बढ़कर 6.1 प्रतिशत पर पहुंच गई। ग्रामीण महिलाओं की बेरोजगारी 3.9 प्रतिशत महिलाओं की कुल बेरोजगारी दर लगातार दूसरे महीने घटते हुए अगस्त में 5.1 प्रतिशत रह गई। जून 2026 में यह 5.9 प्रतिशत थी।ग्रामीण महिलाओं की बेरोजगारी दर जुलाई के 4.3 प्रतिशत से घटकर अगस्त में 3.9 प्रतिशत पर आ गई। शहरी महिलाओं की बेरोजगारी दर पिछले महीने की तुलना में लगभग स्थिर रही। सालाना आधार पर अगस्त 2026 में पुरुषों और महिलाओं की कुल बेरोजगारी दर में कोई बड़ा बदलाव दर्ज नहीं किया गया। ग्रामीण सुधार के बीच शहरी रोजगार बना चुनौती अगस्त के आंकड़ों में ग्रामीण भारत ने तीनों प्रमुख मोर्चों पर बेहतर प्रदर्शन किया। यहां श्रमबल भागीदारी और काम करने वालों की हिस्सेदारी बढ़ी, जबकि बेरोजगारी दर घटी। शहरी क्षेत्रों में एलएफपीआर और डब्ल्यूपीआर मासिक आधार पर स्थिर रहे, लेकिन कुल शहरी बेरोजगारी 6.8 प्रतिशत और पुरुष बेरोजगारी 6.1 प्रतिशत हो गई। सालाना आधार पर शहरी श्रमबल और कार्यबल भागीदारी में भी गिरावट दर्ज की गई। पीएलएफएस का 17वां मासिक बुलेटिन ये आंकड़े सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी अगस्त 2026 के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण यानी पीएलएफएस के मासिक बुलेटिन में सामने आए हैं। जनवरी 2025 से सर्वेक्षण की पद्धति में बदलाव कर देश के लिए श्रम बाजार के मासिक और तिमाही अनुमान जारी किए जा रहे हैं। अगस्त 2026 का बुलेटिन इस शृंखला का 17वां मासिक संस्करण है। आंकड़े करेंट वीकली स्टेटस पद्धति पर आधारित हैं और 15 वर्ष तथा उससे अधिक आयु के लोगों की स्थिति बताते हैं। अगस्त की तस्वीर में राहत गांवों से आई है, लेकिन शहरी श्रम बाजार में भागीदारी और रोजगार को गति देना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।