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लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की आहट के बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने एक बार फिर अपने पुराने और सफल सामाजिक समीकरण को साधने की कोशिश तेज करते हुए आज दावा किया कि ब्राह्मण समाज समेत सवर्ण वर्ग के लोगों का रुझान तेजी से बसपा की ओर बढ़ रहा है और इसी को ध्यान में रखते हुए उन्हें चुनावी मैदान में उतारने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। बसपा का मानना है कि वर्ष 2007 में जिस सामाजिक गठजोड़ ने उसे पूर्ण बहुमत की सरकार तक पहुंचाया था, उसी मॉडल को नए सिरे से मजबूत कर आगामी विधानसभा चुनाव में राजनीतिक वापसी की जमीन तैयार की जा रही है। ब्राह्मण समाज को साधने की कोशिश तेज बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी पोस्ट में कहा, “ब्राह्मण समाज का एक बड़ा वर्ग खुद को अन्य दलों में उपेक्षित और असुरक्षित महसूस कर रहा है जबकि बसपा ने हमेशा उन्हें सम्मान और राजनीतिक भागीदारी दी है। इसी वजह से बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज के लोग बसपा से जुड़ने की तैयारी कर रहे हैं।” उन्होंने दावा किया कि पार्टी नेतृत्व पर ब्राह्मण समाज का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है और सरकार बनने पर उन्हें पहले की तरह सम्मान और प्रतिनिधित्व मिलने की उम्मीद है। 'जिसकी जितनी तैयारी, उसकी उतनी भागीदारी' सुश्री मायावती ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि केवल ब्राह्मण ही नहीं बल्कि क्षत्रिय, वैश्य और अन्य सवर्ण समुदायों को भी उनकी राजनीतिक सक्रियता और संगठनात्मक तैयारी के आधार पर चुनाव में भागीदारी दी जाएगी। उन्होने कहा कि उम्मीदवार चयन में सामाजिक संतुलन और विभिन्न वर्गों की भागीदारी को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए संगठन स्तर पर लगातार तैयारी की जा रही है। 2007 की याद दिलाने की कोशिश राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बसपा अपने उस सामाजिक इंजीनियरिंग मॉडल को फिर से जीवित करने की कोशिश कर रही है, जिसने साल 2007 में दलित-ब्राह्मण गठजोड़ के सहारे उसे ऐतिहासिक जीत दिलाई थी। हालांकि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियां 2007 से काफी अलग हैं, लेकिन पार्टी का मानना है कि सामाजिक समीकरणों के सहारे वह फिर से मजबूत चुनौती पेश कर सकती है। विरोधी दलों पर साधा निशाना बसपा सुप्रीमो ने समाजवादी पार्टी समेत अन्य राजनीतिक दलों पर भी निशाना साधा और आरोप लगाते हुए कहा कि कि दूसरी पार्टियां सीमित वर्गों की राजनीति करती हैं जबकि बसपा 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' के सिद्धांत पर काम करती है। उन्होंने दावा किया कि उसकी नीतियां केवल चुनावी वादों तक सीमित नहीं हैं बल्कि कानून-व्यवस्था, सामाजिक न्याय और जनकल्याण को केंद्र में रखकर तैयार की जाती हैं।



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