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रांची। भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में आंदोलनरत जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म फोरम के बैनर तले छात्रों ने रविवार को झारखंड के विभिन्न जिला मुख्यालयों पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव के पुतले फूंकते हुए जेएसएससी सीजीएल एवं जेपीएससी परीक्षाएं रद्द करने तथा मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग दोहराई। राजधानी रांची में प्रदर्शनकारियों ने अल्बर्ट एक्का चौक पर तीनों नेताओं के पुतले जलाए और राज्य सरकार तथा सत्तारूढ़ गठबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। छात्रों का आरोप है कि कई दौर की बातचीत के बावजूद सरकार ने उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की। परीक्षा रद्द करो, सीबीआई जांच कराओ फोरम की मुख्य मांग है कि कथित गड़बड़ियों से प्रभावित झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) सीजीएल परीक्षा और झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की संबंधित परीक्षाओं को रद्द किया जाए। प्रदर्शनकारी पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई से जांच कराने की मांग भी कर रहे हैं। छात्रों ने चेतावनी दी है कि अगर परीक्षाएं रद्द नहीं की गईं तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पद से इस्तीफा देना चाहिए। अब मुख्यमंत्री आवास घेरने की तैयारी पुतला दहन कार्यक्रम आंदोलन की नई रणनीति का हिस्सा था। फोरम ने शनिवार रात इसकी घोषणा की थी। इससे पहले स्वतंत्रता दिवस पर रांची में तिरंगा यात्रा निकाली गई थी। फोरम ने सरकार को 18 अगस्त तक का समय दिया है। मांगें नहीं मानी गईं तो 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। इसके लिए राज्यभर के छात्रों और युवाओं से रांची पहुंचने की अपील की गई है। तीन सप्ताह से जारी है आंदोलन भर्ती परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने की मांग को लेकर यह आंदोलन तीन सप्ताह से अधिक समय से चल रहा है। कई छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं। आंदोलन के दौरान कुछ छात्रों की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। छात्रों का आरोप—बातचीत हुई, समाधान नहीं प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार और उसके सहयोगी दलों ने कई बार बातचीत तो की लेकिन परीक्षा रद्द करने, जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई जैसे मुद्दों पर कोई स्पष्ट फैसला नहीं लिया। छात्रों का दावा है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता नहीं होने से हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उनकी मांग है कि कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।



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