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मोतिहारी। नेपाल और उत्तर बिहार के जलग्रहण क्षेत्रों से लगातार बढ़ रहे जलप्रवाह के बीच गंडक नदी का रौद्र रूप रविवार को और गहरा गया। वाल्मीकिनगर गंडक बराज पर जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने के साथ शाम तक नदी में 5,01,650 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया। बढ़े जलदबाव के कारण गंडक के दोनों तटबंधों पर दबाव की स्थिति बनी हुई है। खतरे के निशान से 5.60 फीट ऊपर पहुंचा जलस्तर गंडक बराज, वाल्मीकिनगर से रविवार शाम छह बजे प्राप्त आंकड़ों के अनुसार बराज के अपस्ट्रीम में जलस्तर 364.30 फीट दर्ज किया गया, जबकि खतरे का स्तर 358.70 फीट निर्धारित है। यानी जलस्तर खतरे के निशान से करीब 5.60 फीट ऊपर पहुंच गया है। इसी समय अपस्ट्रीम डिस्चार्ज बढ़कर 5,01,650 क्यूसेक हो गया। डाउनस्ट्रीम जलस्तर 362.70 फीट तथा डाउनस्ट्रीम डिस्चार्ज भी 5,01,650 क्यूसेक दर्ज किया गया। इससे महज एक घंटे पहले शाम पांच बजे बराज के अपस्ट्रीम में जलस्तर 364.10 फीट और डिस्चार्ज 4,79,100 क्यूसेक था। एक घंटे में डिस्चार्ज में करीब 22,550 क्यूसेक की वृद्धि दर्ज की गई। दिन में सुबह आठ बजे बराज पर 4.04 लाख क्यूसेक प्रवाह दर्ज होने की रिपोर्ट भी सामने आई थी, जिससे दिनभर जलप्रवाह बढ़ने की तस्वीर स्पष्ट होती है। देवघाट में भी छह लाख क्यूसेक से अधिक का प्रवाह नेपाल के देवघाट में भी गंडक का जलप्रवाह ऊंचे स्तर पर बना रहा। शाम 4.05 बजे वहां जलस्तर 11.65 दर्ज किया गया, जिसके अनुरूप गणना किया गया डिस्चार्ज करीब 6,52,000 क्यूसेक था। शाम 5.35 बजे जलस्तर 11.41 और संबंधित गणना के अनुसार डिस्चार्ज 6,32,800 क्यूसेक रहा। दोनों समय प्रवाह में कमी की प्रवृत्ति दर्ज की गई लेकिन नेपाल से आने वाले पानी का दबाव अभी भी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण निगरानी बिंदु बना हुआ है। पूर्वी और पश्चिम चंपारण में प्रशासन की बढ़ी निगरानी पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव ने भी रविवार को नाव से गंडक नदी के तटबंधों का निरीक्षण किया। उन्होंने तटबंध की स्थिति, नदी के दबाव और संवेदनशील स्थानों का जायजा लिया तथा मौके पर मौजूद अधिकारियों से जलप्रवाह और सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी ली। हमारे वाल्मीकिनगर सूचना सहयोगी तूफानी चौधरी के अनुसार, बढ़े जलदबाव के मद्देनजर पश्चिम चंपारण के जिलाधिकारी तरंजोत सिंह ने रविवार को गंडक बराज का निरीक्षण किया और स्थिति का आकलन किया। उन्होंने बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बराज और तटबंधों की सतत निगरानी करने तथा संवेदनशील बिंदुओं पर विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया। तटबंधों पर दबाव, सतर्कता बढ़ी बराज से पांच लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद गंडक के निचले इलाकों और तटबंधों पर दबाव को लेकर प्रशासन की सतर्कता बढ़ गई है। पश्चिम चंपारण में बराज स्तर पर निरीक्षण और पूर्वी चंपारण में नाव से तटबंधों की निगरानी इसी सतर्कता का हिस्सा है। रविवार को गंडक के बढ़ते प्रवाह से पश्चिम चंपारण के कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति की रिपोर्ट भी सामने आई। प्रशासन की नजर अब बराज के जलस्तर, अपस्ट्रीम से आने वाले पानी, नेपाल के देवघाट क्षेत्र के प्रवाह और तटबंधों के संवेदनशील बिंदुओं पर बनी हुई है। आने वाले घंटों में जलप्रवाह की दिशा और मात्रा के आधार पर तटवर्ती क्षेत्रों में आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाए जा सकते हैं।



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