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धनबाद/नई दिल्ली। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की झारखंड की धनबाद शाखा में 1.25 करोड़ रुपये की हेराफेरी के करीब 21 साल पुराने मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने लंबे समय से फरार और घोषित अपराधी बृजभूषण प्रसाद तथा करतार सिंह को महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से गिरफ्तार किया है। एसबीआई की धनबाद शाखा से हुई थी करोड़ों की हेराफेरी सीबीआई ने सोमवार को बताया कि मामला एसबीआई की धनबाद मुख्य शाखा में हुए एक करोड़ 25 लाख 47 हजार 950 रुपये के गबन से जुड़ा है। यह कथित वित्तीय अनियमितता नवंबर 2002 से जून 2005 के बीच की गई थी। बैंक के धन के दुरुपयोग और हेराफेरी की शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने 31 अगस्त 2005 को मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान एजेंसी को पता चला कि इस मामले में बृजभूषण प्रसाद और करतार सिंह की भूमिका संदिग्ध है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, दोनों आरोपी गिरफ्तारी के डर से फरार हो गए। जांच शुरू होते ही नेपाल भाग गए थे आरोपी सीबीआई की जांच में सामने आया कि दोनों आरोपी भारत छोड़कर नेपाल चले गए। लंबे समय तक गिरफ्तारी से बचने के कारण अदालत ने उन्हें घोषित अपराधी (प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर) घोषित कर दिया था। इतना ही नहीं, उनकी तलाश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया था। दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना देने वालों के लिए 25-25 हजार रुपये के नकद इनाम की भी घोषणा की गई थी लेकिन वे वर्षों तक कानून की पकड़ से बाहर रहे। फर्जी पहचान बनाकर रह रहे थे सीबीआई के मुताबिक दोनों आरोपी पिछले कई वर्षों से अपनी असली पहचान छुपाकर रह रहे थे। वे लगातार अपने ठिकाने बदलते रहे ताकि जांच एजेंसियां उनका पता न लगा सकें। हालांकि तकनीकी निगरानी, खुफिया सूचनाओं और लगातार की गई पड़ताल के जरिए सीबीआई उनकी गतिविधियों तक पहुंचने में सफल रही। एक साथ चला ऑपरेशन, दो राज्यों से गिरफ्तारी सीबीआई ने 21 जून 2026 को एक अभियान चलाया। इस दौरान बृजभूषण प्रसाद को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के कोपरगांव से गिरफ्तार किया गया जबकि करतार सिंह को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से दबोचा गया। जांच एजेंसी का कहना है कि दोनों आरोपी करीब दो दशकों से फरार थे और कानून से बचने के लिए अलग-अलग नामों और पहचान का इस्तेमाल कर रहे थे। अदालत में पेशी, आगे होगी कानूनी कार्रवाई गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को सक्षम अदालत में पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सीबीआई अब मामले से जुड़े अन्य पहलुओं और वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर सकती है। अदालत के निर्देशों के अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



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