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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज कोचिंग सेंटर अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा रुख इख्तियार करते हुए मामले में चार आरोपियों की गिरफ्तारी, चार अधिकारियों के निलंबन और पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी (विशेष जांच दल) गठन के निर्देश दिए हैं। मंच से मिली सूचना, तुरंत रद्द कर दिए कार्यक्रम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे तभी उन्हें अलीगंज अग्निकांड की जानकारी मिली। घटना की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने अपने सभी कार्यक्रम तत्काल रद्द कर दिए और लखनऊ के लिए रवाना हो गए। इससे पहले उन्होंने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर भेजकर राहत एवं बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए। घटनास्थल और अस्पताल पहुंचकर लिया हालात का जायजा लखनऊ पहुंचते ही मुख्यमंत्री सीधे अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित हादसा स्थल पहुंचे और राहत कार्यों की समीक्षा की। इसके बाद उन्होंने केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर घायलों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों को घायलों के बेहतर इलाज और हर संभव चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मृतकों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता का ऐलान मुख्यमंत्री ने हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। वहीं घायलों को 50-50 हजार रुपये की मदद देने का भी फैसला लिया गया है। एसआईटी करेगी पूरे मामले की जांच मुख्यमंत्री आवास 5, कालीदास मार्ग पर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में पूरे मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय एसआईटी गठित करने का निर्णय लिया गया। एसीएस अमृत अभिजात और एडीजी प्रवीण कुमार के नेतृत्व में गठित एसआईटी को सात दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। जांच में जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित विभागों की भूमिका भी तय की जाएगी। चार आरोपी गिरफ्तार, चार अफसरों पर गिरी गाज पुलिस ने मामले में रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, तूशॉक कृष्णा जायसवाल और सुरेश कुमार साहू को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, मुख्यमंत्री के निर्देश पर बिजली विभाग के एक्सईएन गौरव कुमार, एफएसएसओ कमलेंद्र कुमार सिंह, लविप्र के सहायक अभियंता अनिल कुमार और जेई प्रमोद पांडे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। पुराने निर्माण विवाद और एनओसी की भी होगी जांच जांच में यह भी सामने आया है कि जिस भवन में आग लगी, उसका आवंटन वर्ष 1980 में हुआ था। बाद में यह भवन वीरेंद्र और सुरेंद्र शुक्ला के नाम दर्ज हुआ। वर्ष 2016 में एलडीए ने अनधिकृत निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था लेकिन कुछ ही महीनों बाद यह आदेश निरस्त कर दिया गया। एसआईटी अब ध्वस्तीकरण आदेश रद्द होने, फायर एनओसी जारी करने, एलडीए और बिजली विभाग की भूमिका सहित कई महत्वपूर्ण पहलुओं की गहन जांच करेगी। माना जा रहा है कि जांच का दायरा बड़े अधिकारियों तक भी पहुंच सकता है। 15 लोगों की मौत से मचा था हड़कंप गौरतलब है कि सोमवार को अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित एक कोचिंग सेंटर में भीषण आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 9 लोग घायल हुए थे। मामले में थाना अलीगंज में छह नामजद समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की अलग-अलग धाराओं और अग्निशमन सेवा अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।