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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (उच्चतम न्यायालय) ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार से भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए स्थायी और संस्थागत सुधारों का विस्तृत खाका पेश करने को कहा जबकि केंद्र ने अदालत को भरोसा दिलाया कि छात्रों के हितों की रक्षा के लिए सरकार "10 कदम आगे बढ़कर" काम कर रही है और इस संबंध में 27 जुलाई तक विस्तृत हलफनामा दाखिल करेगी। किन याचिकाओं पर सुनवाई हुई न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (एफएआईएमए) , यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (यूडीएफ) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह , सामाजिक कार्यकर्ता अनुभव गर्ग, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता ध्रुव चौहान तथा राजनीतिक नेता हरिशरण देवगन समेत कई याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं पर शुक्रवार को सुनवाई कर रही थी। इन याचिकाओं में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के पुनर्गठन या उसके स्थान पर नई स्वतंत्र परीक्षा एजेंसी बनाने, नीट परीक्षा को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) में बदलने, प्रश्नपत्रों की डिजिटल लॉकिंग और परीक्षा केंद्रवार परिणाम सार्वजनिक करने जैसी मांगें की गई हैं। सुप्रीम कोर्ट बोला- अब स्थायी व्यवस्था जरूरी सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि हर बार तदर्थ व्यवस्था अपनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। अब परीक्षा प्रणाली में स्थायी सुधार जरूरी हैं ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके। कोर्ट ने कहा कि वह इस पूरे मामले की पूरे साल निगरानी करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि सुधार केवल कागजों तक सीमित न रहें। केंद्र ने कहा- छात्रों के लिए '10 कदम आगे' बढ़कर काम कर रहे हैं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा, "सरकार छात्रों के हितों की रक्षा के लिए 10 कदम आगे बढ़कर काम कर रही है। पूरी प्रक्रिया सर्वोच्च स्तर की निगरानी में चल रही है और छात्रों के हित सर्वोपरि हैं।" प्रिंटिंग प्रेस से परीक्षा केंद्र तक बताएगा पूरा सिस्टम केंद्र सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि 27 जुलाई तक दाखिल किए जाने वाले हलफनामे में प्रश्नपत्र की छपाई से लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की पूरी सुरक्षा प्रक्रिया और भविष्य में किए जाने वाले सुधारों का विस्तृत ब्यौरा दिया जाएगा। सीबीटी और साइबर सुरक्षा पर मांगी रिपोर्ट अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या नीट को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) बनाया जा सकता है। अदालत ने डेटा ट्रांसफर, साइबर सुरक्षा, डिजिटल सुरक्षा और परीक्षा प्रणाली को तकनीकी रूप से सुरक्षित बनाने की योजना पर भी विस्तृत जानकारी मांगी है। राधाकृष्णन समिति की सिफारिशें लागू सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि 2024 के नीट विवाद के बाद गठित राधाकृष्णन समिति की सभी सिफारिशों को सरकार ने स्वीकार कर लिया है और उन पर अमल किया जा रहा है। 27 जुलाई को फिर होगी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को 27 जुलाई तक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद अदालत भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए सरकार की कार्ययोजना और प्रस्तावित सुधारों की समीक्षा करेगी।



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