Full Story
नई दिल्ली। संभावित अल नीनो और सामान्य से कम मानसून की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार के अलर्ट मोड के बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों के हित सर्वोपरि हैं और मौसम की किसी भी चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। श्री चौहान ने यहां आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मानसून की स्थिति, जल उपलब्धता, बीज भंडारण, फसल रणनीति और राज्यों की तैयारियों की समीक्षा के बाद स्पष्ट कहा कि यदि मौसम प्रतिकूल भी रहा तो उसका असर खेत और किसान पर न्यूनतम रखने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। मौसम की चुनौती, तैयारी पूरी भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 2026 में सामान्य से कम मानसून और अल नीनो की संभावना जताई है। हालांकि श्री चौहान ने भरोसा दिलाया कि आधुनिक कृषि तकनीकों, बेहतर सिंचाई व्यवस्था और वैज्ञानिक प्रबंधन के जरिए हालात को प्रभावी ढंग से संभाला जा सकेगा। जलाशयों में पर्याप्त पानी, किसानों को राहत बैठक में बताया गया कि देश के प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण सामान्य से बेहतर स्थिति में है। वर्तमान भंडारण औसत स्तर से करीब 127 प्रतिशत अधिक है, जो खरीफ सीजन में सिंचाई की जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित होगा। कम बारिश वाले क्षेत्रों पर विशेष निगरानी मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन राज्यों और जिलों में कम वर्षा या लंबे ड्राई स्पेल की आशंका है, वहां विशेष निगरानी रखी जाए। उन्होंने कहा कि कंटिन्जेंसी प्लान सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनका असर खेतों में दिखना चाहिए। वैकल्पिक फसल और बीज की पूरी व्यवस्था सरकार ने जरूरत पड़ने पर किसानों को वैकल्पिक फसलें, कम अवधि वाली किस्में और सूखा-सहनशील बीज उपलब्ध कराने की तैयारी की है। खरीफ और रबी दोनों सीजन के लिए पर्याप्त बीज उपलब्ध हैं, जबकि आपात स्थिति के लिए राष्ट्रीय बीज रिजर्व भी तैयार रखा गया है। मोबाइल पर मिलेगी खेती की हर जरूरी जानकारी सरकार किसानों तक मौसम, रोग-कीट प्रबंधन और फसल संबंधी सलाह सीधे मोबाइल संदेशों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए पहुंचाने की व्यवस्था को और मजबूत करेगी। साथ ही जल संरक्षण, खेत-तालाब और नमी संरक्षण के उपायों पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। किसानों को निश्चिंत रहने की सलाह श्री चौहान ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल जोखिम का आकलन करना नहीं बल्कि समय रहते ऐसे कदम उठाना है, जिससे खेती प्रभावित न हो और किसानों का आत्मविश्वास बना रहे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से अल नीनो जैसी संभावित चुनौतियों का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकेगा।



Comments
0