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नई दिल्ली। राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के अपमान को दंडनीय अपराध के दायरे में लाने संबंधी राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 गुरुवार को लोकसभा से पारित हो गया। इससे पहले यह विधेयक बुधवार को राज्यसभा से भी पारित हो चुका था। दोनों सदनों से मंजूरी मिलने के साथ ही राष्ट्रगीत को राष्ट्रगान के समान कानूनी संरक्षण प्रदान करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। हंगामे के बीच लोकसभा ने ध्वनिमत से दी मंजूरी लोकसभा की कार्यवाही तीन बार स्थगित होने के बाद अपराह्न साढ़े तीन बजे पुनः आरंभ हुई। विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच पीठासीन अधिकारी संध्या राय ने राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 को सदन के समक्ष विचार एवं पारित करने के लिए पेश किया। संक्षिप्त चर्चा के बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को पारित कर दिया। द्रमुक ने विधेयक का किया विरोध चर्चा के दौरान द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की सदस्य के. कनिमोझी ने विधेयक का विरोध करते हुए इसे संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रतिकूल बताया। उन्होंने कहा कि इस विषय पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए थी तथा सरकार इस विधेयक के माध्यम से देश में ध्रुवीकरण का प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह कदम तमिल समाज की भावनाओं को आहत करने वाला है। भाजपा ने बताया संविधान सभा की भावना के अनुरूप कदम भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद संबित पात्रा ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य 'वंदे मातरम्' को विधिक संरक्षण प्रदान करना है ताकि राष्ट्रगीत के सम्मान को सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि संविधान सभा के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने वर्ष 1950 में स्पष्ट किया था कि 'जन गण मन' और 'वंदे मातरम्' दोनों को समान सम्मान प्राप्त होगा। यह संशोधन उसी संवैधानिक भावना को विधिक स्वरूप प्रदान करता है। सरकार ने बताया राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा विषय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विधेयक पर चर्चा का उत्तर देते हुए कहा कि यह संशोधन केवल एक विधायी परिवर्तन नहीं बल्कि भारत की राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1971 के राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम के तहत राष्ट्रगान को जो संरक्षण प्राप्त है, उसी प्रकार का संरक्षण अब राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' को भी प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संविधान सभा में डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा व्यक्त भावना को यह संशोधन विधिक आधार प्रदान करता है। क्या है वर्तमान कानून और नया संशोधन राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान के अपमान को दंडनीय अपराध माना गया है। इसके अलावा राष्ट्रगान के गायन में जानबूझकर बाधा उत्पन्न करना या उसके सम्मान में व्यवधान डालना भी कानून के तहत अपराध है, जिसके लिए तीन वर्ष तक के कारावास, जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है।संशोधन विधेयक के पारित होने के बाद 'वंदे मातरम्' के अपमान को भी इसी अधिनियम के दायरे में शामिल किया जाएगा और उसके लिए भी समान दंडात्मक प्रावधान लागू होंगे। दोनों सदनों से मंजूरी, कानून बनने का मार्ग प्रशस्त लोकसभा से पारित होने के साथ ही यह विधेयक संसद के दोनों सदनों से स्वीकृत हो चुका है। अब आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह संशोधन कानून का रूप लेगा, जिसके बाद 'वंदे मातरम्' को भी राष्ट्रगान के समान विधिक संरक्षण प्राप्त हो जाएगा।



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