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नई दिल्ली। संसद के माॅनसून सत्र के पहले दिन सोमवार को नीट-यूजी पेपर लीक, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर विपक्षी सांसदों के हंगामे और प्रदर्शन के चलते लगातार व्यवधान होने से लोकसभा और राज्यसभा में प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं चल सके और कोई विधायी कामकाज नहीं हो पाया। लोकसभा में तख्तियां लेकर वेल में पहुंचे विपक्षी सांसद लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद नीट-यूजी पेपर लीक और चढ़ावा चोरी से जुड़े मुद्दों की तख्तियां लेकर सदन के बीच में आ गए। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सांसदों से अपनी सीटों पर लौटने और सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है और इसकी गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है। बावजूद इसके हंगामा जारी रहा, जिसके चलते कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। सरकार ने चर्चा की जताई तैयारी, विपक्ष नहीं माना दोपहर बाद भी स्थिति नहीं बदली। पीठासीन अधिकारियों ने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और असम एवं अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा होनी चाहिए। हालांकि विपक्ष शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ा रहा और नारेबाजी जारी रखी। लगातार गतिरोध के कारण लोकसभा में पूरे दिन कोई विधायी कार्य नहीं हो सका। राज्यसभा में भी पेपर लीक पर हंगामा राज्यसभा में कार्यवाही की शुरुआत नवनिर्वाचित सदस्यों के शपथ ग्रहण और दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। इसके बाद विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने नीट-यूजी पेपर लीक का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा मामला है। उन्होंने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और कथित लाठीचार्ज का भी मुद्दा उठाया। इसके बाद विपक्षी सदस्य नारेबाजी करने लगे और सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित होती रही। बार-बार स्थगन के बाद पूरे दिन नहीं चला सदन राज्यसभा में सभापति और उपसभापति ने कई बार सदस्यों से सदन की मर्यादा बनाए रखने और अपनी सीटों पर लौटने की अपील की लेकिन विपक्षी सांसदों का विरोध जारी रहा। आखिरकार लगातार हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही भी पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। पहले ही दिन नहीं हो सका कोई विधायी काम माॅनसून सत्र के पहले दिन लोकसभा और राज्यसभा दोनों में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच गतिरोध बना रहा। नतीजतन किसी भी सदन में प्रश्नकाल, शून्यकाल या विधायी कार्य नहीं हो सका और संसद का पहला दिन पूरी तरह हंगामे की भेंट चढ़ गया।



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