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नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के अध्यक्ष लोखंडे प्रशांत सीताराम का गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के पद पर तबादला कर दिया गया है जबकि स्थायी नियुक्ति होने तक वह सीबीएसई अध्यक्ष का अतिरिक्त कार्यभार भी संभालते रहेंगे। सीबीएसई में फिर बड़ा बदलाव देश के सबसे बड़े स्कूली शिक्षा बोर्ड सीबीएसई में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। बोर्ड के अध्यक्ष लोखंडे प्रशांत सीताराम का तबादला गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के पद पर कर दिया गया है। इस तबादले को मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने मंजूरी दे दी है। खास बात यह है कि सीताराम को पिछले महीने ही सीबीएसई का अध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन अब उन्हें केंद्र सरकार ने नई जिम्मेदारी सौंप दी है। फिलहाल सीबीएसई की जिम्मेदारी भी उन्हीं के पास सरकारी आदेश में साफ किया गया है कि सीबीएसई में स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति होने तक लोखंडे प्रशांत सीताराम बोर्ड के अध्यक्ष का अतिरिक्त कार्यभार संभालते रहेंगे । यानी गृह मंत्रालय में नई पोस्टिंग मिलने के बावजूद फिलहाल सीबीएसई की कमान भी उनके पास ही रहेगी। इससे साफ है कि सरकार अभी बोर्ड में पूरी तरह नया चेहरा लाने के बजाय अंतरिम व्यवस्था बनाए रखना चाहती है। पिछले महीने ही बने थे सीबीएसई चेयरमैन एजीएमयूटी कैडर के 2001 बैच के आईएएस अधिकारी लोखंडे प्रशांत सीताराम को पिछले महीने ही सीबीएसई का अध्यक्ष बनाया गया था। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई थी, जब बोर्ड पहले से ही एक बड़े विवाद और प्रशासनिक हलचल के दौर से गुजर रहा था। ऐसे में उनकी एंट्री को सीबीएसई में व्यवस्था संभालने और विवादों पर नियंत्रण की कोशिश के तौर पर देखा गया था। ओएसएम विवाद के बाद हुआ था यह बड़ा बदलाव सीबीएसई में यह फेरबदल अचानक नहीं हुआ था। इसके पीछे बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में अपनाई गई ओएसएम यानी ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को लेकर उठा विवाद बड़ी वजह बना। इस प्रणाली को लेकर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा जगत के भीतर कई सवाल उठे थे। कॉपियों के मूल्यांकन की प्रक्रिया को लेकर असंतोष और भ्रम की स्थिति बनी थी। इसी विवाद के बाद पिछले महीने तत्कालीन सीबीएसई अध्यक्ष राहुल सिंह की जगह लोखंडे प्रशांत सीताराम को नया अध्यक्ष बनाया गया था। यानी उनकी नियुक्ति सीधे तौर पर उस विवाद के बाद हुए बड़े प्रशासनिक हस्तक्षेप का हिस्सा थी। सीबीएसई सचिव हिमांशु गुप्ता को भी हटाया गया था सीबीएसई में बदलाव सिर्फ अध्यक्ष तक सीमित नहीं रहा था। उसी दौरान सीबीएसई के सचिव हिमांशु गुप्ता को भी पद से हटा दिया गया था। इससे यह संकेत मिला था कि केंद्र सरकार बोर्ड के कामकाज, परीक्षा प्रबंधन और मूल्यांकन व्यवस्था को लेकर गंभीर है और शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय करना चाहती है। यानी पिछले कुछ हफ्तों में सीबीएसई के भीतर जो घटनाक्रम हुए, उनमें ओएसएम विवाद , राहुल सिंह की विदाई , हिमांशु गुप्ता को हटाया जाना और फिर लोखंडे प्रशांत सीताराम की नियुक्ति — ये सब एक ही प्रशासनिक सिलसिले का हिस्सा रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल— सीबीएसई का स्थायी अध्यक्ष कौन होगा लोखंडे प्रशांत सीताराम के गृह मंत्रालय में तबादले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सीबीएसई का स्थायी अध्यक्ष कौन बनेगा । चूंकि आदेश में साफ कहा गया है कि वह केवल स्थायी नियुक्ति होने तक अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे इसलिए माना जा रहा है कि आने वाले समय में सरकार बोर्ड के लिए नए स्थायी अध्यक्ष की घोषणा कर सकती है। यह फैसला इसलिए भी अहम होगा, क्योंकि सीबीएसई सिर्फ बोर्ड परीक्षा कराने वाली संस्था नहीं है बल्कि करोड़ों छात्रों, लाखों शिक्षकों और हजारों स्कूलों से जुड़ी देश की सबसे महत्वपूर्ण शैक्षिक संस्थाओं में से एक है। क्यों अहम है यह पूरा मामला यह मामला सिर्फ एक तबादले की खबर नहीं है बल्कि सीबीएसई में पिछले कुछ समय से चल रहे प्रशासनिक बदलावों और परीक्षा प्रबंधन से जुड़े विवादों की अगली कड़ी है। ओएसएम विवाद के बाद बोर्ड की साख, मूल्यांकन व्यवस्था और प्रशासनिक फैसलों पर सवाल उठे थे। ऐसे में अध्यक्ष बदलना, सचिव हटना और फिर नए अध्यक्ष का जल्दी गृह मंत्रालय भेजा जाना इस बात का संकेत है कि सीबीएसई अभी भी एक संक्रमणकाल से गुजर रहा है। सीधे शब्दों में कहें तो सीबीएसई में नेतृत्व स्तर पर हलचल अभी थमी नहीं है । फिलहाल लोखंडे प्रशांत सीताराम दोहरी भूमिका में रहेंगे लेकिन बोर्ड की स्थायी कमान किसे मिलती है, इस पर अब सबकी नजर रहेगी।



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